किवांच

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किवांच की लता में लगी हुई एक फली

किवांच (Mucuna pruriens) 10-12 फीट लम्बी एकवर्षीय शाकीय लता है। पत्तियाँ त्रिपर्णक व पर्णक अण्डाकार तथा रोमिल छोटे है। पुष्प बैगनी रंग के तथा फली 5-10 से.मी. लम्बी तथा 1.2-1.८ से.मी. चौडी ओर 4-6 बीज युक्त होती है। बीज अण्डाकार तथा सफेद या काले रंग के होते है। किवांच, भारत के समस्त मैदानी क्षेत्रों में जंगली लता के रूप में पाया जाता है। यह हिमालय के निचले क्षेत्रों में जंगलों में पायी जाती है।

वैज्ञानिक नाम : म्यूकुना प्रुरियन्स

कुल : पैपिलियोनेसी

अन्य नाम : इसे काऊ हैज, कौंच, कपिकच्छु आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है।

मुख्य रासायनिक संघटक एवं उपयोग[संपादित करें]

फसल में एल्केलाइड पाये जाते है। जिसके कारण अधिक मात्रा में यह विष है किन्तु कम मात्रा में दवा है। इसका मुख्य प्रयोग दमा एवं सांस के रोगों की दवा निर्माण में होता है। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग बेहोशी, शिशु जन्म तथा आंख की दवायें बनाने में होता है। किंवाच एक उपयोगी फसल है।

इसमें एल-डोपा रसायन पाया जाता है। इसके बीज, पत्ती, जड़, रोम सभी का प्रयोग औषधि में होता है। बीज में 'लेसिविन' ग्लूकोसाइड तथा 0.5 प्रतिशत एल्केलाइड भी पाये जाते हैं। बीज में गहरे भूरे रंग का तेल पाया जाता है। इसका प्रयोग कामोत्तेजक एवं मूत्र रोग तथा दुर्बलता के लिये किया जाता है। फलियॉ सब्जी के रुप में तथा जड़ एवं रोम-पेट के कृमि तथा पित्त रोग दूर करते हैं। यह उत्तम लाभदायक फसल है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]