कॉकस पर्वत शृंखला
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कॉकस पर्वत शृंखला यूरोप और एशिया की सीमा पर स्थित, कृष्ण सागर और कैस्पियन सागर के दरमियान के कॉकस क्षेत्र की एक पर्वत शृंखला है, जिसमें यूरोप का सब से ऊंचा पहाड़, एल्ब्रुस पर्वत, भी शामिल है। कॉकस पर्वतों के दो मुख्य भाग हैं - महाकॉकस पर्वत शृंखला और हीनकॉकस पर्वत शृंखला। महाकॉकस पर्वत कृष्ण सागर के उत्तरपूर्वी छोर पर बसे रूस के सोची शहर से शुरू होकर पूर्व के ओर कैस्पियन सागर पर बसी अज़रबैजान की राजधानी बाकू तक पहुँचते हैं। हीनकॉकस इनके दक्षिण में १०० किमी की दूरी पर साथ-साथ चलते हैं। जॉर्जिया की मेसख़ेती पर्वत श्रंखला हीनकॉकस का ही एक हिस्सा हैं।
[संपादित करें] अन्य भाषाओँ में
- रूसी में इसे कवकाज़स्की गोरयि (Кавказские горы) कहा जाता है।
- आर्मीनियाई भाषा में इसे कॉवकस्यान लेरनेर (Կովկասյան լեռներ) कहा जाता है।
- जॉर्जियाई भाषा में इसे (კავკასიონი) कहा जाता है।
- अज़ेरी भाषा में इसे क़फ़क़ज़ दाग़लारी (Qafqaz dağları) कहा जाता है।
[संपादित करें] भूवैज्ञानिक जानकारी
महाकॉकस पर्वत शृंखला प्लेट विवर्तनिकी से बनी, जब दक्षिण की ओर से आया अरबी तख़्ता उत्तर में टिके हुए यूरेशियाई तख़्ते से जा टकराया। यह टकराव लाखों सालों से चल रहा है और अभी भी जारी है, जिस वजह से इस क्षेत्र में ज़ोर के भूकंप समय-समय पर होते रहते हैं। हीनकॉकस पर्वतों की कहानी इस से थोड़ी अलग है - इनमें से बहुत से पर्वत ज्वालामुखियों की वजह से बने हैं। जॉर्जिया में एक जावाख़ेती पठार नाम का पठार है जो इन ज्वालामुखियों और उनके युगों पहले उगले हुए लावा जमने से बना है।
इस पूरे इलाक़े में ज़मीन के नीचे बहुत पेट्रोल और गैस जमा है, ख़ासकर इसके कैस्पियन सागर के पास वाले क्षेत्र में।