एटा

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एटा
—  शहर  —
Map of उत्तर प्रदेश with एटा marked
भारत के मानचित्र पर उत्तर प्रदेश अंकित
Location of एटा
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
जिला एटा
न० पा० अध्यक्ष श्री मती कंचन गुप्ता "अडंगा"
सांसद श्री कल्याण सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश)
जनसंख्या १०७,०९८ (2001 के अनुसार )
आधिकारिक जालस्थल: http://etah.nic.in

Erioll world.svgनिर्देशांक: 27°38′N 78°40′E / 27.63, 78.67

एटा भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक शहर है | यह एटा जिला का मुख्यालय है। यहाँ के प्रमुख स्थलों में पटना पक्षी विहार, कैलाश मंदिर, छ्छैना गाँव की पानी से चलने वाली आटा चक्की आदि हैं | इसे पृथ्वीराज चौहान के सरदार राजा संग्राम सिंह ने बसाया था। इसने एटा में एक सुदृढ़ मिट्टी का दुर्ग बनवाया था जिसके खंडहर आज भी मौजूद हैं।

अनुक्रम

[संपादित करें] भूगोल

एटा भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त के आगरा डिवीजन का एक जिला है। यह उत्तर में बदायूं जिला, दक्षिण में मैनपुरी और फिरोजाबाद, पूर्व में फर्रुखाबाद व पशचिम में अलीगढ़, हाथरस, मथुराआगरा जिलों से घिरा है।

जिले के "उत्तरी अक्षांश" 27o 18' और' 28o 2' और 78o 11' और '79o' 17 पूर्वी देशांतर के बीच समानताएं है।

[संपादित करें] जनसांख्यिकी

[संपादित करें] यातायात

एटा शहर में बस व कार द्वारा ही पहुंचा जा सकता है, हालांकि यहाँ पर रेलवे स्टेशन भी है पर रेल केवल एटा से टूंडला तक ही जाती है वो भी सवारी कम मालगाडी अधिक है, सवारी डिब्बों के नाम पर मात्र दो डिब्बे ही लगे हैं जिनमें केवल डेली वाले यात्री ही यात्रा करते है, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश के आगरा डिवीजन के अन्दर आता है व दिल्ली से कानपुर वाले मार्ग पर जिसे ग्रांट ट्रंक रोड (या N H - 91) या पूर्व नाम शेरशाह सूरी मार्ग भी कहते हैं पर स्थित है इसलिए यहाँ बस के द्वारा आराम से पहुंचा जा सकता है | यह भारत की राजधानी दिल्ली व उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर दोनों से ही सामान दूरी लगभग २०० कि० मी० दूर स्थित है|

[संपादित करें] आदर्श स्थल

1. पटना पछी विहार :

प्रवासी व अप्रवासी पछियों की शरणस्थली बन चुका पटना पछी विहार उत्तर प्रदेश के एटा जिले की जलेसर तहसील में स्थित है | जलेसर - सिकन्दराराऊ राजमार्ग पर एटा से ४७ किमी दूर तथा जलेसर से पांच किमी दूर स्थित इस अभयारण्य को सन 1990 में एक संपूर्ण अभयारण्य घोषित किया गया था | यहाँ का औसत तापमान गर्मियों में 47 डिग्री सेल्सियस व सर्दियों में ४ डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है | पटना पछी विहार बहुत पुराने खजूर के वृक्षों से घिरा एक विशाल जलाशय है जिसकी खुदाई में प्रागैतिहासिक साक्ष्य भी मिले हैं | कहा जाता है कि यह मगध के सम्राट जरासंध के मित्र कालिया का वन था, जहाँ उसका महल था | उसके महल के खंडहर और जमीन के नीचे दबे अवशेष कुछ ऐतिहासिक सत्य की गवाही देते हैं | यहाँ मिले सोने व चांदी के सिक्के द्वापर युग के बताये जाते हैं | करीब १०८ हेक्टेयर क्षेत्र में फैले पटना पक्षी विहार में स्थानीय व प्रवासी पछियों के झुण्ड, खजूर के पेड़ों से आच्छादित वन तथा विशाल झील का प्राकृतिक सौन्दर्य यहाँ के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है | वर्ष १९९१ में वन्य प्राणी विशेषज्ञों के द्वारा की गयी गाड़ना के अनुसार पटना पछी विहार में लगभग १७५ प्रजातियों के प्रख्यात पछी यहाँ प्रवास करते हैं | इनमें से लगभग ६५ प्रजातियाँ के दुर्लभ पछी साईबेरिया, चीन, मंगोलिया तथा अन्य बाहरी देशों से यहाँ आते हैं | शीतकाल (लगभग अक्टूवर नवम्बर के मध्य से) शुरू होते ही यहाँ प्रवासी पछियों का आगमन प्रारंभ हो जाता है | अनुकूल मौसम में यहाँ लगभग ७५ हजार विभिन्न प्रजातियों के पछियों का विशाल झुण्ड एक साथ देखा जा सकता है | यहाँ आने वाले पछियों में सबसे सुन्दर पछी ' कौरमोरेंट ' है | यह काफी हद तक कनकउआ से मिलता - जुलता है | इसे गनहिल नाम से भी जाना जाता है| एक ऐसा पछी भी है जिसे ' आर्टिकटोन ' के नाम से जाना जाता है, जिसकी गति सर्वाधिक तीव्र है | इनमें सबसे अधिक दुस्साहसी पछी ' उर्न ' है | यह हिमालय की बर्फीली चोटियों को लांघता हुआ यहाँ आता है | यहाँ आने वाले मेहमान पछियों में हिमालयन, वीयरदडे, वल्चर, फ्लोवरपैक, फायर विस्टेड फ्लोवर पिकड़, गूज आदि विशेष पछी उल्लेखनीय हैं | धार्मिक दृष्टि से भी इसका चमत्कारिक महत्व है | यहाँ के वन में ३० फुट से भी अधिक गहराई तक लम्बा एक शिवलिंग भी है, जोकि एक मंदिर के अन्दर स्थित है | मान्यता के अनुसार यह शिवलिंग जिसके आलिंगन में पूरा आ जाता है उसकी सभी मुरादें पूरे हो जाती हैं | --Brijesh Chauhan (वार्ता) 15:06, 1 मार्च 2012 (UTC)--Brijesh Chauhan (वार्ता) 15:06, 1 मार्च 2012 (UTC)

