कुज़्नेत्स वक्र

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प्राक्कल्पित कुज़्नेत्स वक्र। वास्तविक वक्रों के लिए संदर्भ[1] देखें।

कुज़्नेत्स वक्र (अंग्रेज़ी: Kuznets curve) साइमन कुज़्नेत्स की उस प्राक्कल्पना की आरेखीय प्रस्तुति है जिसके अनुसार कोई देश जब विकास करता है तो बाजार की ताकतों द्वारा संचालित आर्थिक असमानता का एक प्राकृतिक चक्र उत्पन्न हो जाता है। आरंभिक चरण में असमानता में वृद्धि दिखायी देती है और फिर एक निश्चित औसत आय के बाद यह कम होने लगती है।[2] यह वक्र यह प्रदर्शित करता है कि जब आर्थिक विकास शुरु होता है तो कुछ लोग ही आय वृद्धि से लाभान्वित होते हैं, इसलिए आर्थिक विकास के साथ-साथ आय के वितरण में विषमता कम होने लगती है जिसके कारण यह उल्टे 'यू' (U) आकार का हो जाता है।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Richer-Is-Greener Curve. जॉन टिर्नी द्वारा न्यू यॉर्क टाइम्स में २0 अप्रैल २00९ को लिखा गया लेख।
  2. Kuznets profile at New School for Social Research: "...his discovery of the inverted U-shaped relation between income inequality and economic growth..."
  3. Galbraith, James (7 मई 2007). "Global inequality and global macroeconomics". Journal of Policy Modeling 29 (4): 587–607. http://www.sciencedirect.com.ezproxy.library.ubc.ca/science/article/pii/S0161893807000452. अभिगमन तिथि: २८ अप्रैल २0१३.