ऊँट

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ऊँट
एककुबड़ा ऊँट
एककुबड़ा ऊँट
दोकुबड़ी ऊँट
दोकुबड़ी ऊँट
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: जंतु
संघ: कौरडेटा (Chordata)
वर्ग: स्तनधारी (Mammalia)
गण: आर्टियोडैकटिला (Artiodactyla)
कुल: कैमलिडाए (Camelidae)
ट्राइब: कैमलिनाए (Camelini)
प्रजाति: कैमेलस (Camelus)
लीनियस, १७५८
एक और दो कुब्बे वाले ऊँटों का विस्तार कॅमलस बॅक्ट्रिऍनस कॅमलस ड्रॉमडेरिअस †कॅमलस गिगस (जीवाश्म)[1] †कॅमलस हॅसटर्नस (जीवाश्म) †कॅमलस सिवलॅन्सिस (जीवाश्म)[2] †कॅमलस मोरॅलि (जीवाश्म)
एक और दो कुब्बे वाले ऊँटों का विस्तार

कॅमलस बॅक्ट्रिऍनस
कॅमलस ड्रॉमडेरिअस
कॅमलस गिगस (जीवाश्म)[1]
कॅमलस हॅसटर्नस (जीवाश्म)
कॅमलस सिवलॅन्सिस (जीवाश्म)[2]

कॅमलस मोरॅलि (जीवाश्म)

ऊँट कैमुलस जीनस के अंतर्गत आने वाला एक खुरधारी जीव है। अरबी ऊँट के एक कूबड़ जबकि बैकट्रियन ऊँट के दो कूबड़ होते है। अरबी ऊँट पश्चिमी एशिया के सूखे रेगिस्तान क्षेत्रों के जबकि बैकट्रियन ऊँट मध्य और पूर्व एशिया के मूल निवासी हैं। इसे रेगिस्तान का जहाज भी कहते है। यह रेतीले तपते मैदानों में इक्कीस इक्कीस दिन तक बिना पानी पिये चला सकता है। इसका उपयोग सवारी और सामान ढोने के काम आता है।

ऊँट शब्द का प्रयोग मोटे तौर पर ऊँट परिवार के छह ऊँट जैसे प्राणियों का वर्णन करने के लिए किया जाता है, इनमे दो वास्तविक ऊँट और चार दक्षिण अमेरिकी ऊँट जैसे जीव है जो हैं लामा, अलपाका, गुआनाको और विकुना

एक ऊँट की औसत जीवन प्रत्याशा चालीस से पचास वर्ष होती है। एक पूरी तरह से विकसित खड़े वयस्क ऊंट की ऊँचाई कंधे तक 1.85 मी और कूबड़ तक 2.15 मी होती है। कूबड़ शरीर से लगभग तीस इंच उपर तक बढ़ता है। ऊँट की अधिकतम भागने की गति 65 किमी/घंटा के आसपास होती है तथा लम्बी दूरी की यात्रा के दौरान यह अपनी गति 40 किमी/घंटा तक बनाए रख सकता है।

जीवाश्म साक्ष्यों से पता चलता है कि आधुनिक ऊंट के पूर्वजों का विकास उत्तरी अमेरिका में हुआ था जो बाद में एशिया में फैल गये। लगभग 2000 ई.पू. मे पहले पहल मनुष्य ने ऊंटों को पालतू बनाया था। अरबी ऊँट और बैकट्रियन ऊँट दोनों का उपयोग अभी भी दूध, मांस और बोझा ढोने के लिये किया जाता है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Camelus gigas, ZipcodeZoo, BayScience Foundation Inc, Accessed: 7 दिसम्बर 2012
  2. Palæontological Memoirs and Notes of the Late Hugh Falconer: Fauna antiqua sivalensis, Hugh Falconer, R. Hardwicke, Page 231, 1868