कमला सांकृत्यायन

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चित्र:Kamala Sankrityayan2.JPG
कमला सांकृत्यायन

कमला सांकृत्यायन हिन्दी भाषा की एक प्रसिद्ध उपन्यासकार थीं।

जीवन व कार्य[संपादित करें]

डॉक्टर कमला सांकृत्यायन का जन्म 15 अगस्त 1920 को कालिंपोंग में हआ था। 1949 में हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोष के निर्माण के समय उनकी भेंट पंडित राहुल सांकृत्यायन हई। 1950 में दोनों का विवाह हआ। इसी वर्ष डॉक्टर कमला सांकृत्यायन की पहली लघु कथा ‘नया समाज पत्रिका’ प्रकाशित हई। साथ ही देहरादून से प्रकाशित जाग्रत गोरखा नामक नेपाली रचना पहली बार प्रकाश में आयी।

सम्मान[संपादित करें]

1952 में उन्हें हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग में साहित्य रत्न से सम्मानित किया गया। डॉ सांकृत्यायन 1956 में आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में एमए व 1959 में पीएचडी की। 1964 में उन्हें हिंदी समिति की संपादक चुना गया। 1972 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गैर हिंदी लेखिका के रूप में डॉक्टर कमला सांकृत्यायन की कृति आसाम की लोक कथाएं के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1982 में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से विचार अनि विवेचना कृति के लिए भानु भक्त पुरस्कार दिया गया। राहुल सांकृत्यायन राष्ट्रीय पुरस्कार से विभूषित डॉक्टर कमला को 2000 में देहरादून में भानु पुरस्कार 2008 में वाराणसी के विद्या धर्म प्रचारिणी नेपाली समिति द्वारा मदन स्मारक सम्मान प्रदान किया गया। उनकी अंतिम कृति दिव्यमणि (उपन्यास) का प्रकाशन 2008 में हआ था।

मृत्यु[संपादित करें]

88 वर्षीय डॉक्टर कमला सांकृत्यायन 25 अक्टूबर, 2009 को पंचतत्व में विलीन हो गयीं। भारतीय-नेपाली साहित्य की प्रतिष्ठित समालोचक डॉक्टर कमला सांकृत्यायन का निधन रविवार को सिलीगुड़ी के एक नर्सिग होम में हो गया था। वह दार्जिलिंग के जिलाधिकारी कार्यालय के ऊपर फ़ॉरेन विला में सांकृत्यायन भवन में रहती थीं। डॉक्टर सांकृत्यायन को दार्जिलिंग के हिंदु बौद्ध श्मशान घाट पर अंतिम विदाई दी गयी। अंतिम संस्कार के समय उनके पुत्र जेथा सांकृत्यायन, जयंत सांकृत्यायन व पुत्री जया सांकृत्यायन के साथ हजारों साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।