कैथल
|
|
इस लेख में सन्दर्भ या सूत्र नहीं दिए गए हैं। कृपया विश्वसनीय सूत्रों के सन्दर्भ जोड़कर इस लेख में सुधार करें। बिना सूत्रों की सामग्री को हटाया जा सकता है। |
| कैथल | |||||||
| — शहर — | |||||||
|
|
|||||||
| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||||
| देश | |||||||
| राज्य | हरियाणा | ||||||
| जिला | कैथल | ||||||
| जनसंख्या | 117,226 (2001 के अनुसार [update]) | ||||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 220 मीटर (722 फी॰) |
||||||
|
विभिन्न कोड
|
|||||||
| आधिकारिक जालस्थल: kaithal.nic.in/ | |||||||
निर्देशांक: कैथल हरियाणा प्रान्त का एक शहर है। यह पुरे हरियाणे मे धान के कटोरे के नाम से जाना जाता है, इसकी सीमा करनाल, कुरुक्षेत्र, जीन्द, और पजाब के पटियाला जिले से मिली हुई है। महाभारत कालीन कैथल हरियाणा का एक ऐतिहासिक शहर है। पुराणों के अनुसार इसकी स्थापना युधिष्ठिर ने की थी। इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान भी माना जाता है। इसीलिए पहले इसे कपिल स्थल के नाम से जाना जाता था। आधुनिक कैथल पहले करनाल जिले का भाग था। लेकिन 1973 ई. में यह कुरूक्षेत्र में चला गया। बाद में हरियाणा सरकार ने इसे कुरूक्षेत्र से अलग कर 1 नवम्बर 1989 ई. को स्वतंत्र जिला घोषित कर दिया। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 65 पर स्थित है।
अनुक्रम |
[संपादित करें] इतिहास
कैथल से कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। पुराणों के अनुसार इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है। इतिहास के अनुसार यह भारत की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान के साम्राज्य का एक भाग था। रजिया सुल्तान के अलावा इस पर सिक्ख शासकों का शासन भी रहा है। कैथल में पर्यटक ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं से जुड़े अवशेष भी देख सकते हैं। इसके अलावा वह यहां पर हनुमान की माता अंजनी का मन्दिर भी देख सकते हैं।
[संपादित करें] कृषि और खनिज
यहाँ कृषि में गेहूँ और चावल की प्रधानता है। अन्य फ़सलों में तिलहन, गन्ना, और कपास शामिल हैं।
[संपादित करें] उद्योग और व्यापार
कैथल के उद्योगों में हथकरघा बुनाई, चीनी और कृषि उपकरणों का निर्माण शामिल है।
[संपादित करें] शिक्षण संस्थान
कैथल में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय हैं। जिनमें हरियाणा कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी ऐंड मैनेजमेंट और आर.के.एस. डी. कॉलेज शामिल हैं।
[संपादित करें] जनसंख्या
2001 की जनगणना के अनुसार इस शहर की जनसंख्या 1,17,226, और इस ज़िले की कुल जनसंख्या 9,45,631 है।
[संपादित करें] प्रमुख आकर्षण
[संपादित करें] रजिया सुल्तान की कब्र
इल्तुतमिश की पुत्री रजिया सुल्तान और दिल्ली की व्रिदोही सेनाओं के बीच यहीं भयंकर युद्ध हुआ था। इस युद्ध में रजिया सुल्तान मारी गई थी। युद्ध के बाद उन्हें यहीं दफना दिया गया। उनकी कब्र बहुत खूबसूरत है और इसके पास एक मस्जिद भी बनी हुई है। बाद में सम्राट अकबर ने उनकी कब्र को दोबारा बनवाया और इसके पास एक किले का निर्माण भी कराया था। पर्यटकों में यह स्थान बहुत लोकप्रिय है। इसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दराज से यहां आते हैं।
[संपादित करें] फेलगू तालाब
कैथल में स्थित फेलगू तालाब बहुत खूबसूरत है। यह तालाब ऋषि फेलगू को समर्पित है। इसके पास पुन्दरी तालाब भी है। यह तालाब महाभारत कालीन है। तालाबों के पास कई खूबसूरत मन्दिर भी हैं जो पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं। इनमें सरस्वती मन्दिर, कपिल मुनि मन्दिर, बाबा नारायण दास मन्दिर प्रमुख हैं। इनके अलावा पर्यटक यहां पर शाह विलायत, शेख शहिबुद्दीन और शाह कमाल की कब्रें भी देख सकते हैं।
[संपादित करें] ईंटों से बने मन्दिर
पौराणिक कथाओं के अनुसार 7वीं शताब्दी में यहां पर राजा शालिवाहन का राज था। उसे श्राप मिला था कि वह रात में मर जाएगा, लेकिन किसी कारणवश वह नहीं मरा और श्राप से भी मुक्त हो गया। तब राजा ने खुश होकर यहां पर पांच मन्दिरों का निर्माण कराया था। अब इन पांच मन्दिरों में से केवल दो मन्दिर बचे हुए हैं। यह मन्दिर बहुत खूबसूरत हैं। इन मन्दिरों को देखने के लिए दूर-दराज से पर्यटक आते हैं। मन्दिरों का वास्तु शास्त्र अजंता-एलोरा की गुफाओं से मेल खाता है क्योंकि इन मन्दिरों के निर्माण में वैसी ही ईटें प्रयोग की गई हैं जैसी अजंता-एलोरा की गुफाओं में हैं।
इनको देखने के बाद पर्यटक बिडकीयर झील की सैर के लिए जा सकते हैं। झील की सैर करना पर्यटकों को बहुत पसंद आता है क्योंकि वह यहां पर शानदार पिकनिक मना सकते हैं। पिकनिक के बाद पर्यटक यहां पर अनेक गुरूद्वारों में भी जा सकते हैं। इन गुरूद्वारों में गुरूद्वारा नीम साहिब, गुरूद्वारा टोपियों वाला और सिटी गुरूद्वारा प्रमुख हैं। यह सभी गुरूद्वारे बहुत खूबसूरत हैं और पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं।
[संपादित करें] आवागमन
- वायु मार्ग
दिल्ली से कैथल जाने के लिए वायुमार्ग भी काफी अच्छा विकल्प है। कैथल के सबसे नजदीक चण्डीगढ़ हवाई अड्डा है।
- रेल मार्ग
रेलमार्ग से कैथल पहुंचने के लिए पर्यटकों को पहले कुरूक्षेत्र आना पड़ता है। कुरूक्षेत्र से कैथल जाने के लिए पर्यटक बसों और टैक्सी का उपयोग कर सकते हैं।
- सड़क मार्ग
दिल्ली से पर्यटक कार, बस और टैक्सी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 1 द्वारा आसानी से कैथल तक पहुंच सकते हैं।
[संपादित करें] संदर्भ
- इस लेख की सामग्री सम्मिलित हुई है ब्रिटैनिका विश्वकोष एकादशवें संस्करण से, एक प्रकाशन, जो कि जन सामान्य हेतु प्रदर्शित है।.
- Official site of the Kaithal District administration : http://kaithal.nic.in/
- http://www.thedelhicity.com/DelhiGuide/Dgu_mem/raziaya_sultans_tomb.htm
- http://kaithal.nic.in/HISTORY.HTM