खण्डवा
| खंडवा | |||||||
| — शहर — | |||||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||||
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| राज्य | मध्य प्रदेश | ||||||
| जिला | पूर्वी निमाड़ जिला | ||||||
| महापौर | श्रीमती भावना शाह | ||||||
| जनसंख्या | 171,976 (2001 के अनुसार [update]) | ||||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 313 मीटर (1,027 फी॰) |
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विभिन्न कोड
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| आधिकारिक जालस्थल: www.khandwa.nic.in | |||||||
निर्देशांक: खंडवा भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है। समुद्र तल से 900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को दक्षिण भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। यह जिला नर्मदा और ताप्ती नदी घाटी के मध्य बसा है। 6200 वर्ग किमी. के क्षेत्र में फैले खंडवा की सीमाएं बेतूल, होशंगाबाद, बुरहानपुर, खरगोन और देवस से मिलती हैं। ओमकारेश्वर यहां का लोकप्रिय और पवित्र दर्शनीय स्थल है। इसे भारत के 12 ज्योतिर्लिगों में शुमार किया जाता है। इसके अलावा घंटाघर, दादा धुनीवाले दरबार, हरसुद, सिद्धनाथ मंदिर और वीरखाला रूक यहां के अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं।
अनुक्रम |
[संपादित करें] ऐतिहासिक तथ्य
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार खंडवा शहर का प्राचीन नाम खांडववन था जो मुगलों और अंग्रेजो के आने से बोलचाल में धीरे धीरे खंडवा हो गया . मान्यतानुसार श्रीरामजी के वनवास के समय यहाँ सीता माता को प्यास लगी थी तथा रामजी ने यहाँ तीर मारकर एक कुआ बना दिया और उस कुए को रामेश्वर कुए के नाम से जाना जाता है जो खंडवा के रामेश्वर नगर में नवचंडी माता मंदिर के पास स्थित है अतः खंडवा मान्यता अनुसार हजारों वर्ष पुराना है जिसका आधुनिक रूप वर्तमान खंडवा है 12वीं शताब्दी में यह नगर जैन मत का महत्त्वपूर्ण स्थान था। यह नगर पुरातन नगर है, यहाँ पाये जाने वाले अवशेषों से यह सिद्ध होता है, इसके चारों ओर चार विशाल तालाब, नक़्क़ाशीदार स्तंभ और जैन मंदिरों के छज्जे स्थित हैं।
==आधुनिक नगर==
1864 से यह नगर मध्य प्रदेश के नवगठित निमाड़ ज़िले का मुख्यालय रहा। 1867 में इसे नगरपालिका बना दिया गया। भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित खंडवा एक प्रमुख शहर है। 6200 वर्ग किलोमीटर के विस्तार वाले खंडवा की सीमा बेतूल, होशंगाबाद, बुरहानपुर, खरगोन और देवास से मिली हुई हैं। ओंकारेश्वर यहाँ का बहुत ही लोकप्रिय प्रसिद्ध और पवित्र धार्मिक स्थल है। ओंकारेश्वर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
[संपादित करें] प्रमुख पर्यटन स्थल
[संपादित करें] गौरी कुंज ऑडिटोरियम
यह ऑडिटोरियम संगीत का सांस्कृतिक हॉल है, जो खंडवा रेलवे स्टेशन से 1 किमी. की दूरी पर है। यह ऑडिटोरियम जाने माने गायक किशोर कुमार गांगुली की याद में बनवाया गया था। शहर के प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम यहीं आयोजित किए जाते हैं। देवी नव चंडी धाम और तुरजा भवानी माता मंदिर रेलवे स्टेशन के निकट ही स्थित हैं।
[संपादित करें] नगचुन बांध
