गैलेक्सीय सेहरा

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गैलेक्सीय सेहरा या गलैक्टिक हेलो किसी गैलेक्सी के इर्द-गिर्द फैले हुए गोले को बोलते हैं जो गैलेक्सी के मुख्य भाग से अलग होता है। गैलेक्सीय सेहरे में तारों और गैस का घनत्व गैलेक्सी के मुख्य भाग से कहीं कम होता है और इसमें तीन प्रकार की चीज़ें हो सकती हैं -

  • गैलेक्सीय गोलाभ ("गलैक्टिक स्फ़ेरोइड") - गैलेक्सी के केंद्र के इर्द-गिर्द एक मोटी पिचके गोले सी उभरन जिसमें तारे होते हैं
  • गैलेक्सीय तेजोमंडल ("गलैक्टिक कॉरोना") - जो सेहरे के गरम प्लाज़्मा गैस के अंश को कहते हैं
  • काले पदार्थ का सेहरा ("डार्क मैटर हेलो") - जो आन्ध्र पदार्थ (ब्लैक मैटर) के अंश को कहते हैं

इन्हें भी देखें[संपादित करें]