कार्य बिंदु

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कार्य बिंदु एक इकाई है जिसके जरिए यह मापा जाता है कि कोई सूचना प्रणाली अपने प्रयोक्ता को कितनी व्यावसायिक कार्य की सुविधा देती है। कार्य बिंदुएँ, आईएफ़पीयूजी कार्य आकार मापन विधि की एक मापक इकाई है। आईएफ़पीयूजी की एफ़एसएम विधि आईएसओ स्वीकृत तंत्रांश मापक है जिसके जरिए सूचना प्रणाली के प्रयोक्ता को प्रदत्त सुविधाओं के आधार पर उसके आकार को नापा जाता है। सूचना प्रणाली को लागू करने में प्रयुक्त तकनीक से इस माप पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। आईएफ़पीयूजी एफ़एसएम विधि (आईएसओ/आईईसी २०९२६ तंत्रांश अभियंत्रिकी - कार्य बिंदु गणन विधि पत्र) आईएसओ मानकों द्वारा स्वीकृत तंत्रांश को कार्य के आधार पर मापने के पाँच मानकों में से एक है।

परिचय[संपादित करें]

कार्य बिंदु आईबीएम के एलन अल्ब्रेक्ट द्वारा 1979 में "उपकरणों के प्रति एक नया परिपेक्ष्य"[1] के जरिए परिभाषित किए गए थे। तंत्रांश की कार्यसंबंधी प्रयोक्ता आवश्यकताएँ के बारे में पता लगाया जाता है और फिर हरेक को इन पाँच प्रकारों में बाँटा जाता है - प्रदान, प्रश्न, आदान, आंतरिक फ़ाइलें व बाह्य अंतरापृष्ठ। एक बार कार्य की पहचान कर के उसका प्रकार निर्धारित होने पर उसी जटिलता आँकी जाती है और तदनुसार कुछ कार्य बिंदु प्रदान किए जाते हैं। हर कार्यसंबंधी प्रयोक्ता आवश्यकता किसी प्रयोक्ता के व्यापार संबंदी कार्य से सीधा संबंधित होता है, उदाहरण के लिए प्रदान के लिए सामग्री प्रविष्टि या पूछताछ के लिए प्रयोक्ता द्वारा प्रश्न। यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि इसके जरिए कार्य बिंदुओं में नापे गए कार्यों को सरलता से प्रयोक्ता-केंद्रित आवश्यकताओं के तौर पर समझा जा सकता है, पर इससे आंतरिक कार्यकलापों (जैसे कि कलन विधि) छिप जाते हैं, हालाँकि इनको लागू करने में भी संसाधन तो लगेंगे ही।

बीते कई सालों में इस कथित कमज़ोरी से निपटने के लिए कई तरीके सुझाए गए हैं, लेकिन ऐसी कोई आईएसओ मान्य एफ़एसएम विधि नहीं है जो माप में कलन विधि की जटिलता को तवज्जो देती हो। इस (व अन्य कमज़ोरियों) से निपटने के लिए अल्ब्रेक्ट आधारित आईएफ़पीयूजी विधि से कुछ भिन्न विधियाँ भी हैं:

  • जल्दी व सरल कार्य बिंदु। दो प्रश्नों के जरिए समस्या व सामग्री जटिलता के लिए समायोजन करती है, इससे कुछ व्यक्तिपरक जटिलता नाप मिलती है; सामग्री तत्वों को न नाप के यह माप विधि को थोड़ा सरलीकृत करती है।
  • प्राविधिक कार्य बिंदु। तत्व (चर नाम) व चालक (उ., गणितीय, समानता/असमानता, बूलियन) गिने जाते हैं। इस विधि में गणन विधि पर ज़ोर दिया गया है।[2] इसका अभिप्राय चालक/चालित-आधारित हेल्स्टेड माप जैसा ही है (हेल्स्टेड जटिलता माप देखें)।
  • विस्फोट माप - बारह मूलभूत(सरल) गिनतियों के आधार पर कार्य मापक परिभाषित करता है। यह गिनतियाँ विस्फोट को प्रभावित या प्रदर्शित करती हैं, विस्फोट की परिभाषा है, "निर्माणरत वास्तविक कार्य की प्रयोक्ता की नज़र से माप"। विस्फोट माप के जरिए किसी तंत्रांश इकाई के मूल्य का आँकलन इस आधार पर हो सकता है कि यह कितने कार्य कर पाता है, लेकिन ऐसे किसी अनुप्रयोग का कोई साहित्यिक प्रमाण नहीं है। विस्फोट माप का प्रयोग (पूर्ण या हिस्सों में)पुनः अभियन्ताकरण के समय किया जा सकता है, इसकी चर्चा चालू प्रणालियों में रखरखाव - एक सिंहावलोकन में की गई है।
  • सुविधा बिंदु। अत्यधिक आंतरिक प्रक्रियन वाली प्रणालियों (उ. प्रचालन प्रणालियाँ, संपर्क प्रणालियाँ) को मद्देनज़र रखते हुए कुछ बदलाव जोड़े गए हैं। इसके जरिए ऐसे कार्यों का हिसाब रखा जा सकता है जो प्रणाली चलाने के लिए ज़रूरी हैं पर उनके बारे में प्रयोक्ता सीधे अवगत नहीं होता है।

