कच्छ जिला
कच्छ जिला भारत के पश्चिम में स्थित गुजरात राज्य का क्षेत्रफल का दृष्टि से सबसे बड़ा जिला है| इसका क्षेत्रफल - 45,612 वर्ग कि.मी. है| ऐसा माना जाता है कि कच्छ नाम , जिले के कछुएं जैसी आकृति के कारण पड़ा है | प्राचीन महानगर धोलावीरा , जहां पुरातन सिन्धु संस्कृति विकसित हुई थी , कच्छ जिलें में स्थित है | कच्छ में प्रायः कच्छी बोली व गुजराती भाषा का प्रयोग होता है |
[संपादित करें] भूगोल
कच्छ कि उत्तर दिशा में पडोसी देश पाकिस्तान , पश्चिम में अरब सागर तथा दक्षिण में कच्छ क़ी खाड़ी स्थित है , जों कच्छ को काठीयावाड़ से अलग करता है | कच्छ के उत्तर तथा पूर्व में कच्छ का रण ( रेगिस्तान ) स्थित है | कच्छ कि पूर्व दिशा में रण के विस्तार के पश्चात बनासकांठा जिला स्थित है |
[संपादित करें] तहसीलें
१. अबडास-नलिया
२. अंजार
३. गांधीधाम
४. नखत्राणा
५. भचाऊ
६. मांडवी
७.मुंद्रा
८. भूज
९. रापर
१०. लखपत
[संपादित करें] इतिहास
मिलें अवशेषों के आधार पर कच्छ प्राचीन सिन्धु संस्कृति का हिस्सा माना जाता है | सन १२७० में कच्छ एक स्वतंत्र प्रदेश था | सन १८१५ में यह ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हुआ | रजवाड़े के रूप में कच्छ के तत्कालीन महाराजा ने ब्रिटिश सत्ता स्वीकार कर ली | सन १९४७ में भारत की स्वतंत्रता के बाद कच्छ तत्कालीन ' महागुजरात ' राज्य का जिला बना | सन १९५० में कच्छ भारत का एक राज्य बना | १ नवम्बर सन १९५६ को यह मुंबई राज्य के अंतर्गत आया | सन १९६० में भाषा के आधार पर मुंबई राज्य का महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजन हो गया तथा कच्छ गुजरात का एक हिस्सा बन गया |
सन १९४७ में भारत के विभाजन के पश्चात सिंध और कराची में स्थित बंदरगाह पाकिस्तान के अंतर्गत चला गया | स्वतंत्र भारत की सरकार ने कच्छ के कंडला में नवीन बंदरगाह विकसित करने का निर्णय लिया | कंडला बंदरगाह पश्चिम भारत का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह है |
इतिहास में १६ जून सन १८१५ का दिन कच्छ के पहले भूकंप के रूप में दर्ज है | २६ जनवरी २००१ में आया प्रचंड भूकंप का केंद्र कच्छ जिले के अंजार में था | कच्छ के १८५ वर्ष के दर्ज भूस्तरीयशास्त्र के इतिहास में यह सबसे बड़ा भूकंप था |
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