2. कैलाश मंदिर, एटा :

मंदिर के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी :

एटा शहर में स्थित इस मंदिर का निर्माण संवत 1924 में राजा दिलसुख राय बहादुर ने करवाया था | मंदिर निर्माण के साथ ही इसके आसपास के पूरे क्षेत्र का नामकरण भी कैलाशगंज हो गया है | धरातल से इस मंदिर की चोटी तक की ऊँचाई करीब 200 फुट है, जबकि शिवजी की चतुर्मुखी मूर्ति धरातल से लगभग सवा सौ फुट की ऊँचाई पर स्थित है | जमीन से लेकर मूर्ती तक का पूरा आधार ठोस है,धरातल से शिवजी की चतुर्मुखी मूर्ति तक के गर्भ स्थल में किसी प्रकार का खोखलापन नहीं है, इस ठोस गर्भ पर ही दीप के आकार में शिवजी के चारों दिशाओं में उभरे मुखों की सफ़ेद पत्थर से निर्मित मूर्ति रखी गयी है, मूर्ति के समीप ही सफ़ेद पत्थर से ही निर्मित नंदी की मूर्ति स्थापित है | इसके अलावा मूर्ति की दो विपरीत दिशाओं उत्तर व दखिण में क्रमश: गणेश व माँ पार्वती की सफ़ेद पत्थर से ही निर्मित आदमकद मूर्तियाँ स्थापित की गयी हैं | मंदिर की छत पर अजन्ता व अलोरा की तरह ही शानदार भित्ति चित्रों को उकेरा गया है, जिन्हें देखते ही श्रद्धालु खो जाते हैं | मंदिर के अन्दर पांच मंजिलों में अर्थात चतुर्मुखी मूर्ति की ऊँचाई तक 16 कमरे हैं | इसके अलावा मंदिर के धरातल के प्रांगण में एक ओर काफी विशाल सरोवर है जिसमें उतरने के लिए सीढ़ियाँ बनाई गयी हैं, सरोवर उपेक्षा के कारण ख़राब हालत में है | मंदिर के एक ओर बाग़ के लिए विशाल स्थान है, जो कि उपेक्षा का शिकार है |

१०८ सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं :

मंदिर में ऊपर चढ़ने के लिए श्रद्धालुओं को 108 सीढियाँ चढ़नी पड़ती हैं, सीढियाँ 70 फुट की ऊंचाई के बाद तीन भागों में विभक्त हो जाती हैं, सबसे बाईं ओर की सीढ़ियाँ मंदिर में ऊपर जाने के लिए व दायीं ओर की सीढ़ियाँ नीचे उतरने के लिए हैं जबकि बीच में विश्राम स्थल बनाया गया है जिनका इस्तेमाल चढ़ते वक्त थक जाने वाले यात्री करते हैं |

शिवरात्रि और सावन में लगता है मेला :

फाल्गुन माह में शिवरात्रि महापर्व और श्रावण मास के दौरान मंदिर में मेले लगते हैं, इन पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, सावन के पूरे माह में पड़ने वाले सोमवार को भक्तों की विशेष भीड़ रहती है | सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि के दौरान भक्तजन कांवरों में गंगाजल भरकर कोसों दूर की लम्बी पदयात्रा करके कैलाश मंदिर में शिवजी का जलाभिषेक कर मनौती मांगते हैं |

मंदिर के बारे में अन्य महत्वपूर्ण बातें :

1. किवदंती के अनुसार कैलाश मंदिर के नीचे एक सुरंग है जो कासगंज तक खुदी थी, सुरंग का द्वार मंदिर के ठीक नीचे है लेकिन सुरंग का द्वार सालों से बंद है जिसके कारण किसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है की सुरंग कहाँ तक जाती है|

2. भारत में कहीं भी नहीं है ऐसी शिवजी की चतुर्मुखी मूर्ती |

3. सवा सौ फुट के ठोस गर्भ स्थल पर स्थित है अदभुत प्रतिमा |

4. पूरे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में नहीं है इतना उंचा शिवजी का मंदिर |

5. धरातल से २०० फुट ऊंचा है कैलाश मंदिर |

3.सोरों या तुलसीदास जन्म स्थान :--Brijesh Chauhan ०६:०५, १७ फ़रवरी २०१० (UTC)

== शिक्षा == saraswati vidhya mander

[संपादित करें] संदर्भ

[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ

वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

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