ग्रीन हाउस प्रभाव

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ग्रीनहाउस प्रभाव (greenhouse effect) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी ग्रह या उपग्रह के वातावरण में मौजूद कुछ गैसें उस ग्रह/उपग्र्ह के वातावरण के ताप को अपेक्षाकृत अधिक बनाने में मदद करतीं हैं। इन गैसों को "ग्रीनहाउस गkimjuijmuki,ki - कार्बन डाई आक्साइड, जल-वाष्प, मिथेन आदि। ग्रीनहाउस प्रभाव नहीं होता तो शायद पृथ्वी पर जीवन भी नहीं होता क्योंकि तब पृथ्वी का औसत तापमान -18° सेल्सियस होता न कि वर्तमान 15° सेल्सियस ।

धरती के वातावरण के तापमान को प्रभावित करने वाले अनेक कारक हैं जिसमें से ग्रीन हाउस प्रभाव एक है।

ग्रीन हाउस प्रभाव की खोज सन् १८२४ में जोसेफ फुरिअर (Joseph Fourier) ने की थी। इस पर विश्वसन ढ़ंग से प्रयोग सन् १८५८ में जॉन् टिण्डल (John Tyndall) ने किया। किन्तु सबसे पहले इसके बारे में आंकिक जानकारी सन् १८९६ में स्वान्ते अर्हिनिअस (Svante Arrhenius) ने प्रकाशित की।

ग्रीन हाउस प्रभाव में वृद्धि[संपादित करें]

पूरे विश्व के औसत तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की गयी है। ऐसा माना जा रहा है कि मानव द्वारा उत्पादित अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसों के कारण ऐसा हो रहा है।

and also we can say that for saving plants the green house effect .... the green house effect is responsible because our plants can not bear the temprature of the ulta voilet rays

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