केसरिया
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| केसरिया | |
| — शहर — | |
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |
| देश | |
| राज्य | बिहार |
| ज़िला | चंपारण |
निर्देशांक: केसरिया चंपारण से ३५ किलोमीटर दूर दक्षिण साहेबगंज-चकिया मार्ग पर लाल छपरा चौक के पास अवस्थित है। यह पुरातात्विक महत्व का प्राचीन ऐतिहासिक स्थल है। यहाँ एक वृहद् बौद्धकालीन स्तूप है जिसे केसरिया स्तूप के नाम से जाना जाता है।केसरिया एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल है। यह चंपारण में स्थित एक छोटा सा शहर है जो गंडक नदी के किनारे बसा हुआ है। इसका इतिहास काफी पुराना व समृद्ध है। बौद्ध तीर्थस्थलों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। बुद्ध ने वैशाली से कुशीनगर जाते हुए एक रात केसरिया में बिताई थी तथा लिच्छवियों को अपना भिक्षा-पात्र प्रदान किया था। कहा जाता है कि जब भगवान बुद्ध यहां से जाने लगे तो लिच्छवियों ने उन्हें रोकने का काफी प्रयास किया। लेकिन जब लिच्छवि नहीं माने तो भगवान बुद्ध ने उन्हें रोकने के लिए नदी में कृत्रिम बाढ़ उत्पन्न की। इसके पश्चात् ही भगवान बुद्ध यहां से जा पाने में सफल हो सके थे। सम्राट अशोक ने यहां एक स्तूप का निर्माण करवाया था। इसे विश्व का सबसे बड़ा स्तूप माना जाता है।
| तीर्थ यात्रा बौद्ध धार्मिक स्थल |
| चार मुख्य स्थल |
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| लुम्बिनी · बोध गया सारनाथ · कुशीनगर |
| चार अन्य स्थल |
| श्रावस्ती · राजगीर सनकिस्सा · वैशाली |
| अन्य स्थल |
| पटना · गया कौशाम्बी · मथुरा कपिलवस्तु · देवदहा केसरिया · पावा नालंदा · वाराणसी |
| बाद के स्थल |
| साँची · रत्नागिरी एल्लोरा · अजंता भारहट |
अनुक्रम |
प्रमुख आकर्षण [संपादित करें]
स्तूप [संपादित करें]
भगवान बुद्ध जब महापरिनिर्वाण ग्रहण करने कुशीनगर जा रहे थे तो वह एक दिन के लिए केसरिया में ठहरें थे। जिस स्थान पर पर वह ठहरें थे उसी जगह पर कुछ समय बाद सम्राट अशोक ने स्मरण के रुप में स्तूप का निर्माण करवाया था। इसे विश्व का सबसे बड़ा स्तूप माना जाता है। वर्तमान में यह स्तूप 1400 फीट के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी ऊंचाई 51 फीट है। अलेक्जेंडर कनिंघम के अनुसार मूल स्तूप 70 फीट ऊंचा था।
देवरा [संपादित करें]
यह केसरिया से दो मील दक्षिण में स्थित है। देवरा ही केसरिया के समृद्ध इतिहास का सबसे चमकता सितारा था। वर्तमान में यहां पर ईटों का एक विशाल टीला है। इस जगह का भगवान बुद्ध के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान था।
लिंगम [संपादित करें]
यह लिंगम भगवान केसरनाथ मंदिर में स्थापित है। इस लिंगम को केसरिया की सबसे अमूल्य निधि माना जाता है। यह लिंगम 1969 ई. में एक नहर की खुदाई के दौरान मिला था। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह लिंगम ठीक उसी प्रकार का है जिस प्रकार का जिक्र अग्नि पुराण में मिलता है। इसी कारण स्थानीय लोगों का मानना है कि यह लिंगम बहुत प्राचीन है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को यहां भक्तों की काफी भीड़ होती है।
धक्कान्हा मठ [संपादित करें]
केसरिया प्राचीन काल में सांस्कृतिक दृष्िट से एक महत्वपूर्ण स्थान था। केसरिया की यह सांस्कृतिक समृद्धता धक्कान्हा मठ के माध्यम से प्रतिबिंबित होती है। इस मठ का इतिहास दो सौ वर्ष पुराना है। यह मठ जिला मुख्यालय से 7 किलोमीटर दक्षिण में धक्कान्हा गांव में स्थित है।
गांधी पुस्तकालय [संपादित करें]
यह एक समृद्ध पुस्तकालय है। इस पुस्तकालय में बहुत सी अमूल्य पुस्तके हैं। यहां गांधी जी से संबंधित अनेकों पुस्तके हैं। जैसा कि हम सभी लोग जानते है कि गांधी जी 1917 ई. में नील की खेती के विरोध में सत्याग्रह करने के लिए चंपारण आए थे। उस समय वे केसरिया भी आए थे। उस सत्याग्रह का केसरिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा था।
आवागमन [संपादित करें]
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- वायु मार्ग
यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा वैशाली में है। वैशाली से केसरिया बस और टैक्सी द्वारा पहुंचा जा सकता है।
- रेल मार्ग
केसरिया का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हाजीपुर में है।
- सड़क मार्ग
यह बिहार के सभी शहरो से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
Today there is no flights for vaishali airport. People used to come to patna by flight the capital of Bihar. Today Patna is connected to almost all the airports in India.
== संदर्भ== kesariya ka sabse najdiki railway station Motihari Hai.