गृहप्रबन्ध

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गृहप्रबन्ध (Homemaking) से आशय घर से सम्बन्धित कार्यों का प्रबन्धन है। यह (होममेकिंग) मुख्यतः अमेरिकी शब्द है। गृहप्रबन्ध के कई अंग हैं।

मकान का प्रबन्ध[संपादित करें]

आजकल घरों का आकार अपेक्षाकृत छोटा हो गया है। पहले साधारणत: घर बहुत बड़े बड़े हुआ करते थे। उनमें मनमाना स्थान प्राप्त किया जा सकता था। शहरों में तो अब छोटे घर ही अधिक बनने लगे हैं इनका प्रबन्ध करने में कुछ अधिक सुविधा होती है, परंतु अधिकतम सूझ बूझ की आवश्यकता होती है। घर में अच्छी मात्रा में वस्तुएँ रखने के स्थानों का प्रबन्ध रहना चाहिए। दीवारों में ताखे और अलमारियाँ बना देनी चाहिए। जिस स्थान पर जिन वस्तुओं की आवश्यकता हो उन्हें उसके पास ही रखना चाहिए। रसोई घर में टाँड़ या ताखे बरतनों के रखने के काम में आ सकते हैं। दीवार से लगाकर बनाने से बीच का स्थान बचा रहता है। दीवार में बनी अलमारी में अन्न और मसाले इत्यादि रखे जा सकते हैं। कोयला, लकड़ी इत्यादि का सबसे अच्छा स्थान सीढ़ियों के नीचे कोठरी बनाकर प्राप्त किया जा सकता है। स्नानघर में छोटे ताखे हों तो उनमें साबुन इत्यादि रखे जा सकते हैं। अच्छी मात्रा में लगी खूँटियाँ कपड़े टाँगने के काम में आ सकती हैं। सोने के कमरे की पूरी दीवार में आलमारी हो तो कपड़े रखने और टाँगने की सुविधा होती है। नीचे दराज देकर, विशेष प्रकार के पलंग बना लिए जायें तो वे दराज फालतू बिस्तर रखने के काम में आ सकती हैं। अलमारी के पल्लों के भीतरी भाग में छोटी कीलें गाड़कर पतली डोरी बाँध लें तो वे टाई टाँगने के काम में आ सकती है। कपड़े टाँगने की घोड़ी के नीचे तख्ता लगा लें, तो जूतों को स्थान मिल सकता है। भंडारघर में कई टाँड बना लेने से बहुत सामान रखा जा सकता है।

घर में प्रत्येक कार्यकलाप के लिए अलग अलग व्यवस्था रहनी चाहिए। भोजन बनाने का कमरा, अर्थात् रसोईघर, सोने का कमरा, बैठने का कमरा इत्यादि अलग अलग हों तो विशेष सुविधा होती है। कम कमरे हो तो, रसोई घर में ही भोजन करने के स्थान का तथा बैठने के कमरे में बच्चों के पढ़ने एवं अन्य सदस्यों के लिखने पढ़ने के स्थान का प्रबन्ध मेज लगाकर आसानी से किया जा सकता है। शौचालय एवं स्नानागार एक ही स्थान पर बनाए जा सकते हैं। शौचालय में फ्लश हो तो सर्वोत्तम है। रसोईघर में ही बर्तन रखने के लिए टाँड बना लेना चाहिए। दीवार में खूंटियां लगाकर चमचे, कलछियाँ इत्यादि टाँगी जा सकती हैं। यदि अलग से भंडारघर न बनाया जा सकता हो तो दीवार में ऊँचे खानों की अलमारी बनाकर टिनों में बंद करके अन्न, मसाले इत्यादि रखे जा सकते हैं।

मकान का फर्श पक्का होना आवश्यक है इससे सील से रक्षा होती है। मोज़ेइक के फर्श अधिक सुंदर एवं स्वच्छ होते हैं। आगँन का फर्श खुरदरे सीमेंट का हो तो काई नहीं लगती। नालियाँ पक्की होनी चाहिए, नहीं तो पानी चारों ओर बहता है।

