कुन्नूर
| कुन्नूर | |||||||
| — town — | |||||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||||
| देश | |||||||
| राज्य | Tamil Nadu | ||||||
| ज़िला | Nilgiris | ||||||
| जनसंख्या | 50,079 (2001 के अनुसार [update]) | ||||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 1,502 मीटर (4,928 फी॰) |
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विभिन्न कोड
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कुन्नूर (तमिल: குன்னூர்) शहर भारत के एक राज्य तमिलनाडु में है और यह नीलगिरि जिले की एक नगरपालिका है. यह अपनी नीलगिरि चाय के उत्पादन के लिए जाना जाता है.
कुन्नूर समुद्र तल से 1,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और नीलगिरि पहाड़ियों में स्थित दूसरा सबसे बड़ा हिल स्टेशन है. नीलगिरी में किये जाने वाले अनेक ट्रैकिंग अभियानों के लिए यह एक आदर्श बेस है.
अनुक्रम |
भूगोल [संपादित करें]
कुन्नूर में स्थित है.[1] इसकी औसत ऊंचाई 1502 मीटर (4927 फीट) है.
जनसांख्यिकी [संपादित करें]
[3] भारत की जनगणना [5], कुन्नूर की आबादी 50,079 है. जनसंख्या में पुरुषों की भागीदारी 49% और महिलाओं की 51% है. कुन्नूर की औसत साक्षरता दर 82% है, जो कि राष्ट्रीय औसत दर 59.5% से अधिक है: पुरुष साक्षरता 86% है और महिला साक्षरता 78% है. कुन्नूर में 9% जनसंख्या 6 साल से कम उम्र के बच्चों की है.
जिला मुख्यालय ऊटी के बाद यह शहर नीलगिरि पहाड़ियों में दूसरा सबसे बड़ा शहर है. कुन्नूर विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के मिश्रण की एक बेहतरीन मिसाल है. शायद इसकी प्रमुख वजह भारतीय सेना की मद्रास रेजिमेंट का रेजिमेंटल मुख्यालय होना है. इसके अलावा यहां पड़ोस की वेलिंग्टन छावनी में रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज डीएसएससी (DSSC), स्थानीय बोर्डिंग स्कूलों के साथ ही यहां की महत्वपूर्ण पर्यटक आबादी भी एक प्रमुख कारण है.
स्थानीय अर्थव्यवस्था [संपादित करें]
कुन्नूर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से गर्मी के महीनों में मौसमी पर्यटकों के आवागमन पर और साल भर चाय उद्योग पर निर्भर करती है.
चाय [संपादित करें]
स्थानीय आबादी लगभग पूरी तरह से चाय के व्यापार पर निर्भर रहती है. निजी चाय बागानों द्वारा पहाड़ियों पर बड़े पैमाने पर की गयी खेती से चारों ओर ताजा हरी चाय की पत्तियां छा गयी हैं, जिन्हें तोड़कर स्थानीय कारखानों में ले जाकर विभिन्न प्रक्रियाओं के बाद पैक करके बिक्री के लिए कुन्नूर, कोयंबटूर और कोचीन के नीलाम घरों में ले जाया जाता है.
पर्यटन [संपादित करें]
कुन्नूर, मेट्टूपलयम (28 किमी) और ऊटी के बीच मीटर गेज रेलवे लाइन पर स्थित है.
पास में मुख्य आकर्षण सिमस् पार्क है, जो अच्छी तरह से व्यवस्थित एक छोटा सा वनस्पति उद्यान है, जहां पौधों की कई किस्में उपलब्ध हैं. यह 12 हेक्टेयर में फैला है.यह ऊटी के दक्षिण में तकरीबन 19 किमी दूर है और सड़क व ट्रेन दोनों रास्तों से यहां पहुँचा जा सकता है.यहां गर्मियों में हर वर्ष "फलों के मेले" का भी आयोजन किया जाता है.
यहां शहर से बाहर निकलने के लिए ट्रैकिंग ट्रेल्स भी हैं.एक लोकप्रिय ट्रैकिंग ट्रेल पर्यटकों को लैम्ब्स रॉक तक ले जाता है जो कुन्नूर से 9 किमी. दूर है. लैम्ब्स रॉक कोयंबटूर के मैदानों के ऊपर से चाय और कॉफी के बागानों का एक शानदार नजारा दिखाता है. लैम्ब्स रॉक से थोड़ा आगे लेडी कैनिंग की सीट है जहां से नीलगिरी का विहंगम दृश्य नजर आता है.
