एल डोराडो

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एल डोराडो (अंग्रेज़ी: El Dorado, या स्पैनिश मे "सोने का") एक मुइस्का जाती के मुखिया का नाम है जों उनके रिवाजों के अनुसार स्वयं को सोने की धुल से भिगो लेता था और बाद मे तालाब मे दुबकी लगा लेता था।

आगे चलकर यह मृथक "सोने का शहर" का नाम बन गया जिसने स्पेनी कोंक्विस्टाडोरों के काल से कई खोजकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। हालांकि कई लोगों ने इसे कई वर्षों तक इस सोने के शहर को खोजने की कोशिश की है परन्तु आजतक इसके होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

एक जगह की कल्पना से बढ़कर एल डोराडो एक शासन, एक राज व अपने सुनहरे रजा का एक पूरा शहर बन गया है। इस शहर की खोज मे फ़्रांसिस्को ऑरेलाना और गोंज़ालो पिज़ारो ने १५४१ मे क्विटो से एक मशहूर परन्तु दुखदाई सफर की शुरुआत अमेज़न की खाड़ी की ओर से की जिसके परिणाम स्वरूप ऑरेलेना अमेज़न नदी के मुख तक पहुँचने वाला प्रथम व्यक्ति बन गया।

रीती रिवाज़[संपादित करें]

मुख्य प्रथा जुआन रोड्रिग्ज़ फ्रेल के द्वारा लिखी गई पुस्तक एल कार्नेरो की कथाओं मे पाई जाती है। फ्रेल के अनुसार राजा या मुइस्का के मुख्य पादरी को रिवाज़ों के अनुसार सुनहरी धुल मे लिपटाया जाता था जिसे ग्वाताविता तालाब मे किया जाता, जो वर्तमान मे बोगोटा कोलंबिया के निकट स्थित है।

जल्द ही मुइस्का गावं और उसका खज़ाना कोंक्विस्टाडोरों के हाथों मे आ गया। सारा सोना चुराने के बाद स्पेनियों को यह समझ आया की असल मे ना कोई सोने का शहर है, ना ही कोई खदान है क्योंकि मुइस्का अपना सोना व्यापार के ज़रिए जमा करते थे। पर इसी दौरान उन्हें पकड़े गए इंडियनों से एल डोराडो के बारी मे कहानियां सुनने को मिली।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • बैंडेलियर, ए. एफ. ए. द गिल्डेड मैन, एल डोराडो (न्यू योर्क, १८९३).
  • फर्नांडिज़ डी ओविएदो, गोंज़ालो हिस्तोरिया जनरल ये नैचुरल डी लास इण्डिया, इस्लास ये टिएरा-फार्मे डेल मार ओशियानो, मैन्द्रिड: रियल अकैड्मिया डी ल हिस्टोरिया, १९५१.