गुग्गुल

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कॉमिफ़ूरा विग्टियाई
Commiphora wightii गुग्गुल से प्राप्त राल (रेजिन)
Commiphora wightii गुग्गुल से प्राप्त राल (रेजिन)
संरक्षण स्थिति
आंकड़ों का अभाव (IUCN2.3)
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
(अश्रेणिकृत) एंजियोस्पर्म्
(अश्रेणिकृत) यूडिकॉट्स
(अश्रेणिकृत) रोज़िड्स
गण: सैपिन्डेल्स
कुल: बुर्सरेसी
प्रजाति: कॉमिफ़ोरा
जाति: C. wightii
द्विपद नाम
Commiphora wightii
(आर्न.) भण्डारी
पर्याय

कॉमिफ़ोरा मुकुल (Stocks) Hook.

गुग्गुल या 'गुग्गल' एक वृक्ष है। इससे प्राप्त राल जैसे पदार्थ को भी 'गुग्गल' कहा जाता है। भारत में इस जाति के दो प्रकार के वृक्ष पाए जाते हैं। एक को कॉमिफ़ोरा मुकुल (Commiphora mukul) तथा दूसरे को कॉ. रॉक्सबर्घाई (C.roxburghii) कहते हैं। अफ्रीका में पाई जानेवाली प्रजाति कॉमिफ़ोरा अफ्रिकाना (C.africana) कहलाती है।

कुछ स्थानों से प्राप्त गुग्गुल का रंग पीलापन लिए श्वेत तथा अन्य का गहरा लाल होता है। इसमें मीठी महक रहती है। इसको अग्नि में डालने पर स्थान सुंगध से भर जाता है। इसलिये इसका धूप के सदृश व्यवहार किया जाता है। आयुर्वेद के मतानुसार यह कटु तिक्त तथा उष्ण है और कफ, बात, कास, कृमि, क्लेद, शोथ और अर्श नाशक है।

परिचय[संपादित करें]

गुग्‍गल एक छोटा पेड है जिसके पत्‍ते छोटे और एकान्‍तर सरल होते हैं। यह सिर्फ वर्षा ऋतु में ही वृद्धि करता है तथा इसी समय इस पर पत्‍ते दिखाई देते हैं। शेष समय यानि सर्दी तथा गर्मी के मौसम में इसकी वृद्धि अवरूद्ध हो जाती है तथा पर्णहीन हो जाता है। सामान्‍यत: गुग्‍गल का पेड 3-4 मीटर ऊंचा होता है। इसके तने से सफेद रंग का दूध निकलता है जो इसका का उपयोगी भाग है। प्राकृतिक रूप से गुग्‍गल भारत के कर्नाटक, राजस्‍थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश राज्‍यों में उगता है। भारत में गुग्‍गल विलुप्‍तावस्‍था के कगार पर आ गया है, अत: बडे क्षेत्रों मे इसकी खेती करने की जरूरत है। भारत में गुग्‍गल की मांग अधिक तथा उत्‍पादन कम होने के कारण अफगानिस्तानपाकिस्तान से इसका आयात किया जाता है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]