कॉकस पर्वत शृंखला

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अंतरिक्ष से कॉकस पर्वतों का दृश्य - बर्फ़-ढके महाकॉकस की शृंखला उत्तर-पश्चिम में कृष्ण सागर से चलकर दक्षिण-पूर्व में कैस्पियन सागर तक पहुँचती साफ़ नज़र आ रही है

कॉकस पर्वत शृंखला यूरोप और एशिया की सीमा पर स्थित, कृष्ण सागर और कैस्पियन सागर के दरमियान के कॉकस क्षेत्र की एक पर्वत शृंखला है, जिसमें यूरोप का सब से ऊंचा पहाड़, एल्ब्रुस पर्वत, भी शामिल है। कॉकस पर्वतों के दो मुख्य भाग हैं - महाकॉकस पर्वत शृंखला और हीनकॉकस पर्वत शृंखला। महाकॉकस पर्वत कृष्ण सागर के उत्तरपूर्वी छोर पर बसे रूस के सोची शहर से शुरू होकर पूर्व के ओर कैस्पियन सागर पर बसी अज़रबैजान की राजधानी बाकू तक पहुँचते हैं। हीनकॉकस इनके दक्षिण में १०० किमी की दूरी पर साथ-साथ चलते हैं। जॉर्जिया की मेसख़ेती पर्वत शृंखला हीनकॉकस का ही एक हिस्सा हैं।

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भूवैज्ञानिक जानकारी[संपादित करें]

महाकॉकस पर्वत शृंखला प्लेट विवर्तनिकी से बनी, जब दक्षिण की ओर से आया अरबी तख़्ता उत्तर में टिके हुए यूरेशियाई तख़्ते से जा टकराया।[1] यह टकराव लाखों सालों से चल रहा है और अभी भी जारी है, जिस वजह से इस क्षेत्र में ज़ोर के भूकंप समय-समय पर होते रहते हैं। हीनकॉकस पर्वतों की कहानी इस से थोड़ी अलग है - इनमें से बहुत से पर्वत ज्वालामुखियों की वजह से बने हैं। जॉर्जिया में एक जावाख़ेती पठार नाम का पठार है जो इन ज्वालामुखियों और उनके युगों पहले उगले हुए लावा जमने से बना है।

इस पूरे इलाक़े में ज़मीन के नीचे बहुत पेट्रोल और गैस जमा है, ख़ासकर इसके कैस्पियन सागर के पास वाले क्षेत्र में।

इन्हें भी देखिये[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Armenia: The Bradt Travel Guide, Nicholas Holding, pp. 3, Bradt Travel Guides, 2011, ISBN 978-1-84162-345-0, ... Armenia is on the line where the Arabian plate, moving at about 2.5cm per annum, is colliding with the larger Eurasian plate and it is consequently very prone to earthquakes. About 25 million years ago the Caucasus Mountains themselves were formed as a consequence of this collision ...