मकान की भीतरी सजावट स्थान एवं आवश्यकता के अनुरूप होनी चाहिए। सजावट में प्रकाश एवं रंगों के चुनाव को प्रधानता देनी चाहिए। अँधेरे कमरे की दीवारों पर हलका या सफेद रंग करना उचित है, अन्यथा कमरा और भी अँधेरा तथा छोटा दिखाई पड़ता है। मेज कुर्सी आदि साजसज्जा कमरों की नाप के अनुसार होनी चाहिए और उन्हें इस प्रकार लगाना चाहिए कि अधिक से अधिक स्थान रिक्त रहे। कमरों के फर्श यदि मोज़ेइक या सीमेंट के चिकने बने हों तो उनपर दरी या कालीन बिछाने की आवश्यकता नही है। मेजें इस प्रकार की हों कि उनपर अधिक से अधिक सामान रखा जा सकें। आवश्यकता से अधिक साजसज्जा नहीं रहनी चाहिए। जिस वस्तु का जहाँ अधिक उपयोग हो उसे वहीं रखना चाहिए। सजावट सादी हो सकती है और भड़कीली भी, परंतु वह घर के अनुकूल होनी चाहिए। आर्थिक दृष्टि से और उपयोगिता की दृष्टि से साजसज्जा चुननी चाहिए। केवल धन के प्रदर्शन के लिए कमरे की माप का ध्यान न रखते हुए सामान की भीड़ लगाना कमरे को दुकान का रूप देना है। अत: इस बत का ध्यान रखने हुए सजावट करनी चाहिए कि हमें घर में रहना है और सुविधापूर्वक रहना है। परदे धूप, चमक, ठंड इत्यादि से रक्षा करने के लिए होने चाहिए। एतदर्थ गहरे रंग के मोटे कपड़े उपयोगी होते हैं। कमरे की दीवारों के रंगों से मेल खाते रंगों के परदे, कुर्सियों की खोलियाँ, गद्दियाँ और मेजपोश हों तो सुरुचि के परिचायक होते हैं।

सफाई का प्रबन्ध[संपादित करें]

सफाई के आवश्यक साधन निम्नांकित हैं :

झाडू[संपादित करें]

झाडू फर्श की सफाई के लिए प्रयोग में लाई जाती है। झाडू नारियल की सींक, सिरकी, ताड़ के पत्ते या फूल की होती है। नारियल की सींक की झाडू पक्के एवं कठोर फर्श और दरी के लिए अच्छी होती है। फूल की झाडू चिकने फर्शों के लिए अच्छी होती है। सिरकी की झाडू कच्चे फर्श के लिए अधिक सुविधाजनक होती है। वैकुअम क्लीनर बिजली से चलते हैं और बड़ी अच्छी सफाई करते हैं।

बुरुश[संपादित करें]

बुरुश छोटे और लंबे हत्थों के होते हैं। इनसे सब प्रकार के फर्श झाड़े जा सकते हैं। लंबे हत्थों के बुरुश से खड़े होकर काम किया जा सकता है, जो अधिक सुविधाजनक होता है। बुरुश कड़े ओर नरम दोनों प्रकार के रेशों के होते हैं। कालीन साफ करने के बुरुश नरम रेशे के होने चाहिए।

पोछना (Mop)[संपादित करें]

लंबे हत्थे के नीचे लकड़ी का तख्ता लगाकर उसमें मोटा कपड़ा या लंबे मोटे सूत जड़ दिए जाते हैं। मोज़ेइक के, या अन्य चिकने फर्श, इससे पोंछे जाते हैं। छोटे फर्श हों तो बड़ा बोरा भिगोकर भी काम चलाया जा सकता है।

झाड़न[संपादित करें]

मोटे सूती कपड़े की झाड़न झाड़ पोंछ के काम आती है। नरम कपड़े की झाड़नें अच्छी होती हैं। चमकदार फर्नीचर इनसे पोछने से उसपर लकीरें इत्यादि नहीं पड़ती। रोएँ झड़नेवाला कपड़ा भी अच्छा नहीं होता। पानी इत्यादि पोंछने की झाड़न मोटी और पानी सोखनेवाली होनी चाहिए।

शेमॉय का चमड़ा (Chamois leather)[संपादित करें]

यह काच, चाँदी और पालिशदार धातुओं को साफ करने के काम आता है। इसे प्रयोग में लाने से इनकी चमक बनी रहती है।

सफाई के उपकरण[संपादित करें]

सफाई के उपकरण निम्नांकित हैं :

साबुन-साबुन की टिकियाँ होती हैं। चूरा भी होता है। तरल रूप में भी होता है। साबुन बहुत उपयोगी पदार्थ है। शरीर, कपड़े, बर्तन इत्यादि सब कुछ इससे साफ किया जा सकता है।

अम्ल-नींबू, सिरका, आम, इमली, ऑक्सैलिक अम्ल, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, ये सब खटाइयाँ आवश्यकतानुसार काम में आती हे। इनसे धातु के बर्तन के दाग इत्यादि साफ किए जाते हैं।

क्षारीय पदार्थ-सुहागा, सोडा, ऐमोनिया और चूना।

तेल-मिट्टी का तेल, पेट्रोल, अलसी का तेल, तारपीन का तेल। मिट्टी का तेल प्राय: मशीनों के भाग एवं कपड़े पर लगे चिकनाई वाले दागों को साफ करने के काम में आता है। पेट्रोल कपड़ों की सूखी धुलाई के काम में आता है। शेष दोनों से पालिशदार वस्तुएँ साफ की जाती है।

