कारगिल

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कारगिल
—  जिला  —
कारगिल का सूर्यास्त
कारगिल का सूर्यास्त
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
क्षेत्र कश्मीर
राज्य जम्मू एवं कश्मीर
ज़िला कारगिल
जनसंख्या
घनत्व
10657[1] (2001 के अनुसार )
आधिकारिक भाषा(एँ) कश्मीरी, उर्दु, लद्दाखी[2]
क्षेत्रफल 14,086 km² (5,439 sq mi)
आधिकारिक जालस्थल: kargil.gov.in/

Erioll world.svgनिर्देशांक: 34°27′N 75°46′E / 34.45°N 75.77°E / 34.45; 75.77 कारगिल जम्मू एवं कश्मीर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। वैसे यह स्थान मुख्य से बौद्ध पर्यटन केंद्र के रुप में प्रसिद्ध है। यहां बौद्धों के कई प्रसिद्ध मठ स्थित है। मठों के अतिरिक्त यहां कई अन्य चीजें भी घूमने लायक है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। ट्रैकिंग का शौक रखने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। कारगिल जिला कश्मीर घाटी के उत्तर-पूर्व पर स्थित है। यह स्थान श्रीनगर से 205 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कारगिल 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध से चर्चा में आया था।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

मुलबेख गोम्पा[संपादित करें]

मुलबेख गोम्पा एक मठ है। यह मठ कारगिल जिले के मुलबेख में स्थित है। मुलबेख कारगिल से लगभग 45 किलोमीटर और लेह से 190 किलोमीटर की दूरी पर है। मठ तक पहुंचने के लिए खडी चट्टान और घाटी से होकर गुजरना पड़ता है। यह मठ समुद्र तल से 200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां स्थित भित्तिचित्र, मूर्तियां और स्मृतिचिन्ह इस मठ की शोभा को और अधिक बढ़ाते हैं। मुलबेख गोम्पा से आस-पास की खूबसूरत घाटियों का नजारा देखा जा सकता है।

शरगोल मठ[संपादित करें]

शरगोल मठ कारगिल जिले से दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित मुलबेस में है। इस पुरानी गी-लुग पा बौद्ध मठ में कई बेहतरीन भित्तिचित्र देखे जा सकते हैं। मठ के एक मंदिर है जिसमें अवलिकेतेश्‍वर की ग्यारह हाथों वाली प्रतिमा स्थित है। इसके अलावा लकड़ी से बनी देवी तारा की प्रतिमा है। इस खूबसूरत प्रतिमा को तिब्बितयन कलाकारों ने बनाया था।

स्टोंगदे मठ[संपादित करें]

स्टोंगदे मठ पदुम के समीप स्टोंगदे में स्थित है। स्टोंगदे दूसरा बड़ा मठ है। यह काफी पुराना मठ है। इस मठ की नींव तिब्बतन योगी मारपा ने रखी थी। इस मठ में काफी संख्या में मंदिर बने हुए है। यह मठ पदुम से अठारह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

नुन-कुन गिरीपिण्ड[संपादित करें]

नुन-कुम मासिफ विशाल हिमालय पंक्ति है। यह लद्दाख का सबसे ऊंचा शिखर है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 7,077 मीटर है। कारगिल के दक्षिण से इस जगह की दूरी 70 किलोमीटर है। इस गिरीपिण्ड में दो प्रमुख पर्वत जिसमें पहला नुन (7,357 मीटर) और दूसरा कुन (7,087 मीटर) है। इस पर्वतों पर सुरू घाटी द्वारा पहुंचा जा सकता है।

कनिक स्तूप[संपादित करें]

कनिक स्तूप कारगिल जिले के सनी पर स्थित है। इस स्तूप का सम्बन्ध प्रसिद्ध भारतीय योगी नारूपा से है। ऐसा माना जाता है कि इन संत ने इस स्तूप के भीतर रहकर कुछ समय तक ध्यानसाधना की थी। यहां एक छोटा सा कमरा है जिसमें योगी की कंसे की मूर्ति स्‍थापित है। इस आकृति को वर्ष में केवल एक बार जुलाई माह के अंत में देखा जा सकता है। इस अवसर के दौरान एक त्‍यौहार मनाया जाता है। यह त्‍यौहार दो दिनों तक चलता है। काफी संख्या में लोग इस अवसर पर सम्मिलित होते हैं। इसके अलावा, बरदान मठ के मठवासियों द्वारा नकाब नृत्य प्रस्तुत किया जाता है।

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

सबसे निकटतम हवाईअड्डा लेह है। दिल्ली, चंडीगढ़, श्रीनगर और जम्मू से लेह के लिए नियमित रूप से उड़ानें भरी जाती है।

रेल मार्ग

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है।

सड़क मार्ग

श्रीनगर-लेह मार्ग द्वारा कारगिल पहुंचा जा सकता है। यह मार्ग जून के मध्य से नवम्बर तक खुला रहता है। जम्मू व कश्मीर राज्य परिवहन निगम की सामान्य व डिलक्स बसें नियमित रूप से इस मार्ग पर चलती है।

इसके अलावा श्रीनगर से टैक्सी द्वारा भी कारगिल पहुंचा जा सकता है।

टिप्पणी[संपादित करें]

  1. "View Population". Office of the Registrar General & Census Commissioner, India. http://www.censusindia.gov.in/PopulationFinder/View_Village_Population.aspx?pcaid=594&category=M. अभिगमन तिथि: 27 March 2012. 
  2. "Kashmiri: A language of India". Ethnologue. http://www.ethnologue.com/show_language.asp?code=kas. अभिगमन तिथि: 2008-05-14. 

विस्तृत पठन[संपादित करें]

बाहरी सूत्र[संपादित करें]

साहित्य[संपादित करें]

  • Shireen M. Mazari, The Kargil Conflict, 1999: Separating Fact from Fiction, The Institute of Strategic Studies, Islamabad (2003) ISBN 969-8772-00-6

देखें[संपादित करें]

साँचा:जम्मू कश्मीर