कायस्थ
| कायस्थ Kayastha |
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| 19वीं शताब्दी की पुस्तक Calcutta Kayasth से |
| कुल जनसंख्या |
| खास आवास क्षेत्र |
| भाषाएँ |
| हिन्दी, असमिया, मैथिली, उर्दू, बंगला, मराठी और उड़िया |
| धर्म |
कायस्थ हिन्दुस्तान में रहने वाले सवर्ण हिन्दू चित्रगुप्त वंशी क्षत्रिय है।
अनुक्रम |
[संपादित करें] परिचय
स्वामी विवेकानन्द ने अपनी जाति की व्याख्या कुछ इस प्रकार की है-
- मैं उन महापुरुषों का वंशधर हूँ, जिनके चरण कमलों पर प्रत्येक ब्राह्मण यमाय धर्मराजाय चित्रगुप्ताय वै नमः का उच्चारण करते हुए पुष्पांजलि प्रदान करता है और जिनके वंशज विशुद्ध रूप से क्षत्रिय हैं। यदि अपने पुराणों पर विश्वास हो तो, इन समाज सुधारकों को जान लेना चाहिए कि मेरी जाति ने पुराने जमाने में अन्य सेवाओं के अतिरिक्त कई शताब्दियों तक आधे भारत पर शासन किया था। यदि मेरी जाति की गणना छोड़ दी जाये, तो भारत की वर्तमान सभ्यता का शेष क्या रहेगा? अकेले बंगाल में ही मेरी जाति में सबसे बड़े कवि, इतिहासवेत्ता, दार्शनिक, लेखक और धर्म प्रचारक हुए हैं। मेरी ही जाति ने वर्तमान समय के सबसे बड़े वैज्ञानिक (जगदीश चन्द्र बसु) से भारतवर्ष को विभूषित किया है। स्मरण करो एक समय था जब आधे से अधिक भारत पर कायस्थों का शासन था। कश्मीर में दुर्लभ बर्धन कायस्थ वंश, काबुल और पंजाब में जयपाल कायस्थ वंश, गुजरात में बल्लभी कायस्थ राजवंश, दक्षिण में चालुक्य कायस्थ राजवंश, उत्तर भारत में देवपाल गौड़ कायस्थ राजवंश तथा मध्य भारत में सातवाहन और परिहार कायस्थ राजवंश सत्ता में रहे हैं। अतः हम सब उन राजवंशों की संतानें हैं। हम केवल बाबू बनने के लिये नहीं, अपितु हिन्दुस्तान पर प्रेम, ज्ञान और शौर्य से परिपूर्ण उस हिन्दू संस्कृति की स्थापना के लिये पैदा हुए हैं।
[संपादित करें] श्री चित्रगुप्तजी महाराज का परिवार
पद्म पुराण के अनुसार श्री चित्रगुप्त जी के दो विवाह हुये, पहली पत्नी सूर्यदक्षिणा / नंदिनी जो सूर्य के पुत्र श्राद्धदेव की कन्या थी, इनसे ४ पुत्र हुए । दूसरी पत्नी ऐरावती / शोभावति धर्मशर्मा ( नागवन्शी क्षत्रिय) की कन्या थी, इनसे ८ पुत्र हुए ।
अत: कायस्थ की १२ शाखाएं हैं - श्रीवास्तव, सूर्यध्वज, वाल्मीक, अष्ठाना, माथुर, गौड़, भटनागर, सक्सेना, अम्बष्ठ, निगम, कर्ण, कुलश्रेष्ठ । इन बारह पुत्रों का वृतांत नीचे दिया जा रहा है । जिसका उल्लेख अहिल्या, कामधेनु, धर्मशास्त्र एवं पुराणों में भी दिया गया है । श्री चित्रगुप्तजी महाराज के बारह पुत्रों का विवाह नागराज बासुकी की बारह कन्याओं से सम्पन्न हुआ, जिससे कि कायस्थों की ननिहाल नागवंश मानी जाती है और नागपंचमी के दिन नाग पूजा की जाती है।
माता नंदिनी के चार पुत्र काश्मीर के आस -पास जाकर बसे तथा ऐरावती / शोभावति के आठ पुत्र गौड़ देश के आसपास बिहार, उड़ीसा, तथा बंगाल में जा बसे । बंगाल उस समय गौड़ देश कहलाता था, पदम पुराण में इसका उल्लेख किया गया है ।
[संपादित करें] माता सूर्यदक्षिणा / नंदिनी के पुत्रों का विवरण
1 - भानु ( श्रीवास्तव ) - श्री भानु माता नंदिनी के जेष्ठ पुत्र थे । उनका राशि नाम धर्मध्वज था । श्री भानु मथुरा में जाकर बसे । इसलिये भानु परिवार वाले माथुर कायस्थ कहलाने के साथ - साथ सूर्यवंशी भी कहलाये ।
2 - विभानु ( सूर्यध्वज ) - भटनागर उत्तर भारत में प्रयुक्त होने वाला एक जातिनाम है, जो कि हिन्दुओं की कायस्थ जाति में आते है। इनका प्रादुर्भाव यमराज, मृत्यु के देवता, के पाप पुण्य के अभिलेखक, श्री चित्रगुप्त जी की प्रथम पत्नी दक्षिणा नंदिनी के द्वितीय पुत्र विभानु के वंश से हुआ है। उनकी राशि का नाम श्यामसुंदर था । विभानु को चित्राक्ष नाम से भी जाना जाता है। महाराज चित्रगुप्त ने इन्हें भट्ट देश में मालवा क्षेत्र में भट नदी के पास भेजा था। इन्होंने वहां चित्तौर और चित्रकूट बसाये। ये वहीं बस गये, और इनका वंश भटनागर कहलाया।इनका वास स्थान भारत के वर्तमान पंजाब प्रदेश में भट्ट प्रदेश था। इनकी पत्नी का नाम मालिनी था। उपासना देवी- जयन्ती
