कैथी लिपि

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कैथी , जिसे "कयथी" या "कायस्थी", के नाम से भी जाना जाता है एक ऐतिहासिक लिपि है जिसे मध्यकालीन भारत में प्रमुख रूप से उत्तर-पूर्व और उत्तर भारत में काफी बृहत रूप से प्रयोग किया जाता था।, खासकर आज के उत्तर प्रदेश एवं बिहार के क्षेत्रों में। इस लिपि में वैधानिक एवं प्रशासनिक कार्य किये जाने के भी प्रमाण पाये जाते हैं <संदर्भ>अंशुमान पांडे. 2006. Proposal to Encode the Kaithi Script in Plane 1 of ISO/IEC 10646</संदर्भ> इसे भारत सरकार की एक समीति द्वारा यूनिकोड में कूटित किये जाने के बारे में भी विचार किया जा रहा है।

[संपादित करें] उतपत्ति

कैथी शब्द की उतपत्ति कायस्थ शब्द से हुई मानी जाती है जो भारत में मुख्य रूप से व्यापारी वर्ग के रूप में प्रतिष्ठापित थे। इन्हीं के द्वारा मुख्य रूप से व्यापार संबधी ब्यौरा सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले इस लिपी का प्रयोग किया गया था।

[संपादित करें] इतिहास

कैथी एक पुरानी लिपी है एवं इसका पहला प्रयोग सोलहवीं शताब्दी में देखने को मिलता है। मुगल साम्राज्य के दौरान इसका काफी व्यापक प्रयोग होता था। 1880 में ब्रिटिश राज के दौरान भी इसे खगड़िया जिले के न्यायालय में वैधानिक लिपी का दर्ज़ा दिया गया था।

[संपादित करें] संदर्भ

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