करूर

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करूड़
—  शहर  —
कल्यन पसुपथीस्वर मन्दिर
कल्यन पसुपथीस्वर मन्दिर
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य तमिल नाडु
ज़िला करूर
नगर पालिका अध्यक्ष पी.शिवकाम सुंदरी
जनसंख्या
घनत्व
76,328 (2001 के अनुसार )
• 322 /किमी2 (834 /वर्ग मील)
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
5.96 कि.मी² (2 वर्ग मील)
• 122 मीटर (400 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 10°57′N 78°05′E / 10.95°N 78.08°E / 10.95; 78.08 करूर भारत के तमिलनाडु राज्य का एक शहर है। यह करूर जिले का मुख्यालय है। करूर अमरावती नदी के तट पर बसा हुआ है। संगम काल के दौरान इस जगह को आनपोरूमई के नाम से जाना जाता था। इस जगह पर चोल राजाओं, मदुरै के नायक और अंग्रेजों ने सफलतापूर्वक यहां शासन किया। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने इस स्थान की सृष्टि की थी। करूर नमक्कल के उत्तर, दिन्दीगुल जिले के दक्षिण, तिरूचिरपल्ली जिले के पूर्व और इरोड जिले की दक्षिण सीमा से लगा हुआ है। यह शहर कुटीर उद्योग के लिए भी विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

महालक्ष्मी अम्मन मंदिर[संपादित करें]

यह मंदिर करूर जिले के मेत्तुमहादनपुरम में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 800 वर्ष पहले किया गया था। इस मंदिर को राजा कृष्णदेव राय ने बनवाया था। इस जगह को राजा कृष्णनर्वपुरम के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर देवी लक्ष्मी को समर्पित है। इस मंदिर में आने वाले भक्तगण अपने सिर के ऊपर नारियल फोड़कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। तमिल माह में आदी (जुलाई से अगस्त) के अवसर पर यहां विभिन्न त्यौहार मनाए जाते हैं।

सेल्लंदी अम्मन मंदिर[संपादित करें]

इस मंदिर में लोगों की अधिक अस्था है। यह मंदिर अमरावती नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर देवी लक्ष्मी के लिए जाना जाता है। इस मंदिर को सेल्लंदी अम्मन के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार में भगवान गणेश और भगवान मूरूगन की मूर्ति स्थित है।

वेन्नामलाई सुब्रमण्यम मंदिर[संपादित करें]

वेन्नामलाई सुब्रमण्यम मंदिर

यह मंदिर पर्वत पर स्थित है। वेन्नमलाई सुब्रहमण्यम मंदिर करूर के समीप वेन्नामलाई पर स्थित है। यह मंदिर काफी पुराना है। इस मंदिर में भगवान मूरूगन की प्रतिमा स्‍थापित है। संत अरूणागिरीनाथर इस मंदिर में अपनी मण्डली के साथ मिलकर भजन किया करते थे। इसके अलावा यहां एक अलग काशी विश्वनाथ और विशाकशी का मंदिर भी है। यहां मुख्य रूप से मनाया जाने वाला त्यौहार स्कंद संहति है। यह पर्व तमिल माह में ऐप्पासी, थाईपुसम और आदी कृर्त्तिकई में मनाए जाते हैं।

श्री कमाक्षी अम्मन मंदिर[संपादित करें]

श्री कमाक्षी अम्मन मंदिर काफी खूबसूरत मंदिर है। यह मंदिर करूर जिले में पंचमदेवी में स्थित है। यह काफी पुराना मंदिर है। यह मंदिर अमरावती नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर देवी कमाक्षी अम्मन को समर्पित है। देवी कमाक्षी अम्मन देवी पार्वती का अवतार थी। इस मंदिर में भगवान तापासू कोलम को चित्रित रूप में तपस्या करते हुए देखा जा सकता है। इस मंदिर में ही देवताओं के परिवार कथवार्यन, मसी पेरिसमई, लादा थान्नासी और मरूरी विरन की मूर्तियां देखी जा सकती है। इसके अलावा मंदिर के परिसर में 400 वर्ष पुराना ईलुप्पई वृक्ष भी देखा जा सकता है।

विक्रीटेश्‍वर मंदिर[संपादित करें]

विक्रीटेश्‍वर मंदिर करूर के समीप वेंजम्नगुड्लूर में स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। भगवान शिव के नाम पर ही इस मंदिर का नाम विक्रीटेश्‍वर रखा गया है। यहां देवी विक्रीटम्बिका का भी एक अलग से मंदिर है। र्तीथ मंदिर विक्रीता र्तीथ का मंदिर है। इस मंदिर में सुरक्षित अभिलेख राजा राजकेश्‍वरी के समय के है। वार्षिक पर्व ब्रह्मोत्सव मासी माह (फरवरी-मार्च) में काफी विशाल स्तर पर मनाया जाता है। इस जगह का नाम राजा वेंचन के नाम पर रखा था। राजा वेंचन भगवान शिव के उपासक थे।

शंतिवनम चर्च[संपादित करें]

शंतिवनम चर्च करूर जिले में सेक्कीदंदा आश्रम में स्थित है। इस चर्च का निर्माण परम्परागत दक्षिण भारतीय शैली में किया गया है। इस चर्च के प्रवेश द्वार में गोपुरम है। जिसमें त्रिमूर्ति की परछाई को चित्रित किया गया है।

आवागमन[संपादित करें]

हवाई मार्ग

सबसे नजदीकी एयरपोर्ट तिरुच्चि विमानक्षेत्र है।

रेल मार्ग

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बंगलुरू है। मदूरै, कन्याकुमारी से कश्मीर, मदूरै से कोचीन, थेनजेवर से चेन्नई मार्ग द्वारा करूर शहर पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

मूत्थू कुमारश्‍वरमई बस स्टैंड करूर शहर के केन्द्र में स्थित है। यहां स्थित बसें विभिन्न शहरों जैसे मदूरै, इरोड़, त्रिची, त्रिरूपुरम, सेलम, चेन्नई, कोचीन, ग्वालियर, बंगलुरू और त्रिवेंदरम से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ी हुई है।

संदर्भ[संपादित करें]

बाहरी सूत्र[संपादित करें]

देखें[संपादित करें]