कबीर के आलोचक (पुस्तक)

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डॉ. धर्मवीर द्वारा लिखित इस पुस्तक में हिंदी साहित्य में कबीर पर लिखने वाले पूर्ववर्ती आलोचकों के लेखन का विश्लेषणात्मक एवं दलित विमर्श की दृष्टि से अध्ययन किया गया है। इसमें पं। हजारीप्रसाद द्विवेदी के कबीर संबंधी विश्लेषण को ब्राह्मणवादी आलोचक की राजनीति के तौर पर पढ़ा गया है। इसकी भूमिका में डॉ. धर्मवीर लिखते हैं- “ इसमें मैंने कबीर के ब्राह्मणवादी समीक्षकों को समझना चाहा है।……..मूल कबीर से ये सभी बचते हैं। इनकी यह भी कोशिश रही है कि कहीं यह जाहिर न हो जाए कि कबीर दलितों के किसी पुराने धर्म के प्रवर्तक थे। इन सबका उद्देश्य इस सम्भावना पर रोक लगाना है कि हिन्दू धर्म को छोड़कर डडभारत]] के दलितों का कोई नया या अलग डडधर्म]] भी हो सकता है। ”(कबीर के आलोचक- डॉ। धर्मवीर-भूमिका

[संपादित करें] सहायक श्रोत

अस्मिता के नए सवाल और कबीर के आलोचक – राजीव कुमार

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