कार्य बिंदु विश्लेषण[संपादित करें]

किसी सूचना प्रणाली के आकार को नाप के उसे कार्य बिंदुओं में अभिव्यक्त करने की विधि को कार्य बिंदु विश्लेषण(एफ़पीए) कहा जाता है। इस विधि में सुधार लगातार होते रहें इसके लिए वैश्विक सहयोगी एफ़पीए प्रयोक्ता समूह, जैसे कि एनईएसएमए व आईएफ़पीयूजू काम करते रहते हैं। कार्य बिंदु विश्लेशण किसी सूचना प्रणाली के कार्यात्मक आकार को कार्य बिंदुओं की संख्या में अभिव्यक्त करता है (उदाहरण के लिए, इस प्रणाली का आकार ३१४ एफ़पी है)। कार्य बिंदुओं के प्रयोग के कई लाभ हैं[3] और कार्यात्मक आकार का प्रयोग कई प्रकार की परियोजनाओं व संगठन संबंधी निर्णयों के लिए किया जा सकता है जैसे कि:

  • अनुप्रयोग विकास या उन्नतीकरण की लागत के लिए बजट बनाना
  • अनुप्रयोग समूह की वार्षिक रखरखाव के खर्चे के लिए बजट बनाना
  • परियोजना समाप्त होने पर परियोजना की उत्पादकता नापना।
  • लागत का अंदाज़ा लगाने के लिए तंत्रांश आकार

कई संगठन अलग अलग अलग शुद्धता स्तर तक कार्य बिंदुओं को नापते हैं[4], यह इस पर निर्भर है कि तंत्राश का आकार अंततः किस उद्देश्य से नापा जा रहा है।

एफ़पीए का प्रयोग सूचना प्रणाली के परीक्षण प्रयास का पता लगाने के लिए भी किया जा सकता है; इसका सूत्र है परीक्षण मामले = (कार्य बिंदु)१.२[5]

कार्य बिंदुओं के जरिए कार्यत्मक परिपेक्ष्य से प्रणालियों को मापा जाता है। प्रयुक्त तकनीक से इसमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। भाषा, विकास विधि या यंत्रांश जो भी हो, किसी प्रणाली के कार्य बिंदुओं की संख्या नहीं बदलेगी। यदि बदलेगा तो केवल उन कार्य बिंदुओं के निर्माण में लगा प्रयास।

कार्यसंबंधी प्रयोक्ता आवश्यकताएँ दो प्रकार की हैं - सामग्री कार्य व लेन देल कार्य। इन्हें आईएफ़पीयूजी व एनईएसएमए एफ़एसएम विधि ने ५ प्रकारों में विभाजित किया है और इनके आधार पर कार्य बिंदु प्रदान किए जाते हैं।

  1. सामग्री कार्य → आंतरिक तार्किक फ़ाइलें
  2. सामग्री कार्य → बाह्य अंतरापृष्ठ फ़ाइलें
  3. लेनदेन कार्य → बाह्य आदान
  4. लेनदेन कार्य → बाह्य प्रदान
  5. लेनदेन कार्य → बाह्य प्रश्न


सामग्री कार्य → आंतरिक तार्किक फ़ाइलें:
प्रयोक्ता मान्य, तार्किक रूप से संबंधित सामग्री का समूह उदाहरण : कर्मचारी फ़ाइल में संचित कर्मचारी सामग्री (कर्मचारी नाम, कर्मचारी क्रमांक, कर्मचारी जन्मतिथि, प्रवेश तिथि)।

सामग्री कार्य → बाह्य अंतरापृष्ठ फ़ाइलें:
तार्किक रूप से संबंधित सामग्री, केवल संदर्भ के लिए, सामग्री अनुप्रयोग के बाहर रहती है (रखरखाव कोई अन्य अनुप्रयोग करता है)। बाह्य अंतरापृष्ठ फ़ाइल किसी अन्य फ़ाइल के लिए आंतरिक तार्किक फ़ाइल होगी। उदाहरण: किसी कंपनी द्वारा अपनी प्रणाली के बाहर साझा की गई सामग्री।