3 - विश्वभानु ( बाल्मीकि ) - श्री विश्वभानु माता नंदिनी के तृतिय पुत्र थे । उनका राशि नाम दीनदयाल था । श्री विश्वभानु का परिवार गंगा - यमुना दोआब, जिसको प्राचीन काल में साकब द्वीप कहते थे , में जाकर बसे । इसलिये विश्वभानु परिवार वाले सक्सेना कायस्थ कहलाने के साथ - साथ सूर्यवंशी भी कहलाये ।
3 - वीर्यभानू ( अष्ठाना ) - श्री वीर्यभानू माता नंदिनी के सबसे छोटे पुत्र थे । उनका राशि नाम माधवराव था । श्री वीर्यभानू का परिवार बांस देश (काश्मीर ) , में जाकर बसे । इसलिये वीर्यभानू परिवार वाले श्रीवास्तव कायस्थ कहलाने के साथ - साथ सूर्यवंशी भी कहलाये ।
[संपादित करें] माता ऐरावती / शोभावति के पुत्रों का विवरण
1- चारु (माथुर) - श्री चारु माता ऐरावती / शोभावति के जेष्ठ पुत्र थे । उनका राशि नाम पुरांधर था । श्री चारु का परिवार सूर्यदेश (बिहार) देश , में जाकर बसे और उनके राष्ट्रध्वज का चिन्ह सूर्य होने के कारण सूर्यध्वज कहलाये ।
2- सुचारु ( गौड़ ) - श्री सुचारु माता ऐरावती / शोभावति के द्वितीय पुत्र थे । उनका राशि नाम सारंगधार था । श्री सुचारु का परिवार पश्चिम बंगाल के अम्बष्ठ जनपद, में जाकर बसे इस कारण अम्बष्ठ कहलाये ।
3- चित्र ( चित्राख्य ) ( भटनागर) - श्री चित्र माता ऐरावती / शोभावति के तृतीय पुत्र थे । उनका राशि नाम सारंगधार था । श्री चित्र का परिवार गौड़ देश ( बंगाल ) , में जाकर बसे इस कारण गौड़ कहलाये ।
4- मतिभान ( हस्तीवर्ण ) ( सक्सेना ) - निगम उत्तर भारतीय कायस्थ होते हैं। श्री मतिभान ( हस्तीवर्ण ) माता ऐरावती / शोभावति के चौथे पुत्र थे । उनका राशि नाम रामदयाल था । श्री मतिभान ( हस्तीवर्ण ) का परिवार निगम देश ( काशी ) , में जाकर बसे इस कारण निगम कहलाये।
5- हिमवान ( हिमवर्ण ) अम्बष्ठ - श्री हिमवान ( हिमवर्ण ) माता ऐरावती / शोभावति के पाँचवें पुत्र थे । उनका राशि नाम सारंधार था । श्री हिमवान ( हिमवर्ण ) का परिवार गौड़ देश ( बिहार ) , में प्राचीन करनाली नामक ग्राम में जाकर बसे इस कारण कर्ण कहलाये ।
6- चित्रचारु (निगम) - श्री चित्रचारु माता ऐरावती / शोभावति के छटवें पुत्र थे । उनका राशि नाम सुमंत था । श्री चित्रचारु का परिवार अष्ठाना देश ( छोटा नागपुर ) , जो नागदेश से भी प्रसिद्ध है में जाकर बसे इस कारण अष्ठाना कहलाये ।
7- चित्रचरण ( कर्ण )- श्री चित्रचरण माता ऐरावती / शोभावति के सातवें पुत्र थे । उनका राशि नाम दामोदर था । श्री चित्रचरण का परिवार बंगाल में नदिया जो बंगाल की खाडी के ऊपर स्थित है , में जाकर बसे । सेवा की भावना के कारण अपने कायस्थ कुल में श्रेष्ठ माने गये इस कारण कुलश्रेष्ठ कहलाये ।
8- अतिन्द्रिय ( जितेंद्रय ) ( कुलश्रेष्ठ ) - श्री अतिन्द्रिय ( जितेंद्रय ) माता ऐरावती / शोभावति के सबसे छोटे पुत्र थे । उनका राशि नाम सदानंद था । श्री अतिन्द्रिय ( जितेंद्रय ) का परिवार बाल्मीकि देश ( पुराना मध्य भारत ) , में जाकर बसे इस कारण बाल्मीकि कायस्थ कहलाये । कायस्थों ने क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए कई वर्षों तक हिन्दुस्तान में शासन किया।
[संपादित करें] प्रसिद्ध व्यक्ति
कायस्थों में सुप्रसिद्ध व्यक्तियों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है।
[संपादित करें] आध्यात्मिक
[संपादित करें] राष्ट्रपुरुष
- डा० राजेन्द्र प्रसाद - भारत के पहले राष्ट्रपति.
