गीज कुल

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गीज (Guise) फ्रांस के लोरेन राजवंश की अत्यधिक विख्यात शाखा थी जिसने १६वीं शताब्दी में पूर्ण वैभव प्राप्त किया था। लोरेन के ड्यूक रेने द्वितीय ने लोरेन वंश की दोनों शाखाओं को एक सूत्र में बाँधा। उसके ज्येष्ठ अनुजीवित पुत्र ऐंथोनी लोनेन ने ड्यूक की पदवी प्राप्त की जबकि द्वितीय पुत्र क्लाद क्रमश: काउंट और गीज़ के ड्यूक की पदवियों से सुशोभित हुआ।

क्लाद[संपादित करें]

क्लाद (Claude ; १४९५-१५५०) गीज़ का प्रथम ड्यूक था। इसे फ्रेंच दरबार में शिक्षा मिली। इसने फ्रांसिस प्रथम के प्रति अनन्य भक्ति दिखाई। इसने सैनिक जीवन अपनाया और मैरिगनैनों के युद्ध में ख्याति प्राप्त की तथा १५२६ ई. में लोरेन स्थित अनाबप्तिस्ती के विद्रोह का दमन करने के प्रतिफल स्वरूप गीज़ के ड्यूक की पदवी प्राप्त की। इसके पश्चात् १५४२ ई. में लक्जेम्बर्ग की चढ़ाई में इसे विशेष ख्याति मिली। इसका विवाह बूरबान कुल की आंत्वानेत से १५१३ ई. में हुआ था। जिससे १२ संतानें हुई। इसकी पुत्री मेरी का विवाह स्काटलैंड के जेम्स पंचम से हुआ जो स्काट्स की रानी मेरी की माँ थी।

फ्रांसिस[संपादित करें]

फ्रांसिस (१५१९-६८) गीज़ का द्वितीय ड्यूक तथा क्लाद का पुत्र था। आगे चलकर यह महान् सेनाध्यक्ष तथा कैथोलिक नेता हुआ। चार्ल्स पंचम (१५५२) के विरुद्ध इसने मेट्स की रक्षा सफलतापूर्वक की। रेंटी के युद्ध (१५५४) में इसे विशेष ख्याति मिली। नेपिल्स की चढ़ाई (१५५६) का इसने नेतृत्व किया तथा १५६८ ई. में इंग्लैंड से कैले छीन लिया। कैले के घेरे में ही (१५६८) एक ह्यूगोनाट के हाथों इसकी मृत्यु हुई। इसने एस्ते की ऐन से १५४८ ई. में विवाह किया था।

हेनरी प्रथम[संपादित करें]

हेनरी प्रथम (१५५०-८८) गीज़ का तृतीय ड्यूक था। फ्रांसिस का पुत्र होने के कारण उसे कैथोलिक दल का नेतृत्व मिला। इसने प्नाइटीयर्स, जारनैक तथा डारमैंस के युद्ध किए। यह सेंट बार्थलोम्यू (१५७२) के रक्तपात का उत्तरदायी था। इसकी राजा बनने की महत्वाकांक्षा थी किंतु हेनरी तृतीय की आज्ञा से ब्ल्वा में इसका वध कर दिया गया। इसका विवाह क्लीव्स की कैथरीन से हुआ था जिससे १४ संतानें थीं। चार्ल्स चतुर्थ (१५७१-१६४०) गीज़ का चतुर्थ ड्यूक था, हेनरी प्रथम का ज्येष्ठ पुत्र। अपने पिता की मृत्यु पर इसे तीन वर्ष जेल में रखा गया। १५९१ ई. में इसे मुक्ति मिली। इसने हेनरी चतुर्थ को अपनी सेवाएँ अर्पित कीं और विद्रोही राजाओं तथा प्रोटेस्टेंटों के विरुद्ध संघर्ष करता रहा। १६१३ ई. में रिशलू द्वारा देशनिकाला होने पर इसने इटली में अपना जीवन समाप्त कर दिया।

हेनरी द्वितीय[संपादित करें]

हेनरी द्वितीय (१६१४-६४) गीज़ का पंचम ड्यूक तथा चार्ल्स चतुर्थ का पुत्र था। यह १६२९ ई. में रेम्स का आर्चबिशप हुआ और १६४० में ड्यूक का पद प्राप्त किया। यह रिशलू के विरुद्ध षड््यत्रं में सम्मिलित हुआ था जिसपर इसे मृत्यु दंड मिला और इसे फ्लांडर्स में शरण लेनी पड़ी। १६४७ ई. में इसने नेपिल्स का राजमुकुट हथियाना चाहा और १६४८ से १६५२ ई. तक स्पेन में बंदी रहा। १६५२ ई. में किसी प्रकार जेल से निकल भागा और फिर एक बार नेपिल्स जीतने का प्रयत्न किया किंतु असफल रहा। १६५५ ई. में यह फ्रांस का हाई चैंबरलेन हुआ।

लुई जोज़ेफ[संपादित करें]

लुई जोज़ेफ (१६५०-७१) हेनरी द्वितीय का भतीजा तथा गीज़ का षष्ठ ड्यूक था। फ्रांसिस जोज़ेफ, (१६७०-७५) लुई जोज़ेफ का पुत्र तथा सप्तम् और गीज़ का अंतिम ड्यूक था। इसकी मृत्यु पर गीज़ की ड्यूक शृंखला समाप्त हो गई और पद तथा जागीर दोनों उसकी चाची, लोरेन की मेरी के पास चली गई जो चतुर्थ ड्यूक की पुत्री और गीज़ की डचेस (१६१५-८८) थी।

सन्दर्भ ग्रन्थ[संपादित करें]

  • आर. डी. बूइली : गीज़ के ड्यूक्स का इतिहास, भाग चतुर्थ (१९४९);
  • एच. एम. विलियम्स : गीज़ के ड्यूक का इतिहास, भाग द्वितीय (१९१८)।