कैथल

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कैथल
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य हरियाणा
ज़िला कैथल
जनसंख्या 945,631 (2011 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 220 मीटर (722 फी॰)
आधिकारिक जालस्थल: kaithal.nic.in/

Erioll world.svgनिर्देशांक: 29°48′N 76°23′E / 29.8°N 76.38°E / 29.8; 76.38 कैथल हरियाणा प्रान्त का एक शहर है। यह पुरे हरियाणे मे धान के कटोरे के नाम से जाना जाता है, इसकी सीमा करनाल, कुरुक्षेत्र, जीन्द, और पजाब के पटियाला जिले से मिली हुई है। महाभारत कालीन कैथल हरियाणा का एक ऐतिहासिक शहर है। पुराणों के अनुसार इसकी स्थापना युधिष्ठिर ने की थी। इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान भी माना जाता है। इसीलिए पहले इसे कपिस्थल के नाम से जाना जाता था। आधुनिक कैथल पहले करनाल जिले का भाग था। लेकिन 1973 ई. में यह कुरूक्षेत्र में चला गया। बाद में हरियाणा सरकार ने इसे कुरूक्षेत्र से अलग कर 1 नवम्बर 1989 ई. को स्वतंत्र जिला घोषित कर दिया। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 65 पर स्थित है।

इतिहास[संपादित करें]

कैथल से कई ऐतिहासिक और पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। पुराणों के अनुसार इसे वानर राज हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है। इस कारण से इस नगर का प्राचीन नाम कपिस्थल पड़ा, जो कालांतर में कैथल हो गया। वैदिक सभ्यता के समय में कपिस्थल कुरू साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था जैसा कि मानचित्र में देखा जा सकता है।

प्राचीन भारत

इतिहास के अनुसार यह भारत की पहली महिला शासक रजिया सुल्तान के साम्राज्य का एक भाग था। रजिया सुल्तान के अलावा इस पर सिक्ख शासकों का शासन भी रहा है। कैथल में पर्यटक ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं से जुड़े अवशेष भी देख सकते हैं। इसके अलावा वह यहां पर हनुमान की माता अंजनी का मन्दिर भी देख सकते हैं।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

2001 की जनगणना के अनुसार इस शहर की जनसंख्या 1,17,226, और इस ज़िले की कुल जनसंख्या 9,45,631 है।

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

यहाँ कृषि में गेहूँ और चावल की प्रधानता है। अन्य फ़सलों में तिलहन, गन्ना, और कपास शामिल हैं। कैथल के उद्योगों में हथकरघा बुनाई, चीनी और कृषि उपकरणों का निर्माण शामिल है।

शिक्षा[संपादित करें]

कैथल में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय हैं। जिनमें हरियाणा कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी ऐंड मैनेजमेंट और आर.के.एस. डी. कॉलेज शामिल हैं।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

कैथल के सबसे नजदीक चण्डीगढ़ तथा दिल्ली हवाई अड्डा है। चण्डीगढ़ , दिल्ली से पर्यटक कार, बस और टैक्सी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 65राष्ट्रीय राजमार्ग 1 द्वारा आसानी से कैथल तक पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग

रेलमार्ग से कैथल पहुंचने के लिए पर्यटकों को पहले कुरूक्षेत्र (दिल्ली - अंबाला मार्ग) या नरवाना (दिल्ली - जाखल मार्ग) आना पड़ता है। कुरूक्षेत्र से नरवाना रेलमार्ग से कैथल रेलवे स्टेशन तक पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग

दिल्ली से पर्यटक कार, बस और टैक्सी द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 1 द्वारा करनाल तक, तदुपरांत कैथल तक पहुंच सकते हैं। चण्डीगढ़ से राष्ट्रीय राजमार्ग 65 से सीधा कैथल तक पहुंच सकते हैं। पंजाब से संगरुरपटियाला से भी सड़क मार्ग द्वारा कैथल तक आ सकते हैं।

पर्यटन[संपादित करें]

रजिया सुल्तान की कब्र[संपादित करें]

इल्तुतमिश की पुत्री रजिया सुल्तान और दिल्ली की व्रिदोही सेनाओं के बीच यहीं भयंकर युद्ध हुआ था। इस युद्ध में रजिया सुल्तान मारी गई थी। युद्ध के बाद उन्हें यहीं दफना दिया गया। उनकी कब्र बहुत खूबसूरत है और इसके पास एक मस्जिद भी बनी हुई है। बाद में सम्राट अकबर ने उनकी कब्र को दोबारा बनवाया और इसके पास एक किले का निर्माण भी कराया था। पर्यटकों में यह स्थान बहुत लोकप्रिय है। इसे देखने के लिए पर्यटक दूर-दराज से यहां आते हैं।

फेलगू तालाब[संपादित करें]

कैथल में स्थित फेलगू तालाब बहुत खूबसूरत है। यह तालाब ऋषि फेलगू को समर्पित है। इसके पास पुन्दरी तालाब भी है। यह तालाब महाभारत कालीन है। तालाबों के पास कई खूबसूरत मन्दिर भी हैं जो पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं। इनमें सरस्वती मन्दिर, कपिल मुनि मन्दिर, बाबा नारायण दास मन्दिर प्रमुख हैं। इनके अलावा पर्यटक यहां पर शाह विलायत, शेख शहिबुद्दीन और शाह कमाल की कब्रें भी देख सकते हैं।

ईंटों से बने मन्दिर[संपादित करें]

पौराणिक कथाओं के अनुसार 7वीं शताब्दी में यहां पर राजा शालिवाहन का राज था। उसे श्राप मिला था कि वह रात में मर जाएगा, लेकिन किसी कारणवश वह नहीं मरा और श्राप से भी मुक्त हो गया। तब राजा ने खुश होकर यहां पर पांच मन्दिरों का निर्माण कराया था। अब इन पांच मन्दिरों में से केवल दो मन्दिर बचे हुए हैं। यह मन्दिर बहुत खूबसूरत हैं। इन मन्दिरों को देखने के लिए दूर-दराज से पर्यटक आते हैं। मन्दिरों का वास्तु शास्त्र अजंता-एलोरा की गुफाओं से मेल खाता है क्योंकि इन मन्दिरों के निर्माण में वैसी ही ईटें प्रयोग की गई हैं जैसी अजंता-एलोरा की गुफाओं में हैं।

बिदक्यार (वृद्ध केदार) झील[संपादित करें]

इनको देखने के बाद पर्यटक बिदक्यार (वृद्ध केदार) झील की सैर के लिए जा सकते हैं। झील की सैर करना पर्यटकों को बहुत पसंद आता है क्योंकि वह यहां पर शानदार पिकनिक मना सकते हैं। पिकनिक के बाद पर्यटक यहां पर अनेक गुरूद्वारों में भी जा सकते हैं। इन गुरूद्वारों में गुरूद्वारा नीम साहिब, गुरूद्वारा टोपियों वाला और सिटी गुरूद्वारा प्रमुख हैं। यह सभी गुरूद्वारे बहुत खूबसूरत हैं और पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं।

गुरूद्वारा टोपियों वाला[संपादित करें]

शहर के बीच स्थित, सामाजिक सद्भाव के जीवंत उदाहरण, इस गुरूद्वारे में रामायण तथा गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ एक साथ होता है।

संदर्भ[संपादित करें]

टिप्पणी[संपादित करें]