ऊष्मागतिकी का इतिहास

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सावरी का इंजन - सन १६९८ में थॉमस सावरी द्वारा निर्मित वाणिज्यिक रूप से उपयोगी विश्व का प्रथम वाष्प इंजन

ऊष्मागतिकी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और व्यापक रूप में विज्ञान का ही महत्वपूर्ण और मूलभूत विषय रहा है। ऊष्मागतिकी विज्ञान की वह शाखा है जिसमें यान्त्रिक कार्य तथा ऊष्मा मेँ परस्पर सम्बन्ध का वर्णन किया जाता है, यह प्रमुख रुप से यान्त्रिक कार्य तथा ऊष्मा के परस्पर रुपान्तरण से सम्बन्धित है।

ऊष्मागतिकी के मुख्यतः दो नियम है-

  1. यदि किसी निकाय को H ऊष्मा देते हैं तो दी गयी ऊष्मा का कुछ भाग निकाय की आन्तरिक ऊर्जा मे वृद्धि (ΔI) तथा शेष ऊष्मा निकाय द्वारा कार्य करने मेँ व्यय होती है। H= ΔI+W
  2. ऊष्मा का पूर्ण रुप से यान्त्रिक ऊर्जा में परिवर्तन असम्भव है।

शाखाओं का विकास[संपादित करें]

ऊष्मागतिकी की मुख्य शाखाओं का प्रादुर्भाव लगभग निम्नलिखित समयावली ले अनुसार हुआ-

ऊष्मागतिकी के कुछ विचार दूसरे क्षेत्रों में भी प्रयुक्त हुएहैं-

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]