वस्तुओं की सफाई[संपादित करें]

बर्तनों की सफाई[संपादित करें]

ऐल्यूमिनियम के बर्तनों को साबुन के पानी से धोना चाहिए। यदि ठीक से साफ न हों तो नीबू रगड़कर गरम पानी से धो देना चाहिए। पीतल और ताँबे के बरतन गरम राख से रगड़कर माँज लेना चाहिए। दाग पड़े हों तो खटाई से रगड़कर छुड़ा देने चाहिए। पीतल के हैंडल इत्यादि ब्रासो से साफ होते हैं जरमन सिलवर के बर्तन चोकर अथवा साबुन के पानी से अच्छे साफ होते हैं। चाँदी के बर्तन भी चोकर या साबुन के पानी से साफ करके तुरंत नरम कपड़े से पोंछ देने चाहिए। काच और चीनी के बर्तन गरम पानी एवं साबुन के विलयन या सोडे के विलयन से साफ करने चाहिए।

कपड़ों की सफाई[संपादित करें]

सूती कपड़े साधारण, कपड़े धोनेवाले साबुन से रगड़कर ठंढे पानी से धो डालने चाहिए, फिर किसी बर्तन में उन्हें उबाल लेना चाहिए, रंगीन कपड़े नहीं उबालने चाहिए, फिर कुछ कलफ और नील लगाकर उन्हें सुखा लेना और उन पर इस्तरी कर लेनी चाहिए। ऊनी और रेशमी कपड़े लक्स साबुन के ठंडे विलयन में कुछ देर डुबो देने चाहिए और हाथ से दबाकर उन्हें फिर निकाल लेना चाहिए। फिर पानी से धोकर साबुन छुड़ा दिया जाए। छाया में सुखाना चाहिए। धोने से पहले दाग छुड़ा दें।

फर्नीचर की सफाई[संपादित करें]

अलसी के तेल अथवा स्पिरिट से साफ करना चाहिए। इससे चमक आती है।

गंदगी की सफाई-कूड़ा एक जगह जमा करके या तो जला देना चाहिए अथवा उसे नियत स्थान पर रख देना चाहिए जहाँ से नगरपालिका के कर्मचारी उठा ले जाते हैं। जला देने से अच्छी सफाई हो जाती है। नालियों एवं शौचालयों को प्रतिदिन धोकर फ़िनाइल डाल देना चाहिए। पीने के पानी की गंदगी उबालकर छान लेने से ठीक हो जाती हैे। पोटाश परमैंगेनेट के विलयन से तरकारी, फल इत्यादि को धोकर साफ कर लिया जाता है।

भोजन का प्रबन्ध[संपादित करें]

भोजन का प्रबन्ध मुख्यतया स्वास्थ्य की दृष्टि से करना उचित है। शरीर की आवश्यकताओं के आधार पर भोजन का चुनाव करना चाहिए।

प्रोटीन एवं खनिज लवणों से युक्त पदार्थ शरीर के तंतुओं को बनाने वाले पदार्थ हैं तथा इस कार्य के लिए आवश्यक हैं। प्रोटीन दूध, पनीर, अंडे, मांस, मछली, दाल, चना, गेहूं, ज्वार, बाजरा, सूखे मेवों, मूंगफली एवं शाकों में पाया जाता है। खनिज लवण दूध, दही, मठा, अंडा, दाल, चना, फल एवं पत्तेदार तरकारियों में पाए जाते हैं।

आहार से हमें तंतुओं के बनाने के अतिरिक्त शरीर में ऊर्जा प्राप्त होती है तथा रोगों से शरीर की रक्षा होती है। विभिन्न आहारों से विभिन्न कार्य होते हैं। देखें 'आहार और आहार विद्या'।

व्यय का प्रबन्ध[संपादित करें]

आय सीमित होने पर व्यय संबंधी प्रबन्ध कठिन हो जाता है। व्यय का विभाजन आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। सीमित आय में सबसे पहले मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताओं पर व्यय करना चाहिए। ये आवश्यकताएँ घर, भोजन और वस्त्र हैं। इनके बाद शिक्षा एवं चिकित्सा संबंध व्यय हैं। इन बातों की पूर्ति हो जाए तब कुछ आराम देनेवाली आवश्यकताओं की पूर्ति पर ध्यान देना उचित है। विलास संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति का स्थान अंत में आता है। कुछ न कुछ बचत करने की चेष्टा करनी चाहिए। विभिन्न मदों के लिए सामान्य रूप से एक बजट बना लेना चाहिए। आजकल प्रति दिन बढ़ती महंगाई में आय व्यय का संतुलन बिठाना कठिन हो रहा है फिर भी एक कामचलाऊ बजट अपनी आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जा सकता है।