कौशी-आयलर समीकरण

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गणित में, कौशी-आयलर समीकरण (इसे आयलर-कौशी समीकरण और साधरणतया आयलर समीकरण के रूप में भी जाना जाता है।) चर गुणांक सहित रैखिक समघात साधारण अवकल समीकरण है। कभी कभी इसे समविमीय समीकरण के के रूप में भी निर्दिष्ट किया जाता है। इसकी साधारण सरंचना के कारण इस समीकरण को नियत गुणांकों के साथ तुल्य समीकरण से प्रतिस्थापित किया जा सकता है जिसे स्पष्टतया हल किया जा सकता है।

समीकरण[संपादित करें]

माना y(n)(x) अज्ञात फलन y(x) का n वाँ अवकलज है। तब n कोटि की कौशी-आयलर समीकरण निम्न रूप में प्राप्त होती है

x^n y^{(n)}(x) + a_{n-1} x^{n-1} y^{(n-1)}(x) + \cdots + a_0 y(x) = 0.

x = e^u रखने पर उपरोक्त समीकरण नियत गुणांक वाली रैखिक अवकल समीकरण के रूप में प्राप्त होती है। वैकल्पिक रूप से आधार हल के रूप में परीक्षार्थ हल y = x^m ले सकते हैं।[1]

परीक्षण हल के माध्यम से द्वितीय कोटि हल[संपादित करें]

दो वास्तविक मूल अवस्था के लिए द्वितीय कोटि आयलर-कौशी समीकरण प्ररूपी हल के वक्र
द्वि-मूल अवस्था के लिए द्वितीय कोटि आयलर-कौशी समीकरण प्ररूपी हल के वक्र
दो सम्मिश्र मूल अवस्था के लिए द्वितीय कोटि आयलर-कौशी समीकरण प्ररूपी हल के वक्र

सामान्य कौशी-आयलर समीकरण द्वितीय कोटि की समीकरण है, जो भौतिक विज्ञान और अभियांत्रिकी के विभिन्न अनुप्रयोगों में प्रयुक्त होती है, जैसे ध्रुवीय निर्देशांकों में लाप्लास समीकरण को हल करते समय। यह निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है :[1]

x^2\frac{d^2y}{dx^2} + ax\frac{dy}{dx} + by = 0. \,

निम्न हल को उपरोक्त समीकरण का एक हल लेने पर[1]

y = x^m. \,

अवकलन करने पर:

\frac{dy}{dx} = mx^{m-1} \,

और

\frac{d^2y}{dx^2} = m(m-1)x^{m-2}. \,

वास्तविक समीकरण में ये मान रखने पर :

x^2( m(m-1)x^{m-2} ) + ax( mx^{m-1} ) + b( x^m ) = 0 \,

पुनर्विन्यासित करने पर (चूँकि x एक चर राशी है अतः हमेशा शून्य नहीं हो सकता):

m^2 + (a-1)m + b = 0. \,

उपरोक्त समीकरण को m का मान प्राप्त करने के लिए हल करने पर। यहाँ तीन विशेष स्थितियाँ प्राप्त होती हैं :

  • स्थिति #1: दो भिन्न मूल, m1 और m2
  • स्थिति #2: दो वास्तविक समान मूल, m
  • स्थिति #3: सम्मिश्र मूल, α ± βi

स्थिति #1 में, कौशी-आयलर समीकरण का व्यापक हल निम्न होगा :

y = c_1 x^{m_{1}} + c_2 x^{m_2} \,

स्थिति #2 में, व्यापक हल निम्न प्रकार होगा

y = c_1 x^m \ln(x) + c_2 x^m \,

यह हल प्राप्त करने के लिए,एक हल y = xm प्राप्त करने के बाद कोटि न्यूनीकरण विधि का उपयोग किया जाता है।

स्थिति #3 में, व्यापक हल निम्न प्रकार दिया जाता है :

y = c_1 x^\alpha \cos(\beta \ln(x)) + c_2 x^\alpha \sin(\beta \ln(x)) \,
\alpha = Re(m)\,
\beta = Im(m)\,

यहां c_1\, और c_2\, वास्तविक समाकलन नियतांक हैं।

इस तरह के हल आयलर सूत्र की सहायत से x = et रखने पर प्राप्त किया जाता है।

चर परिवर्तन द्वारा द्वितीय कोटि हल[संपादित करें]

x^2\frac{d^2y}{dx^2} + ax\frac{dy}{dx} + by = 0 \,

निम्न चर प्रतिस्थापन का उपयोग करने पर

t = ln(x). \,
y(x) = \phi(ln(x)) = \phi(t). \,

अवकलन करने पर:

\frac{dy}{dx}=\frac{1}{x}\frac{d\phi}{dt}
\frac{d^2y}{dx^2}=\frac{1}{x^2}(\frac{d^2\phi}{dt^2}-\frac{d\phi}{dt}).

