कोरिया (छत्तीसगढ़)

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कोरिया
—  कस्बा  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य छत्तीसगढ़
क्षेत्रफल 5,978 km² (2,308 sq mi)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 23°N 82°E / 23°N 82°E / 23; 82 छत्तीसगढ़ राज्‍य के उत्तर-पश्चिम भाग में स्थित कोरिया 5978 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला है। यहां के झरने और प्राकृतिक सुन्‍दरता पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आर्कषित कर लेती है। पूर्व में यह जिला सरगुजा जिले का एक भाग था। जिसे कोरिया स्‍टेट के नाम से जाना जाता था। 1 नवम्‍बर 2000 को छत्‍तीसगढ़ राज्‍य की स्‍थापना के दौरान यह जिला छत्तीसगढ़ राज्‍य में शामिल किया गया। प्राकृतिक सुन्दरता के साथ-साथ यह जिला प्राकृतिक संसाधनों से भी भरा पड़ा है। कोरिया में उच्च गुणवत्ता वाले कोयला, चूनापत्थर और रेड ऑक्साइड़ जैसे खनिज की अनेक खदानें हैं जोकि इस राज्‍य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।

कोरिया को आदिवासी बहुल इलाका माना जाता है। यहां आदिवासियों की अनेक प्रजाति जैसे कोल, गोंड, भुनियार, राजवर्स, साहू, अहीर और ग्वाला निवास करती है। इनका मुख्य कार्य कृषि है, जिससे यह अपनी आजीविका चलाते हैं। आदिवासी लोग आमतौर पर बड़े हंसमुख और मिलनसार माने जाते हैं। वह अपने यहां आने वाले पर्यटकों का स्वागत बड़ी गर्मजोशी से करते हैं। इन आदिवासियों की संस्कृति बहुत रंग-बिरंगी होती है। पर्यटकों को इनकी संस्कृति और इनके पारंपरिक नृत्य सूगा, कर्मा व सैला बहुत पसंद आते हैं। यहां के आदिवासी गंगा दशहरा,छेरता और नवाखायी जैसे पर्व बड़ी धूमधाम से बनाते है।

प्रमुख आकर्षण[संपादित करें]

अमृत धारा झरना[संपादित करें]

हासदेव नदी पर स्थित अमृतधारा झरना 90 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरती है। इस मनोरम दृश्‍य को पर्यटक अपने कैमरे में कैद करने हेतू बरबस ही यहां खीचें चलें आते है। इस झरने के समीप एक शिव मंदिर है जहां हर साल शिवरात्रि के समय मेला का आयोजन किया जाता है। यह परम्‍परा 1936 ईसवी से ही राजा रामानुज प्रताप सिंह जूदेव के समय से चली आ रही है।

रामदहा झरना[संपादित करें]

चट्टानों के बीच स्थित यह झरना भावरखो गांव में बानस नदी पर बना है। यह लगभग 100-120 फीट ऊंचा और लगभग 20-25 फीट चौड़ा है।

गवर घाट झरना[संपादित करें]

अमृतधारा झरना और रामदहा झरना देखने के बाद पर्यटक गवर घाट झरना देखना नहीं भूलते। हासदेव नदी पर स्थित गवर घाट झरना कोरिया से 40 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। गवरघाट झरना देखने के बाद पर्यटक अगर यहां की गांवों की संस्‍कृतियों से रुबरु होना चाहते है तो वे तर्रा गांव घूमने जा सकते हैं। जोकि गवर घाट झरने से 5 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

अकुरी नाला[संपादित करें]

अकुरी नाला को छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक एयरकंडीशनर कहा जाता है। यह बैकुंठपुर से 65 कि.मी. की दूरी पर बंसीपुर गांव में स्थित है। यहां पर पूरा दिन पानी की ठंड़ी फुहारें उड़ती रहती हैं। इन फुहारों में भीगना पर्यटकों को बहुत पसंद आता है। माना जाता है कि इन फुहारों में भीगने से पर्यटकों की थकान उतर जाती है। अकुरी नाले के आस-पास पर्यटक जंगलों और पहाड़ों के खूबसूरत दृश्य भी देख सकते हैं। गर्मियों में भी अकुरी नाला का वातावरण काफी सुहावना और ठंड़ा होता है।

पर्व-त्‍योहार[संपादित करें]

गंगा दशहरा[संपादित करें]

यह पर्व ज्‍येष्‍ट शुक्‍ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलायें कमल युक्‍त तालाबों में जाती हैं। वहां मेला जैसा वातावरण होता है। कुछ जातियॉ रजवार, चेरवा साहू आदि नवजात शिशु का नाल कटवा कर सुखा टुकडा़(नही) को कमल पौधे के नीचे डालकर सड़ने के‍ लिए रख देती है, एवं विवाह के उपयोग में लाये गये सामाग्री आदि को पानी में सड़ने के लिए डालती है। एवं गीत गाते हुए रास्‍ते में आती जाती है। जहां वे आपस में प्रयाण गाती है। किन्‍तु अब ये गायन प्रथा कमजोर पड़ती जा रही है।

छेरता[संपादित करें]

जिला के ग्रामीण अंचल में रहने वाले जनजातियॉ पौष माह के पूर्णिमा के दिन छेरता पर्व बडे़ धूमधाम से मनाते है। सभी के घरों में नये चावल का चिवड़ा गुड़ तथा तिली के व्‍यंजन बनाकर खाया जाता है। गांव के बच्‍चों की टोलियॉ घर-घर जाकर परम्‍परानुसार प्रचलित बोल छेर छेरता काठी के धान हेर लरिका बोलते हैं और मुठी भर अनाज मांगते हैं रात्रि में ग्रामीण बालाएं टोली बनाकर घर में जाकर लोकड़ी नामक गीत गाती हैं।

नवाखायी[संपादित करें]

कुवांर माह में जब गावों में नई फसल आने लगती है तब ग्रामीण पृष्‍ठभूमि के लोग अपने इष्‍ट देवो की पूजा करते हैं। नृत्‍य करते समय पुरूष तथा नई फसलों के अनाज से विभिन्‍न व्‍यंजन बनाकर प्रसाद चढ़ाते हैं। इसके बाद परिवार के सभी लोग व्‍यंजनो का स्‍वाद लेते हैं। उसी दिन से नये अनाज खाने की शुरूआत करते हैं। इसके पीछे लोगो का कहना है कि हम अपने उत्‍पादन का पहला भोजन अपने इष्‍टों को अर्पित करते हैं।

सरहुल[संपादित करें]

जब सरई वृक्ष में फूल आने लगता है तब इस त्‍योहार को मनाया जाता है। इस त्‍योहार को कुछ ही जनजातियां मनाते है। इसमें भूमि का पूजन किया जाता है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

मुम्बई, भोपाल, नागपुर और खजुराहो से रायपुर हवाई अड्डा सीधी उड़ान से जुडा हुआ है। रायपुर से पर्यटक आसानी से कोरिया तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और अनूपपूर से सीधी बस सेवा द्वारा आसानी से कोरिया तक पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग

कोरिया का नजदीकी रेलवे स्‍टेशन बिलासपुर है।

[श्रेणी:कोरिया जिला]]