गुरुवायुर

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गुरुवायूर
—  city  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य केरल
जिला त्रिशूर
जनसंख्या 21,187 (2001 के अनुसार )

Erioll world.svgनिर्देशांक: 10°21′N 76°12′E / 10.35, 76.2

गुरुवायुर (मलयालम: ഗുരുവായൂർ)(जिसे गुरुवायूर भी लिखा जाता है और कभी-कभी गुरुवयुनकेरे के नाम से भी जाना जाता है) एक भीड़भाड़ युक्त तीर्थस्थल है भारत के केरल राज्य के थ्रिसुर जनपद के अंतर्गत आने वाली नगरपालिका है. यह थ्रिसुर नगर के उत्तरपश्चिम में 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

अनुक्रम

[संपादित करें] गुरूवायूर मंदिर

गुरुवायुर अपने मंदिर[1] के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है, जो कई शताब्दियों पुराना है और केरल में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है. मंदिर के देवता भगवान् गुरुवायुरप्पन हैं जो बालगोपालन (कृष्ण भगवान् का बालरूप) के रूप में हैं. हालांकि गैर-हिन्दुओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तथापि कई धर्मों को मानने वाले भगवान गुरूवायूरप्पन के परम भक्त हैं.

एक विख्यात शास्त्रीय प्रदर्शन कला कृष्णनट्टम कली, जोकि विश्व स्तर पर प्रसिद्ध नाट्य-नृत्य कथकली के प्रारंभिक विकास में सहायक थी,उसका गुरुयावूर में काफी प्रचलन है क्यूंकि मंदिर प्रशासन (गुरुयावूर देवास्वोम) एक कृष्णट्टम संस्थान का संचालन करता है. इसके अतिरिक्त, गुरुयावूर मंदिर दो प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों के लिए भी विख्यात है: मेल्पथूर नारायण भट्टाथिरी के नारायणीयम और पून्थानम के ज्नानाप्पना, दोनों (स्वर्गीय) लेखक गुरुवायुरप्पन के परम भक्त थे. जहां नारायणीयम संस्कृत में, दशावतारों (महाविष्णु के दस अवतार) पर डाली गयी एक सरसरी दृष्टि है, वहीं ज्नानाप्पना स्थानीय मलयालम भाषा में, जीवन के नग्न सत्यों का अवलोकन करती है और क्या करना चाहिए व क्या नहीं करना चाहिए, इसके सम्बन्ध में उपदेश देती है.

गुरुवायुर मंदिर प्रवेश

गुरुवायुर दक्षिण भारतीय शास्त्रीय कर्नाटकीय संगीत का एक प्रमुख स्थल है, विशेषकर यहां के शुभ एकादसी दिवस के दौरान जोकि सुविख्यात गायक चेम्बाई वैद्यनाथ भगावतार की स्मृति में मनाया जाता है, यह भी गुरुवायुरप्पन के दृढ़ भक्त थे. मंदिर वार्षिक समारोह (उल्सवम) भी मनाता है जो कुम्भ के मलयाली महीने (फरवरी-मार्च) में पड़ता है इसके दौरान यह शास्त्रीय नृत्य जैसे कथकली, कूडियट्टम, पंचवाद्यम, थायाम्बका और पंचारिमेलम आदि का आयोजन करता है. इस स्थान ने कई प्रसिद्ध थाप वाले वाद्यों जैसे चेन्दा, मद्दलम, तिमिला, इलाथलम और इडक्का आदि के वादकों को जन्म दिया है.

मंदिर का संचालन गुरुवायुर देवास्वोम प्रबंधन समिति के द्वारा, केरल सरकार के निर्देशन में किया जा रहा है. समिति के अस्थायी सदस्यों का "नामांकन" राज्य सरकार के सत्तारूढ़ दल द्वारा समय-समय पर किया जाता है. स्थायी सदस्य, चेन्नास माना (मंदिर के परंपरागत तंत्री), सामुथिरी और मल्लिस्सेरी माना, परिवारों के वर्तमान मुखिया होते हैं.

टीपू सुल्तान के आक्रमण के दौरान श्री गुरुवायुरप्पन की पवित्र प्रतिमा को अम्बलाप्पुज्हा मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया था और फिर मवेलिक्कारा श्री कृष्णास्वामी मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया था.

[संपादित करें] पौराणिक कथा

मंदिर के भगवान् के सम्बन्ध में सर्वाधिक प्रसिद्ध पौराणिक कथा गुरु बृहस्पति और वायु (पवन देवता) से सम्बंधित है.