ये मान प्रथम समीकरण में रखने पर :\phi(t)

\frac{d^2\phi}{dt^2} + (a-1)\frac{d\phi}{dt} + b\phi = 0. \,

उपरोक्त समीकरण जो \phi(t) में है को इसके अभिलक्षणिक बहुपद के उपयोग से सरलता से हल करने पर

\lambda^2 + (a-1)\lambda +b = 0.

अब, यदि \lambda_1 और \lambda_2 बहुपद के मूल हैं, तब हम निम्न दो स्थितियों में हल करेंगे: भिन्न मूल और द्वि-मूल:

यदि मूल एक दूसरे से भिन्न हैं तो तो व्यापक हल निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है

\phi(t)=c_1 e^{\lambda_1 t} + c_2 e^{\lambda_2 t}, जहां चरघातांकी सम्मिश्र भी हो सकत है।

यदि मूल समान हैं तो व्यापक हल निम्न प्रकार दिया जात है

\phi(t)=c_1 e^{\lambda_1 t} + c_2 t e^{\lambda_1 t}.

इन दोनों स्थितियों में, हल y(x), t=ln(x) रखने पर प्राप्त किया जा सकता है, अतः \phi(ln(x)) = y(x)। इसलिए प्रथम अवस्था में,

y(x)=c_1 x^{\lambda_1} + c_2 x^{\lambda_2}, और द्वितीय अवस्था में,
y(x)=c_1 x^{\lambda_1} + c_2 ln(x) x^{\lambda_1}.

उदाहरण[संपादित करें]

माना

u''+u'-2u=0\,,

साधारण हल xα रखने पर:

x^2(\alpha(\alpha-1)x^{\alpha-2})-3x(\alpha x^{\alpha-1})+3x^\alpha=\alpha(\alpha-1)x^\alpha-3\alpha x^\alpha+3x^\alpha = (\alpha^2-4\alpha+3)x^\alpha = 0\,.

xα एक हल होने के लिए आवश्यक है कि या तो x = 0, जो साधारण हल देता है या xα का गुणांक शून्य है। द्विघात समीकरण को हल करने पर हमें  α = 1, 3 प्राप्त होता है। अतः व्यापक हल निम्न होगा

u=c_1 x+c_2 x^3\,.

अंतर समीकरण सदृश रूप[संपादित करें]

यहां कौशी-आयलर समीकरण के सदृश्य अन्तर समीकरण है। किसी स्थिर m > 0, के लिए एक अनुक्रम ƒm(n) इस प्रकार परिभाषित कारते हैं

f_m(n) := n(n+1)\cdots (n+m-1).

f_m पर अन्तर संकारक लागू करने पर


\begin{align}
Df_m(n) & = f_{m}(n+1) - f_m(n) \\
& = m(n+1)(n+2) \cdots (n+m-1) = \frac{m}{n} f_m(n).
\end{align}

इसे k बार दोहराने पर


\begin{align}
f_m^{(k)}(n) & = \frac{m(m-1)\cdots(m-k+1)}{n(n+1)\cdots(n+k-1)} f_m(n) \\
& = m(m-1)\cdots(m-k+1) \frac{f_m(n)}{f_k(n)},
\end{align}

जहाँ superscript (k) अन्तर संकारक के k बार दोहराव को प्रदर्शित करता है। इसकी तुलना xm के k वें अवकलज से तुलना करने पर

m(m-1)\cdots(m-k+1)\frac{x^m}{x^k}

suggests that we can solve the N-th order difference equation

f_N(n) y^{(N)}(n) + a_{N-1} f_{N-1}(n) y^{(N-1)}(n) + \cdots + a_0 y(n) = 0,

in a similar manner to the differential equation case. Indeed, substituting the trial solution

y(n) = f_m(n) \,

brings us to the same situation as the differential equation case,

m(m-1)\cdots(m-N+1) + a_{N-1} m(m-1) \cdots (m-N+2) + \cdots + a_1 m + a_0 = 0.

One may now proceed as in the differential equation case, since the general solution of an N-th order linear difference equation is also the linear combination of N linearly independent solutions. Applying reduction of order in case of a multiple root m1 will yield expressions involving a discrete version of ln,

\varphi(n) = \sum_{k=1}^n \frac{1}{k - m_1}.

(Compare with: \ln (x - m_1) = \int_{1+m_1}^x \frac{1}{t - m_1} \, dt.)

In cases where fractions become involved, one may use

f_m(n) := \frac{\Gamma(n+m)}{\Gamma(n)}

instead (or simply use it in all cases), which coincides with the definition before for integer m.

ये भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. करेसज़ग, इरविन (10 मई 2006). उन्नत अभियांत्रिकी गणित (Advanced Engineering Mathematics). Wiley. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-470-08484-7. 

संदर्भ-ग्रंथसूची[संपादित करें]