ओडेसी

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ओडेसी का प्राचीन ज़ूनानी निदर्श चित्र

ओडेसी (प्राच. यून. Ὀδυσσεία Odusseia) — इलियाड के बाद द्वितीय महा काव्य है, जिसके रचयिता प्राचीन यूनानी कवि होमर को माना जाता है।

ओडेसी ई.पू. आठवीं शताब्दी में लिखी गयी है। यह कहाँ लिखी गई इस संबंध में माना जाता है कि यह इस समय के यूनान अधिकृत में सागर तट आयोनिया में लिखी गई जो अब टर्की का भाग है।[१] इसमें ओडेस या उलीस नाम के एक पौराणिक नायक के ट्रॉय के युद्ध के बाद मातृभूमि वापस लौटते समय घटने वाले साहसपूर्ण कार्यों की गाथा कही गयी है। जिस प्रकार हिंदू रामायण में लंका विजय की कहानी पढ़कर आनंदित होते हैं। उसी प्रकार ओडिसी में यूनान वीर यूलीसिस की कथा का वर्णन आनंदमय है। ट्राय का राजकुमार स्पार्टा की रानी हेलेन का अपहरण कर ट्राय नगर ले गया। इस अपमान का बदला लेने के लिए यूनान के सभी राजाओं और वीरों ने मिलकर ट्राय पर आक्रमण किया। पर न नगर का फाटक टूटा और न प्राचीर ही लॉंघी जा सकी। अंत में यूनानी सेना ने एक चाल चली। एक लकड़ी का खोखला घोड़ा पहिएयुक्‍त पटले पर जड़ा गया। उसे छोड़ वे अपने जहाजों से वापस लौट गए। ट्रॉय के लोगों ने सोचा कि यूनानी अपने देवता की मूर्ति छोड़कर निराश हो चले गए। वे उसे खींचकर नगर में लाए तो मुख्‍यद्वार के मेहराब को कुछ काटना पड़ा। रात्रि को जब ट्रॉय खुशियॉँ मना रहा था, खोखली अश्‍व मूर्ति से यूनानी सैनिकों ने निकलकर चुपचाप ट्रॉय का फाटक खोल दिया। ग्रीक सेना, जो वापस नहीं गई थी बल्कि पास में जाकर छिप गई थी, ट्रॉय में घुस गई।[२] एक हेलेन के पीछे ट्रॉय नष्‍ट हो गया ठीक वैसे ही जैसे सीता के पीछे रावण की स्‍वर्णमयी लंका नष्‍ट हुई थी। इसी से अंग्रेजी में ‘द ट्रॉजन हॉर्स’ का मुहावरा बना। ‘ओडेसी’ मनीषी ग्रीक कप्‍तान ओडेसस की साहसिक वापसी यात्रा की गाथा है। ट्राय से लौटते समय उनका जहाज तूफान में फस गया। वह बहुत दिनों तक इधर उधर भटकता रहा। इसके बाद अपने देश लौटा।

ओडेसी नामक महाकाव्य में ओडेस नामक योद्धा अपने साहसिक कार्यों को लोक कथा के तत्वों से रंजित कर अलकिनोय महाराजा द्वारा आयोजित प्रीतिभोज के अवसर पर सुनाता है।

संदर्भ

  1. Rieu, D.C.H. (२००३)। 'The Odyssey'। पेंगुइन।
  2. अन्य देशों में मानवाधिकार और स्वत्व (एचटीएमएल)। मेरी कलम। अभिगमन तिथि: २२ अप्रैल, २००९