उत्प्लावन बल

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किसी द्रव में रखी वस्तु पर लगने वाले बल

किसी तरल (द्रव या गैस) में आंशिक या पूर्ण रूप से डूबी किसी वस्तु पर उपर की ओर लगने वाला बल उत्प्लावन बल कहलाता है।

उत्प्लावन बल नावों, जलयानों, गुब्बारों आदि के कार्य के लिये जिम्मेदार है।


आर्कीमिडीज का सिद्धान्त[संपादित करें]

इस सिद्धान्त का प्रतिपादन सबसे पहले आर्कीमिडीज ने किया जो इटली के सिरैकस का निवासी था। यह सिद्धान्त इस प्रकार है:

यदि कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डूबी है तो उसके भार में कमी होती है। भार में यह कमी, उस वस्तु द्वारा हटाये गये तरल के भार के बराबर होती है।

सूत्र रूप में ,

F_\mathrm{buoyancy} = - \rho V g \,
जहाँ V वस्तु का वह आयतन है जो तरल में डूबा है, या तरल के अन्दर है।
रो = तरल का घनत्व तथा
जी = गुरुत्व जनित त्वरण

इन्हें भी देखें[संपादित करें]


वाह्य सूत्र[संपादित करें]