वर्तमान युग के आरम्भ में, बृहस्पति को भगवान कृष्ण की एक तैरती हुई मूर्ति मिली. उन्होंने और वायु देवता ने, इस युग में मानवों की सहायता हेतु इस मंदिर में भगवान् की स्थापना की. यह पौराणिक कथा ही दोनों लघु प्रतिमाओं के नाम गुरुवायुरप्पन और इस नगर के नाम गुरुवायुर का आधार है.[2]

यह माना जाता है कि यह मूर्ति जो अब गुरुवायुर में है, वह द्वापर युग में श्री कृष्ण द्वारा प्रयोग की गयी थी.

[संपादित करें] अन्य आकर्षण


अन्य आकर्षणों में मंदिर के पास एक प्रसिद्ध गज अभ्यारण्य (पुन्नाथुर कोट्टा) है जहां मंदिर के कार्यों हेतु विशाल हाथियों को प्रशिक्षित किया जाता है. वर्तमान में इस अभ्यारण्य में 60 से भी अधिक हाथी हैं, यह सभी भगवान् गुरुवायुर के भक्तों द्वारा समर्पित हैं. मंदिर से जुड़े प्रमुख हाथियों में से एक अग्रणी हाथी का नाम गुरुवायुर केसवन है जो एक सुविख्यात हाथी था. इसे मंदिर के पौराणिक साहित्य में स्थान दिया गया है.

यह मंदिर केरल में हिन्दू विवाहों का प्रमुख स्थल है. मंदिर में प्रतिदिन अत्यधिक संख्या में विवाह होते हैं- कभी-कभी एक ही दिन में 100 से भी अधिक. भगवान् गुरुवायुरप्पन के भक्त यह मानते हैं कि भगवान् के सामने वैवाहिक जीवन शुरू करना अत्यंत शुभ है.

यदि आप गुरुयावूर मंदिर देखने आये हैं तो पास ही स्थित माम्मियूर के शिव मंदिर के दर्शन के बिना इसका भ्रमण अधूरा है. यदि आपके पास एक अतिरिक्त दिन का समय है तो और भी कई मंदिर देखने योग्य हैं. आप भगवान वडक्कनाथन के दर्शन के लिए थ्रिसुर (या त्रिचूर) जा सकते हैं.प्रसिद्ध थ्रिसुर पूरम, इसी मंदिर के पास स्वराज घेरे में आयोजित होता है. पास ही में आप परमेलकावु (भगवती) मंदिर और थुरुवाम्पादी कृष्ण मंदिर के भी दर्शन कर सकते हैं. इसके बाद कूदाल्मानिक्यम मंदिर में संगमेश्वरर के दर्शन के लिए इरिन्जलाक्कुडा जा सकते हैं (यहां से पेरुवानाम (भगवान शिव) और फिर थ्रिप्रयर (भगवान राम) जाया जा सकता है. इसके बाद वापस गुरुवायुर.

श्री कृष्ण चेतना अंतर्राष्ट्रीय संस्थान (ISKCON) ने हाल ही में यहां एक केंद्र और नगर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक अतिथि भवन की शुरुआत की है. यहां कई होटल, सराय, रेस्तरां और विवाह हाल हैं और यह फलता-फूलता बाज़ार केंद्र है.

[संपादित करें] परिवहन

हर कुछ मिनटों पर थ्रिसुर शक्तन थामपुरण बस अड्डे, एर्नाकुलम बोर जेट्टी केएसआरटीसी (KSRTC) अड्डे और कलूर से बसें चलती हैं. उत्तरी परावुर, कोझिकोड, पलक्कड़, कोडुन्गल्लुर, कोट्टायम, पथानाम्थित्ता, पाम्बा/सबरीमाला, मवेलिक्कारा और थिरुवनंतपुरम से भी बसें चलती हैं. प्रत्येक कुछ मिनटों पर गुरुवायुर केएसआरटीसी (KSRTC) अड्डे से कोडुन्गल्लुर, पारावुर होते हुए एर्नाकुलम बोट जेट्टी के लिए बसें चलती हैं, जो दक्षिण केरल पहुंचने का सबसे आसान रास्ता है. . गुरुवायुर स्टेशन से थ्रिसुर और एर्नाकुलम के लिए यात्री ट्रेनें चलती हैं, साथ ही साथ रात को चलकर सुबह पहुंचाने वाली एक एक्सप्रेस ट्रेन भी थिरुवनंतपुरम और आगे चेन्नई तक चलती है. सबसे नजदीकी हवाई अड्डा, कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, गुरुवायुर से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर है. यदि आप कोझिकोड से आ रहे हैं, तो बस या कार द्वारा गुरुवायुर पहुंचने में लगभग 3.5 घंटे लगेंगे.

गुरुवायुर के नज़दीक चवक्कड़ से होते हुए 3 किलोमीटर की दूरी पर एन एच - 17 है और जो र त्रिप्रयर, कोडुन्गल्लुर, पारावुर जंक्शन से इडापल्ली जंक्शन की ओर बढ़ता है. यह थ्रिसुर शहर और व्यस्त एनएच - 47 (NH - 47)से बचते हुए कोच्ची, केंदीय केरल और दक्षिण केरल पहुंचने का सबसे सरल रास्ता है.

