कलन का मूलभूत प्रमेय

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कलन के मूलभूत प्रमेय के दो भाग हैं। इनको कभी-कभी 'कलन का प्रथम मूलभूत प्रमेय' एवं 'कलन का द्वितीय मूलभूत प्रमेय' कहा जाता हैं।

इस प्रमेय का प्रथम भाग प्रदर्शित करता है कि इनडिफिनिट इंटीग्रेशन को अवकलन द्वरा उलटा जा सकता है।

इस प्रमेय का दूसरा भाग किसी फलन के डिफिनिट इंटीग्रल निकालने के लिये उसके असीमित व्युत्क्रम-अवकलजों (antiderivatives) के उपयोग की छूट देता है।

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