लेनदेन कार्य → बाह्य आदान:
बाहर से सामग्री प्राप्त कर के आंतरिक तार्किक फ़ाइल में सँजोना। उदाहरण - प्रयोक्ता जोड़ना, कर्मचारी जोड़ना। इस लेन देन में सामग्री का जो मान्यकरण होता है वह बाह्य आदान नहीं है। उदाहरण के लिए डाक पंजीकरण अपने आप में बाह्य आदान नहीं है। इसमें कई लेन देन हैं जैसे कि डाक पते की पुष्टि, डाक पते की उपलब्धता जाँचना और सामग्री जमा करना। केवल अंततः सामग्री जमा करना ही बाह्य आदान है। बाकी सब बाह्य प्रश्न होंगे।

लेनदेन कार्य → बाह्य प्रदान:
इसमें आंतरिक सामग्री बाहर जाती है, और यह सामग्री, गणनोपरांत प्राप्त सामग्री है। उदाहरण: कर गणना, आय गणना

लेनदेन कार्य → बाह्य प्रश्न:
बाह्य सामग्री अंदर आती है पर यह आंतरिक तार्किक फ़ाइलों में संजोई नहीं जाती है। आंतरिक सामग्री बाहर जाती है लेकिन बिना किसी गणना के। उदाहरण: एटीएम में जाँचना कि कितने पैसे हैं, एक प्रश्न के जरिए कर्मचारी की जानकारी प्राप्त करना।

कार्य बिंदुओं की आलोचनाएँ[संपादित करें]

कार्य बिंदुओं व कई अन्य तंत्रांश मापकों की आलोचना हुई है, कि इसे प्रयोग में लाने में लगे खर्च और पेचीदगी के मुकाबले इसके लाभ बहुत कम हैं।[6][7] कार्य बिंदुओं की गणना करने में लगे प्रयास का केवल आंशिक त्रुटि घटाव है, कुछ इस वजह से कि तंत्रांश की लागत के अंदाज़े में भिन्नता का अधिकांश इसके तहत आता ही नहीं है (जैसे कि व्यापार में बदलाव, सीमा में बदलाव, अनियोजित संसाधन सीमितताएँ या प्राथमिकताओं में बदलाव आदि। साथि ही यदि इस माप का प्रयोग करके यह निर्णय लेना हो कि इस तंत्रांश में निवेश किया जाए या नहीं, तो यह तर्क दिया जाता है कि लागत के बजाय तंत्रांश के लाभ को नापना चाहिए। अनुप्रयुक्त सूचना अर्थशास्त्र, जो इन मापों के आर्थिक मूल्यों की गणना करता है, अक्सर प्रयोक्ताओं के मापन का प्रयास अन्य मुद्दों में खर्च करने को प्रेरित करता है।

कुछ तकनीकी आलोचनाएँ यहाँ प्रकाशित हुई हैं - परिवर्तन बिंदुएँ: तंत्रांश उत्पादकता माप का प्रस्ताव, "प्रणाली तंत्रांश दैनिकी, खंड ३१, सितंबर १९९५, वेर्नन वी चैटमैन तृतीय द्वारा"। कार्य बिंदुओं को विकसित करने का एक प्रस्ताव यहाँ छपा था - "क्रॉसटॉक: सुरक्षा तंत्रांश अभियंत्रिकी दैनिकी", फ़रवरी २००१, ली फ़िशमैन द्वारा।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. ए. जे. अल्ब्रेक्ट, “अनुप्रयोग विकास उत्पादकता की माप,” संयुक्त एसएचएआईई, जीयूआईडीई व आईबीएम अनुप्रयोग विकास विचार गोष्ठी, मोंटेरी, कैलिफ़ोर्निया, १४-१७ अक्तूबर, आईबीएम निगम(१९७९), पृ. ८३-९२।
  2. प्राविधिक कार्य बिंदु व मार्गन प्रणाली, Software Technology Support Center, १४ मई, २००८ को प्राप्त
  3. कार्य बिंदुओं के प्रयोग व लाभ - पैम मोरिस संपूर्ण मापन - कार्य बिंदु संसाधन केंद्र
  4. कार्य बिंदु गणन स्तर - पैम मोरिस संपूर्ण माप - कार्य बिंदु संसाधन केंद्र
  5. तंत्राश लागत अनुमान - टी. केपर्स जोंस
  6. डगलस हबर्ड का आईटी मापन विलोमन, सीआईओ पत्रिका, १९९९
  7. डगलस हबर्ड कुछ भी नापें: व्यापार में अगोचरों का मूल्य, जॉन वाइली एंड संस, २००७

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]