पर्यटक लेडी कैनिंग की सीट से डॉल्फिन सीट तक ट्रैक कर सकते हैं, जो कुन्नूर से 12 किमी. दूर है. पास ही लॉज फॉल्स है जो कुन्नूर से 5 किमी. की दूरी पर है. फॉल्स से दरुग तक ट्रैक करना संभव है जो कुन्नूर से 13 किमी. की दूरी पर स्थित है.दरुग को पक्कासूरन कोट्टई भी कहते हैं. दरुग में 16 वीं सदी के एक किले के ध्वंसावशेषों को देखा जा सकता है. किला 750 मी. की ऊंचाई पर स्थित है.
आकर्षण [संपादित करें]
सिम का पार्क
कुन्नूर में घूमने के लिए सिमस् पार्क एक महत्वपूर्ण जगह है. 12 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले इस उद्यान में पौधों की 1000 से अधिक प्रजातियों का संग्रह है, जिसमें मैग्नोलिया, पाइंस, पेड़ फर्न और कैमेलिया भी शामिल है. वनस्पति उद्यान को आंशिक रूप से जापानी शैली में विकसित किया गया है और इसका नाम 1874 में मद्रास क्लब के सचिव जे. डी. सिम के नाम पर रखा गया है. पार्क का मुख्य आकर्षण मई में आयोजित होने वाली वार्षिक फल और सब्जी प्रदर्शनी है.
पोमोलोजीकल (फलकृषि-विज्ञान) स्टेशन
यह संस्थान तेंदू, अनार और खूबानी के लिए राज्य कृषि विभाग का एक अनुसंधान केन्द्र है.
डॉल्फिन्स नोज व्यूप्वायंट
डॉल्फिन्स नोज व्यूप्वायंट कुन्नूर से 10 किमी. की दूरी पर है. यह केवल नीलगिरी पहाड़ियों के विशाल प्रसार का ही नहीं बल्कि कैथरीन फॉल्स का भी एक विहंगम दृश्य प्रदान करता है.
लैम्ब्स रॉक
डॉल्फिन्स नोज के रस्ते में कुन्नूर से लगभग 5½ किमी की दूरी पर शानदार परिदृश्य तथा चाय और कॉफी के बागानों को देखने का एक और सुविधाजनक स्थान लैम्ब्स रॉक पड़ता है.
दरुग
कुन्नूर से 13 किमी. की दूरी पर स्थित दरुग एक किले के ध्वंसावशेषों के साथ अतीत में ले जाता है, टीपू सुल्तान ने 16वीं शताब्दी में कभी इस किले का प्रयोग किया था.
लॉज फॉल्स
यह राजसी झरना कुन्नूर से 5 किमी. दूर मेट्टूपलयम के रास्ते में पड़ता है.
ऊटी
ऊटी के पहाड़ी स्थल को पहाड़ी स्थलों (हिल स्टेशनों) की रानी के रूप में भी जाना जाता है, यह कुन्नूर के पश्चिमोत्तर में 19 किमी. की दूरी पर स्थित है. ऊटी एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है. कुन्नूर की तरह ऊटी भी नीलगिरी पहाड़ियों की हरियाली में बसा है और यहां कई झीलें, उद्यान और औपनिवेशिक स्थापत्य कला की विशेषता युक्त इमारतें हैं.
कटारी फॉल्स
आकर्षण की मुख्य जगह विद्युत स्टेशन है जो सेल्स के निकट 1000 किलो वाट के आस-पास बिजली की आपूर्ति करता है.
पेस्टर संस्थान:
पर्यटकों को इस संस्थान को देखने के लिए के लिए एक विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है. यह संस्थान सिमस् पार्क के पास स्थित है. यह 1907 में शुरू किया गया था. यह संस्थान रेबीज (कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी) और ट्रिपल वैक्सीन (डीपीटी, डीटी और टीटी) के लिए टीके विकसित करता है.प्रारंभिक दिनों में यह इन्फ्लुएंजा के टीके के अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. अब यह ऊतक संवर्धन रेबीज प्रतिरोधक टीके (TCARV) और डीपीटी समूह के टीकों का उत्पादन करता है.
