कलिकथा वाया बाईपास
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अलका सराबगी का लिखा यह पहला उपन्यास हिंदी उपन्यास के वर्तमान दौर में एक सुखद बदलाव की लहर की तरह आया. अपने पहले ही उपन्यास पर साहित्य अकादमी पुरस्कार हासिल करने का गौरव तो उन्हें हासिल हुआ ही, साथ ही मिला पाठकों का ढेर सारा प्यार. बाइपास सर्जरी से गुजरता एक बुजुर्ग इंसान अपने अतीत की गलियों की कालयात्रा पर मानों निकलता है और उसके अनुभवों का अनूठा आख्यान इस उपन्यास को अद्भुत पठनीयता देता है.
| कलिकथा वाया बाईपास | |
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| [[चित्र:|150px]] मुखपृष्ठ |
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| देश | भारत |
| भाषा | हिंदी |
| विषय | साहित्य |
| प्रकाषन कि तिथी | |