क्षेत्रफल का द्वितीय आघूर्ण

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क्षेत्रफल का द्वितीय आघूर्ण (second moment of area) किसी क्षेत्र का एक ज्यामितीय गुण है जो यह दर्शाता है कि उस क्षेत्र के बिन्दु किसी अक्ष के सापेक्ष किस प्रकार की स्थिति में हैं। इसे प्रायः I या J से निरूपित करते हैं। इसकी विमा, L4 है।

संरचना इंजीनियरी के क्षेत्र में क्षेत्रफल के द्वितीय आघूर्ण का बहुत उपयोग होता है। किसी धरन (बीम) के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल का द्वितीय आघूर्ण उस धरन की एक महत्वपूर्ण गुण है जो लोड के कारण उस बीम के विक्षेप (deflection) के परिकलन में प्रयुक्त होता है।

परिभाषा[संपादित करें]

क्षेत्रफल का ध्रुवीय आघूर्ण के परिकलन के लिये योजना

किसी क्षेत्रफल का किसी अक्ष BB के सापेक्ष द्वितीय आघूर्ण निम्नवत परिभाषित है-

J_{BB} = \int_A {\rho}^2 \, \mathrm dA

जहाँ

\mathrm dA = अतिसूक्ष्म क्षेत्रफल है
\rho = अक्ष BB से dA की दूरी

उदाहरण के लिए, यदि x-अक्ष के सापेक्ष क्षेत्रफल का द्वितीय आघूर्ण निकालना हो तो, I_{xx} (प्रायः I_x से निरूपित) की गणना कार्तीय निर्देशांक में इस प्रकार की जा सकती है:

I_{x} = \iint_A y^2\, \mathrm dx\, \mathrm dy

इन्हें भी देखें[संपादित करें]