नगचुन गांव में बनाह बांध यहां का जाना माना पिकनिक स्थल है। बांध खंडवा से लगभग 7 किमी. दूर है। यह बांध खंडवा की सिचाईं का प्रमुख स्रोत है। इसके चारों ओर की हरियाली बांध को और आकर्षक बना देती है।
[संपादित करें] ओमकारेश्वर का गुरूद्वारा
इस गुरूद्वारे को नानकदेव के ओमकारेश्वर आने के पश्चात् बनवाया गया था। नानकदेव के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए बना यह गुरूद्वारा सिक्ख और हिन्दू धर्म के अनुयायियों से भरा रहता है। ओमकारेश्वर रेलवे स्टेशन यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन है।
[संपादित करें] मनधाता हिल
यह पवित्र पहाड़ी नर्मदा नदी के तट पर स्थित है। यह पहाड़ी धार्मिक दृष्टि से जिले का महत्वपूर्ण स्थल है। देश में 12 शिव ज्योतिर्लिगों में एक यहीं स्थित है। ओमकारेश्वर और अमरेश्वर यहां के प्रमुख मंदिर हैं। पहाड़ी के चारों ओर से बहती हुई नर्मदा नदी इसे ओम के आकार का बनाती है। यह पहाड़ी खंडवा से करीब 75 किमी. दूर है।
[संपादित करें] भगवान संभवनाथ मंदिर
सिद्धवरकूट स्थित भगवान संभवनाथ का यह मंदिर बारा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि जैन धर्म के तीसरे र्तींथकर का यह मंदिर भूमि को खोदकर निकाला गया था। मुख्य मंदिर के अलावा यहां चार अन्य मंदिर भी देखे जा सकते हैं जिसमें भगवान चन्द्रप्रभु, अजीतनाथ, पार्श्वनाथ और संभवनाथ की मूर्तियां स्थापित हैं।
[संपादित करें] घंटाघर
मुंबई-दिल्ली मध्य रेल मार्ग पर स्थित घंटाघर एक पवित्र स्थल है। सूरजकुंड, पद्मकुंड, भीमाकुंड और रामेश्वर यहां के चार पवित्र कुंड हैं। दादा धुनी वाले की समाधि, तुरजा भवानी मंदिर और नव चंडी देवी घाम भी यहां के लोकप्रिय पवित्र स्थल हैं।
[संपादित करें] वीरखाला रूक
ओमकारेश्वर की पहाड़ियों की पूर्वी दिशा में स्थित वीरखाला एक प्राचीन मंदिर है। माना जाता है कि प्राचीन काल से ही यहां शिव के अवतार भैरव को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि दी जाती थी जिसे ब्रिटिश काल में समाप्त किया गया था। पहाड़ी के निकट ही कुंती माता का मंदिर है।
[संपादित करें] काजल रानी गुफा
ओमकारेश्वर से लगभग 9 किमी. दूर यह एक खूबसूरत पिकनिक स्थल है। यहां से आसपास के क्षेत्र का सुंदर नजारा देखा जा सकता हैं। काजल रानी गुफा के निकट ही सतमत्रिका गुफा स्थित है। जुलाई से मार्च की अवधि यहां आने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
[संपादित करें] आवागमन
- वायु मार्ग
इंदौर विमानक्षेत्र खंडवा का निकटतम एयरपोर्ट है, जो यहां से करीब 130 किमी. दूर है। इंदौर देश के अनेक शहरों से नियमित फ्लाइट्स के माध्यम से जुड़ा हुआ है।
- रेल मार्ग
खंडवा रेलवे स्टेशन दिल्ली-मुंबई रूट का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह रेलवे स्टेशन विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से देश के अनेक शहरों से जुड़ा है।
- सड़क मार्ग
खंडवा सड़क मार्ग द्वारा राज्य और पड़ोसी राज्यों से द्वारा जुड़ा है। राज्य के अधिकांश जिलों से यहां के लिए नियमित बसों की व्यवस्था है।
[संपादित करें] जनसंख्या
2001 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 1,71,976, नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आता है।