गांधी-नेहरू परिवार

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गान्धी-नेहरू परिवार
जाति कश्मीरी पण्डित, हिन्दू,
वर्तमान क्षेत्र भारत
जानकारी
उद्गम स्थल गंगाधर नेहरू
उल्लेखनीय सदस्य मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी, सोनिया गांधी, मेनका गांधी, राहुल गांधी, वरुण गांधी
नेहरू परिवार का सन् 1927 का चित्र खड़े हुए (बायें से दायें) जवाहरलाल नेहरू, विजयलक्ष्मी पण्डित, कृष्णा हठीसिंह, इंदिरा गांधी और रंजीत पण्डित; बैठे हुए: स्वरूप रानी, मोतीलाल नेहरू और कमला नेहरू

गान्धी-नेहरू परिवार भारत का एक प्रमुख राजनीतिक परिवार है, जिसका देश की स्वतन्त्रता के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर करीब-करीब वर्चस्व रहा है। नेहरू परिवार के साथ गान्धी नाम फिरोज गान्धी से लिया गया है, जो इन्दिरा गान्धी के पति थे। गान्धी नेहरू परिवार में गान्धी शब्द महात्मा गान्धी से जुड़ा हुआ नहीं है।

इस परिवार के तीन सदस्य - पण्डित जवाहर लाल नेहरू, इंन्दिरा गान्धी और राजीव गान्धी देश के प्रधानमन्त्री रह चुके थे, जिनमें से दो - इन्दिरा गान्धी और राजीव गान्धी की हत्या कर दी गयी। गान्धी-नेहरू परिवार के चौथे सदस्य राजीव गान्धी की पत्नी सोनिया गान्धी इस समय कांग्रेस की अध्यक्ष हैं जबकि उनके पुत्र राहुल गान्धी कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। राहुल गान्धी ने 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव जीता।

राजीव गान्धी के छोटे भाई संजय गांधी की विधवा पत्नी मेनका गान्धी व उनके पुत्र वरुण गांधी को परिवार की सम्पत्ति में कोई हिस्सा न मिलने के कारण[कृपया उद्धरण जोड़ें] वे माँ-बेटे भारतीय जनता पार्टी में चले गये जो देश का कांग्रेस के बाद एक प्रमुख राजनीतिक दल है।

उत्पत्ति का संक्षिप्त इतिहास[संपादित करें]

नेहरू परिवार का सम्बन्ध मूलत: कश्मीर से है। नेहरू ने अपनी आत्मकथा मेरी कहानी में इस बात का उल्लेख किया है कि स्वयं फर्रुखसियर[1] ने उनके पुरखों को सन् सत्रह सौ सोलह के आसपास दिल्ली लाकर बसाया था। दिल्ली के चाँदनी चौक में उन दिनों एक नहर हुआ करती थी। नहर के किनारे बस जाने के कारण उनका परिवार नेहरू के नाम से मशहूर हो गया।

अपने दादा गंगाधर के विषय में नेहरू ने एक रोमांचक रहस्योद्घाटन करते हुए लिखा है कि वे अठारह सौ सत्तावन के गदर के कुछ पहले दिल्ली के कोतवाल थे। गदर में हुई भयंकर मारकाट की वजह से उनका परिवार पूरी तरह बर्वाद हो गया और खानदान के तमाम कागज़-पत्र और दस्तावेज़ तहस-नहस हो गये। इस तरह अपना सब कुछ खो चुकने के बाद उनका परिवार दिल्ली छोड़ने वाले और कई लोगों के साथ वहाँ से चल पड़ा और आगरा जाकर बस गया।

अठारह सौ इकसठ में चौंतिस साल की भरी जवानी में ही वह मर गये। अपने दादा गंगाधर की एक छोटी सी तस्वीर का जिक्र करते हुए नेहरू ने लिखा है कि वे मुगलिया लिबास पहने किसी मुगल सरदार जैसे लगते थे।[2] वकौल नेहरू उनके दादा की मौत के तीन महीने बाद 1861 में उनके पिता मोतीलाल नेहरू का जन्म आगरे मे हुआ। उनके पिता सहित पूरे परिवार की परवरिश उनके चाचा ताऊओं ने की।

1857 के विद्रोह से पहले मोतीलाल के पिता मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर के जमाने में दिल्ली के नगर कोतवाल थे। परन्तु जब इतिहासकारों ने खोजबीन की तो पाया कि नगर कोतवाल आज के पुलिस कमिश्नर जैसा महत्वपूर्ण पद था और ऐसे महत्वपूर्ण पद पर अनिवार्य रूप से केवल मुसलमान और वो भी अपने ही वंश के मुसलमान रखे जाते थे। किसी हिन्दू को इतने महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किये जाने की सम्भावना बिल्कुल भी नहीं थी। मुगल अभिलेखों से यह भी पता चला है कि बहादुरशाह जफर के समय कोई भी हिन्दू इतने महत्वपूर्ण ओहदे पर नहीं था। अभिलेखागार से काफी छानबीन करने पर यह भी पता चला कि उस वक्त के दो नायब कोतवाल हिन्दू थे जिनके नाम भाऊसिंह और काशीनाथ थे जो कि लाहौरी गेट, दिल्ली में तैनात थे। लेकिन किसी गंगाधर नाम के व्यक्ति का कोई रिकार्ड नहीं मिला। शहर कोतवाल का नाम गयासुद्दीन गाजी अवश्य मिला जिसकी पुष्टि इतिहासकारों ने की है।[3]

