क्याप
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| क्याप | |
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| देश | भारत |
| भाषा | हिंदी |
| विषय | साहित्य |
| प्रकाषन कि तिथी | |
क्याप प्रख्यात हिन्दी लेखक मनोहरश्याम जोशी द्वारा लिखा गया एक उपन्यास है। क्याप कुमाउँनी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है- कुछ अजीब-सा, जो समझा न गया हो या अनबूझा सा; उल्लेखनीय है कि मनोहर श्याम जोशी मूल रूप से कुमायूँ से थे। यह उपन्यास २००६ में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हुआ।
उपन्यास के अन्त में कथा-प्रवाह की विचित्रता देखी जाती है। और शायद इसी कारण स्वयं जोशी इस उपन्यास की अन्तिम पंक्ति के रूप में लिखते हैं-
| “ | आप कहेंगे कि यह कथा तो क्याप-जैसी हुई ! धैर्य-धन्य पाठकों, यही तो रोना है। | ” |