अन्य उद्योग [संपादित करें]
कुन्नूर में कुछ रेशम-उत्पादन होता है. सरकार सिल्क फार्म को संचालित करती है, हालांकि यह काफी हद तक एक अनुसंधान सुविधा है. हाल ही में, फूलों की खेती और स्ट्राबेरी की खेती ने अपनी जड़ें जमा ली हैं.
शिक्षा [संपादित करें]
स्कूल स्थानीय अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं. लगभग एक सदी के महंगे बोर्डिंग (आवासीय) स्कूल अब नीलगिरी और कुन्नूर की एक विशेषता हैं. जनरल थिम्मैया ने पहले विश्वयुद्ध के बाद के वर्षों में आयरिश भाइयों द्वारा चलाये जाने वाले कान्वेन्ट, सेंट जोसेफ कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की थी. मूलतः ब्रिटिश व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रों के रूप में बनाये गए ये स्कूल अब भारतीय स्कूली शिक्षा प्रणाली (केन्द्रीय या राज्य) पर आधारित विशद किंडरगार्टेन-उच्चतर माध्यमिक (के-12) स्कूल बन गए हैं. इन स्कूलों में से अनेक कैथोलिक मिशनरियों के स्वामित्व वाले और उनके द्वारा संचालित हैं. कुछ कॉलेज निम्नलिखित हैं:
- प्रोविडेंस कॉलेज फॉर वुमेन, बंदिशोला स्प्रिंग फील्ड, कुन्नूर.
- रीगा कॉलेज ऑफ़ होटल मैनेजमैंट, कुन्नूर.
- एम आर एस टेक्नीकल इन्स्टिट्यूट, कुन्नूर.
मशहूर हस्तियां [संपादित करें]
कुन्नूर कई सुप्रसिद्ध हस्तियों का घर रहा है. प्रसिद्ध हेन्नेसी ब्रांड के कर्नल रोचेरोफ्त ने अपना सेवानिवृत्त जीवन एक आलीशान हवेली में व्यतीत किया था जहां से वेलिंगटन दिखाई देता था. कोचीन के महाराजाओं का ग्रीष्मकालीन महल "स्प्रिंग फील्ड" कोटागिरी रोड पर था और विजयानगरम के महाराजाओं का महल भी वहीं था जो "एल्क हिल हाउस" के नाम से परिचित था. विजयनगरम पैलेस टाइगर हिल रोड पर था. कोचीन के महाराज पारुकुट्टी नीथय्यारम्मा की पत्नी भी टाइगर हिल रोड पर होमडेल में रहती थी जैसे उनके बेटे कोचीन स्टेट के सेवानिवृत्त अभियंता वी.के.अराविंदक्षा मेनन राहते थे. सेना के सेवानिवृत्त प्रमुख फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ भी कुन्नूर में रहते थे. जनरल थीमय्या का घर भी कुन्नूर में था. चेत्तीनाद के राजा प्रसिद्ध सिमस् पार्क के पास रहते थे. टाटा के कार्यकारी निदेशक गोपालकृष्णन कुन्नूर के ब्रूकलैंड्स में ग्रीष्मकाल बिताते हैं. बैंकर और लेखक रघु पलात ने अपना बचपन कुन्नूर में बिताया है. "एक अज्ञात हिंदू" नाम से लिखने वाले सफल लेखक एस.आर. नारायण अय्यर कुन्नूर के देवीनिलयम में रहते थे.शिवम अरोड़ा का जन्म स्थान कुन्नूर है.
परिवहन कड़ियां [संपादित करें]
सड़क [संपादित करें]
कुन्नूर सड़क मार्ग द्वारा मेट्टुपलयम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. ऊटी के साथ इसे जोड़ने वाली प्रमुख सड़क है नीलगिरि घाट रोड, जो पूरे जिले को मुख्य मार्गों तक जाने का जरिया भी है. वैकल्पिक रूप से, वहां एक और रास्ता है जो कुन्नूर को बंदिशोला और बेट्टाटी चौकी होते हुए कोटागिरी से जोड़ता है, यह रास्ता राज्य के प्रमुख मार्ग 15 (SH15) से मिलता है जो ऊटी से कोटागिरी की ओर जाती है.