मोतीलाल नेहरू ने पहले वकालत पढ़ी, फिर वकालत की और अन्त में हाईकोर्ट इलाहाबाद आ गये। संयोग से उनके बड़े भाई नन्दलाल नेहरू की मृत्यु हो गयी जिससे उनके सारे मुवक्किल मोतीलाल को मिल गये और उनकी वकालत में पैसा पानी की तरह बरसा। इलाहाबाद में ही उनके बड़े बेटे जवाहर का जन्म हुआ। मोतीलाल नेहरू के मुंशी मुबारक अली[4] बचपन में बालक जवाहर को पुराने जमाने की कहानियाँ सुनाया करते थे कि किस प्रकार उसके दादा को बागियों ने अठारह सौ सत्तावन के गदर में तबाह कर दिया। अगर मुसलमानों ने उनकी हिफ़ाजत न की होती तो नेहरू खानदान का कहीं नामोनिशान तक न होता।[5]

गान्धी-नेहरू परिवार का राजनीतिक आधार मोतीलाल नेहरू (1861-1931) ने रखा था। मोतीलाल नेहरू एक प्रसिद्ध वकील और स्वतन्त्रता सेनानी थे। मोतीलाल नेहरू के पिता का नाम गंगाधर नेहरू और माँ का नाम जीवरानी था।[6] मोतीलाल के पुत्र जवाहरलाल नेहरू (1889-1964) ने स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा लिया और 1929 में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये। जवाहरलाल नेहरू गान्धी के काफी करीब थे।

नेहरू के कोई पुत्र न था किन्तु वे बहुत दूरदर्शी थे। उन्होंने काफी समय पूर्व ही इस तथ्य को समझ लिया था कि हिन्दुस्तान के लोकमानस पर गान्धी का गहरा प्रभाव पड़ चुका है अत: उन्होंने अपनी एकमात्र पुत्री इन्दिरा प्रियदर्शिनी का विवाह किसी नेहरू या कौल के कुल में न करके फीरोज़ गान्धी से जानबूझकर किया था जिससे कि उनकी भावी पीढ़ी का गोत्र गान्धी में तब्दील हो जाये और उसे इसका राजनीतिक लाभ मिल सके।[7]

नेहरू का वंश-वृक्ष[संपादित करें]

 
 
 
 
 
 
मोतीलाल नेहरू
 
स्वरूपरानी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
कमला नेहरू
 
जवाहरलाल नेहरू
 
विजयलक्ष्मी पंडित
 
रणजीत सीताराम पंडित
 
 
कृष्णा हतीसिंह
 
गुणोत्तम हतीसिंह
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
इन्दिरा गांधी
 
फिरोज़ गांधी
 
नयनतारा सहगल
 
हर्ष हतीसिंह
 
अमृता हतीसिंह
 
अजीत हतीसिंह
 
हेलेन आर्मसस्ट्रोंग
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
गीता सहगल
 
 
 
 
 
 
 
रवि हतीसिंह
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
राजीव गांधी
 
सोनिया गांधी
 
 
 
 
 
संजय गांधी
 
मेनका गांधी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
राहुल गांधी
 
प्रियंका वढरा
 
रॉबर्ट वढेरा
 
 
 
वरुण गांधी
 
यामिनी गांधी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
रेहान वाड्रा
 
मिराया वाड्रा
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. नेहरू, जवाहरलाल (1984) (हिन्दी में) मेरी कहानी 2 (6 ed.) नई दिल्ली: सस्ता साहित्य प॰ 9 OCLC 58907011 http://www.worldcat.org/title/meri-kahani/oclc/58907011?referer=di&ht=edition 
  2. नेहरू, जवाहरलाल (1984) (हिन्दी में) मेरी कहानी 2 (6 ed.) नई दिल्ली: सस्ता साहित्य प॰ 10 OCLC 58907011 http://www.worldcat.org/title/meri-kahani/oclc/58907011?referer=di&ht=edition 
  3. अग्रवाल, एम०के० (2012) (अंग्रेजी में) फ्रॉम भारत टू इण्डिया 2 ब्लूमिंग्टन: आई यूनीवर्स प॰ 459 http://books.google.co.in/books?id=X3AvEjZtWxsC&pg=PA459&lpg=PA459&dq=ghiyasuddin+ghazi&source=bl&ots=gacwI9Bhir&sig=qiB9vogslgqKuSGVpi8Ck39o2ps&hl=en&sa=X&ei=a3M5UqHLOomRrQfH7IH4AQ&ved=0CFQQ6AEwBzgU#v=onepage&q=ghiyasuddin%20ghazi&f=false. अभिगमन तिथि: 18 सितम्बर 2013 
  4. नेहरू, जवाहरलाल (1984) (हिन्दी में) मेरी कहानी 2 (6 ed.) नई दिल्ली: सस्ता साहित्य प॰ 18 OCLC 58907011 http://www.worldcat.org/title/meri-kahani/oclc/58907011?referer=di&ht=edition 
  5. क्रान्त, मदनलाल वर्मा (2006) (हिन्दी में) स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास 2 (1 ed.) नई दिल्ली: प्रवीण प्रकाशन प॰ 472 आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7783-120-8 http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 
  6. "The Founder of the Nehru Dynasty [नेहरू वंश के संस्थापक]" (अंग्रेज़ी में). द नवहिन्द टाइम्स. 23 अप्रैल 2011. 
  7. क्रान्त, मदनलाल वर्मा (2006) (हिन्दी में) स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास 3 (1 ed.) नई दिल्ली: प्रवीण प्रकाशन प॰ 818 आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-7783-121-6 http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]