- नेताजी सुभाषचन्द्र बोस
- लोकनायक जयप्रकाश नारायण
- श्री लालबहादुर शास्त्री
[संपादित करें] राजनीतिक व्यक्ति
- चिन्तामणिराव देशमुख
- ज्योति बसु
- बाल ठाकरे
- यशवन्त सिन्हा
- प्रो.रीता वर्मा
- बीजू पटनायक
- शिव चरण माथुर
- उद्धव ठाकरे
- राज ठाकरे
- रवि शंकर प्रसाद
[संपादित करें] साहित्यकार
- मुंशी प्रेमचन्द
- रामकुमार वर्मा
- महादेवी वर्मा
- वृन्दावन लाल वर्मा
- हरिवंश राय बच्चन
- भगवती चरण वर्मा
- निर्मल वर्मा
- धर्मवीर भारती
- बिमल मित्र
- प्रेमेन्द्र मित्र
- जीवानन्द दास
- बुद्धदेव बोस
- फिराक गोरखपुरी
- नीरद चौधरी
- अमिताभ घोष
- कमलेश्वर
- दया प्रकाश सिन्हा
[संपादित करें] विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र
[संपादित करें] कला
[संपादित करें] चलचित्र, दूरदर्शन व संगीत
- शोभना समर्थ
- अमिताभ बच्चन
- अभिषेक बच्चन
- आदेश श्रीवास्तव
- अनिल विश्वास
- गौतम घोष
- मन्ना डे
- मधुर जाफरी
- मोती लाल
- मुकेश
- नन्दलाल बोस
- नूतन
- राजू श्रीवास्तव
- सलिल चौधरी
- शेखर सुमन
- शम्भू मित्रा
- सोनू निगम
- तनुजा
- उत्पल दत्त
- विपाशा बसु
- शत्रुघन सिन्हा
- चित्रगुप्त
- आनन्द मिलिन्द
- विकास समीर
- shakul saxena
Sunakshi Sinha
[संपादित करें] इतिहासकार
[संपादित करें] खेल जगत
[संपादित करें] स्वतन्त्रता सेनानी
[संपादित करें] पत्रकार
- रूपेश कुमार श्रीवास्तव
- शशांक राज श्रीवास्तव
- तुषार कान्ति घोष
- चन्दन मित्रा
- सागरिका घोष
- राजेश कुमार अलघ
- जगदीश लाल श्रीवास्तव
- किशोर कुमार
- प्रदीप श्रीवास्तव
- ऋतेश श्रीवास्तव बठिंडा, पंजाब
[संपादित करें] प्रशासक
- बसन्त कुमार डे (बंगाल नागपुर रेलवे के पूर्व वाणिज्यिक यातायात प्रबन्धक)
- शरत कुमार घोष (राजस्थान के प्रथम मुख्य न्यायाधीश)
- एस०के०सिन्हा (सेवानिवृत्त ले०जनरल, असम और कश्मीर के पूर्व राज्यपाल)
- श्याम शरण (1970 बैच के आई०एफ०एस०)
- गिरीश चन्द्र सक्सेना (कश्मीर के राज्यपाल)
- अनामि नरायण राय (मुंबई पुलिस के भूतपूर्व कमिश्नर)
- योगेन्द्र नारायण (उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव, भारत सरकार के पूर्व रक्षा सचिव एवं राज्य सभा सचिव)
[संपादित करें] सन्दर्भ
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
- वर्ण
- ब्राह्मण
- वैश्य
- व्यापारी
- शूद्र
- कायस्थ पाठशाला
- चित्रगुप्त (चित्रगुप्तांशी या कायस्थ)