[संपादित करें] गुरुवायुर से सबरीमाला - परिवहन मार्ग (बसों सहित सभी वाहनों के लिए उपयुक्त)

  • गुरुवायुर पूर्व नाडा - माम्मियूर जंक्शन 0.8 किमी
  • माम्मियूर जंक्शन-चवक्कड़ 2.84 किमी
  • चवक्कड़-थ्रिप्रयर 22 किमी
  • थ्रिप्रयर - कोडुन्गल्लुर 23.35 किमी
  • कोडुन्गल्लुर - पारावुर जंक्शन 10.95 किमी और एसएच से अलुवा भी, एमसी मार्ग
  • पारावुर जंक्शन-वरपुज्हा ब्रिज 12.05 किमी
  • वरपुज्हा ब्रिज- इदाप्पल्ली जंक्शन (कोच्चि/कोचीन) 6.83 किमी
  • कोच्चि/कोचीन (इदाप्पल्ली जंक्शन) - व्यत्तिला जंक्शन 6.0 किमी (एसएच से कोट्टायम भी, चोत्तानिकारा मंदिर का रास्ता)
  • व्यत्तिला जंक्शन-अरूर ब्रिज 9.05 किमी
  • अरूर ब्रिज-अरूर जंक्शन 1.51 किमी
  • अरूर जंक्शन-चेर्थाला एक्स-रे जंक्शन 33.04 किमी
  • चेर्थाला एक्स-रे जंक्शन-अलाप्पुझा आयरन ब्रिज 21.0 किमी
  • अलाप्पुझा आयरन ब्रिज-कलार्कोड जंक्शन 3.2 किमी
  • कलार्कोड जंक्शन-8.0 किमी नेडुमड़ी
  • नेडुमडी-मंकोम्पू ब्लॉक

जंक्शन 2.8 किमी

  • मंकोम्पू ब्लॉक जंक्शन -किदंगारा 7.0 किमी
  • किदंगारा ब्रिज-पेरुन्ना(चंगनास्सेरी) 6.4 किमी
  • चंगनास्सेरी - पेरुन्ना-मुथूर 4.6 किमी
  • मुथूर-थिरूवल्ला 2 किमी
  • थिरूवल्ला-कोझेनचेरी 20.6 किमी
  • कोज्हेंचेरी-पथानमथीट्टा 10.6 किमी
  • पथानमथीट्टा - मन्नार्कुलांजी जंक्शन 6.1 किमी
  • मन्नार्कुलांजी जंक्शन-वादास्सेरिक्कारा 5.0 किमी
  • वादास्सेरिक्कारा-प्लाप्पल्ली 26.9 किमी
  • प्लाप्पल्ली-चलाकयम 21.5 किमी
  • चलाकयम - पाम्बा 3.0 किमी
  • अलाप्पुझा - अम्बलाप्पुझा 10 किमी
  • अम्बलाप्पुझा - मंनारसला 20 किमी
  • मंनारसला - चेत्तिकुलान्गारा मंदिर - 15 किमी
  • चेत्तिकुलान्गारा - मवेलिक्कारा 4 किमी
  • मवेलिक्कारा - पन्दालम 15 किमी
  • पन्दालम - पाम्पा 80 किमी
  • पाम्बा - सबरीमला दुर्गम पथ यात्रा मार्ग 4 किमी

[संपादित करें] जनसांख्यिकी

भारतीय जनगणना 2001[3] के अनुसार, गुरुवायुर की जनसंख्या 21,187 थी. जनसंख्या का 46% हिस्सा पुरुष तथा 54% महिलाएं थीं. गुरुवायुर में औसत साक्षरता दर 85 प्रतिशत है, जोकि राष्ट्रीय औसत 59.5 प्रतिशत से भी अधिक है: पुरुष साक्षरता दर 86 प्रतिशत और महिला साक्षरता 85 प्रतिशत है. गुरुवायुर में, जनसंख्या के 10 प्रतिशत लोग 6 वर्ष से कम उम्र के हैं.

[संपादित करें] राजनीति

गुरुवायुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र त्रिचूर (लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र)[4] का एक हिस्सा है.

[संपादित करें] गैलरी

[संपादित करें] उपग्रह छवि

[संपादित करें] इन्हें भी देखें

  • थ्रिसुर जिला
  • गुरुवायुरप्पन
  • गुरुवायुर मंदिर
  • पुनाथुर कोटा

[संपादित करें] संदर्भ

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This March 2009 includes a list of references, related reading or external links, but its sources remain unclear because it lacks inline citations. Please improve this article by introducing more precise citations where appropriate. (April 2009)

[संपादित करें] बाहरी लिंक्स

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