बंगलौर, मैसूर, कोयम्बटूर, कालीकट, कन्याकुमारी, तंजौर, तिरुपति और कोचीन से नियमित बसें भी हैं.
नीलगिरि माउंटेन रेलवे [संपादित करें]
मेट्टुपलयम निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो 46 किमी. दूर है. प्रमुख रेलवे जंक्शन कोयंबटूर (80 किमी) में है.
नीलगिरि माउंटेन रेलवे भारत की सबसे पुरानी पहाड़ी रेलवे में से एक है. नीलगिरि माउंटेन रेलवे को जुलाई, 2005 में यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल (वर्ल्ड हेरिटेज साइट) घोषित किया गया. यह रेलवे लिंक पहाड़ की तलहटी में कुन्नूर को मेट्टुपलयम शहर से जोड़ता है. नीलगिरि पैसेंजर ट्रेन नीलगिरि एक्सप्रेस को कोयंबटूर होकर राज्य की राजधानी चेन्नई तक जाने के लिए सुविधाजनक संपर्क प्रदान करती है. लाइन को ऊटी तक बढ़ाये जाने से पहले तक पहाड़ियों में कुन्नूर एनएमआर का वास्तविक समापन बिंदु था.
मेट्टुपलयम से ऊटी तक पहाड़ी रेलवे के निर्माण का कठिन कार्य उस समय के सामाजिक नेता और बड़गा राव बहादुर बेली गावदर ने अपने हाथ में लिया, जिन्होंने हुब्बाथलाई गांव से इसका स्वागत किया. उन्हें ब्रिटिश राज से "राव बहादुर" और "राव साहिब" के ख़िताब से सम्मानित किया गया. वे नीलगिरि के बेताज बादशाह के रूप में भी जाने जाते थे.
हवा [संपादित करें]
निकटतम हवाई अड्डा सड़क मार्ग से लगभग 80 किमी. दूर कोयम्बटूर में स्थित है (आईएटीए कोड सीजेबी). कोयंबटूर कई राष्ट्रीय स्थलों और साथ ही कोलंबो, सिंगापुर और शारजाह जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों के संयोग स्थल का कार्य करता है.
स्थानीय सरकार [संपादित करें]
कुन्नूर एक तालुका मुख्यालय है, जो छह पंचायत गांवों के लिए जिम्मेदार है.
- बंदिशोला
- बेयरहट्टी
- बुर्लिआर
- हुब्बाथलाई
- मेलुर
- येडापल्ली
कुन्नूर ब्लॉक में निम्नलिखित आठ राजस्व गांव भी शामिल हैं (जिनमें से कुछ का ऊपर उल्लेख हुआ है):
आदिगराट्टी, बुर्लिआर, कुन्नूर टाउन, येडापल्ली, हुब्बाथलाई, हुल्लीकलकेट्टी, मेलुर
राजनीति [संपादित करें]
कूनूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र , एससी (SC) नीलगिरी (लोकसभा संसदीय क्षेत्र)} का हिस्सा है.[2]
गैलरी [संपादित करें]
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Coonoor bazaar.jpg
कुन्नूर बाजार की दौड़ धूप
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Coonoor tea plantation.jpg
दिहाड़ी मजदूर चाय तोड़ रहे हैं
इन्हें भी देंखे [संपादित करें]
- ऊटी
- नीलगिरी (पहाड़)
- नीलगिरी चाय
- अरुवंकडू (Aruvankadu)
- केटी (Ketti)
संदर्भ [संपादित करें]
- ↑ फौलिंग रेन गेनोमिक्स, इंक - कूनूर
- ↑ "List of Parliamentary and Assembly Constituencies" (PDF). Tamil Nadu. Election Commission of India. http://archive.eci.gov.in/se2001/background/S22/TN_ACPC.pdf. अभिगमन तिथि: 2008-10-09.
बाहरी लिंक्स [संपादित करें]
| विकिमीडिया कॉमन्स पर कुन्नूर से सम्बन्धित मीडिया है। |
- कूनूर आधिकारिक इतिहास और पर्यटन के पृष्ठ में www.nilgiris.tn.gov.in.
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