उत्तरी सागर बाढ़ १९५३

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उत्तरी सागर बाढ़, ३१ जनवरी से १ फरवरी, १९५३ को आया एक विनाशकारी तूफ़ान है जिससे तटीय यूरोपीय देशो जैसे इंग्लैंड, नीदरलैंड, और बेल्जियम में हजारों लोग बाढ़ की चपेट में आकर मारे गए। डेनमार्क और फ्रांस में भी बाढ़ का प्रभाव देखा गया। ज्वार भाटे और तेज़ हवाओं के चलते समुद्र में ५.६ मीटर ऊँची लहरें उठीं जो तटीय देशों के सभी बाढ़ सुरक्षा प्रबंधों को तोड़ती हुई भीतर तक घुस गयी। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार नीदरलैंड में १,८३५ और ब्रिटेन में ३०७ लोग मारे गए। २८ पश्चिमी फ़्लैंडर्स, बेल्जियम में मारे गए थे।

२३० से अधिक की क्षति उत्तरी यूरोपीय तटों के सामानांतर वाटरक्राफ्ट पर हुई और साथ ही उत्तरी सागर के गहरे जल में भी जब फैरी एम वी प्रिंसेस विक्टोरिया बेलफास्ट के पूर्व में स्थित उत्तरी चैनल में डूब गयी जिसमे १३३ लोग मारे गए और बहुत से जालदार जहाज़ भी डूब गए।

नीदरलैंड में उत्तरी सागर बाढ़[संपादित करें]

३१ जनवरी - १ फरवरी १९५३ की रात ये बात पता चली की ज़ीलैंड, ज़ुइड-हौलैंड, और नूर्ड-ब्राबांत के प्रान्तों में कई डाइक्स ज्वारभाटे और एक उत्तर-पश्चिमी तूफान के संयोजन के विरुद्ध लिए प्रतिरोधक नहीं है। दोनों द्वीपों और देश की मुख्य भूमि का एक बड़ा क्षेत्र पर पूरी तरह पानी से भर गया था। कई लोग अभी भी १ फरवरी को मारे गए लोगों को पुण्यस्मरण करते हैं।

चेतावनियाँ[संपादित करें]

आपदा के समय, कोई भी स्थानीय रेडियो स्टेशन रात में प्रसारण नहीं कर रहा था, और बहुत से छोटे मौसम स्टेशन केवल दिन के समय प्रसारण किया करते थे, जिसके फलस्वरूप के. एन. एम. आई. की चेतावनी बाढ़ संभावित क्षेत्रों को नहीं मिल पाई और फलस्वरूप लोग आसन्न बाढ़ के लिए तैयारी करने में असमर्थ रहे। दूरभाष और तार नेटवर्क बाधित थे, घंटों में शौकिया रेडियो संचालक अपने घरों में निर्मित उपकरणों के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुँच गए और एक स्वैच्छिक आपातकालीन रेडियो नेटवर्क बनाया। इन स्वैछिक रेडियो संचालकों ने दस दिनों और रातों तक अथक कार्य किया और बाहरी दुनिया से संपर्क स्थापित करवाने वाले केवल यही लोग थे। इसके अतिरिक्त शनिवार की रात होने के कारण भी आपदा क्षेत्र में कई कार्यालयों में कम कर्मचारी थे।

परिणामी क्षति[संपादित करें]

इस बाढ़ के कारण ज़ीलैंड, ज़ुइड-हौलैंड और नूर्ड-ब्राबांत प्रान्तों के बहुत बड़े क्षेत्र जलमग्न हो गए। नूर्ड-हौलैंड में केवल एक पौल्डर जलमग्न हुआ था। सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र थे शोऊवेन-दुइवलैंड, थोलन, सिंत फिलिप्सलैंड, गोएरी-ओवरफ्लाक्की, होइकशी वार्ड, वूर्न-पुटेन, और अल्ब्लास्सेरवार्ड। सर्वाधिक मौतें शोऊवेन-दुइवलैंड और गोएरी-ओवरफ्लाक्की में दर्ज की गयीं थी। सरकार द्वारा डेल्टा आयोग का गठन किया गया जिसका उद्देश्य बाढ़ के कारणों और प्रभावों के बारे में जानकारी एकत्रित करना था। इसके अनुमानानुसार बाढ़ में १,८३५ लोग मारे गए थे और ७०,००० लोगों की आपातकालीन निकासी हुई थी। बाढ़ ने नीदरलैंड की ९% कृषि भूमि को जलमग्न कर दिया और समुद्री पानी ने देश की १,३६५ वर्ग किमी भूमि को जलमग्न कर दिया। लगभग ३०,००० पशु डूब गए, और ४७,३०० भवनों को क्षति पहुंची जिसमे से १०,००० नष्ट हो गए। उस समय कुल क्षति ८९.५ करोड़ डच गिल्डर आंकी गयी।

प्रतिक्रिया[संपादित करें]

बहुत से पड़ोसी देशों द्वारा खोज और बचाव के लिए सैन्य टुकडियां भेजीं गईं। अमेरिकी सेना द्वारा जर्मनी से हेलीकॉप्टर भेजे गए जिससे लोगों को छतों से उठाया जा सके। महारानी जुलिआना और राजकुमारी बीट्रिक्स ने कुछ दिनों बाद ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। एक बड़ा रेडियो द्वारा समर्थित सहायता कार्यक्रम शीघ्रता से आया। एक राष्ट्रीय दान कार्यक्रम आरम्भ किया गया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सहायता राशि प्राप्त हुई। आपदा के कारण सुरक्षा और डाइक्स को सुदृढ़ बनाने को लेकर कई राजनीतिक चर्चाएं हुई, और अंततः डेल्टा वर्क्स परियोजना आरम्भ की गई। यह एक विस्तृत परियोजना थी जिसमे अधिकांश नदी मुहानों को बंद करने की योजना भी सम्मिलित थी।

ब्रिटेन में उत्तरी सागर बाढ़[संपादित करें]

१९५३ की उत्तरी सागर बाढ़ ब्रिटेन में दर्ज की गयी सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से थी। १,६०० किमी लम्बा समुद्र तट क्षतिग्रस्त हो गया और समुद्री दीवार विच्छेदित हो गयी जिससे १,००० वर्ग किमी का क्षेत्र जलमग्न हो गया। बाढ़ के कारण ३०,००० लोगों को उनके घरों से हटाना पड़ा, और २४,००० संपत्तियां क्षतिग्रस्त हो गयीं। अलग-अलग घटनाओं में फेलिक्सस्टोव, सफ्फोल्क में ३८ लोग मारे गए जब वेस्ट एंड क्षेत्र में पूर्वनिर्मित घर बाढ़ की चपेट में आ गए। एस्सेक्स, कैनवे द्वीप पर ५८ लोग मारे गए और ३७ अन्य समु्द्र किनारे के ग्राम जेविक में मारे गए। ब्रिटेन में भूमि पर कुल मारे गए लोगों की संख्या ३०७ थी और ब्रिटेन के समुद्रों में एम वी प्रिंसेस विक्टोरिया समेत मारे गए कुल लोगों की संख्या २२४ थी।

फ़्लैंडर्स (बेल्जियम) में उत्तरी सागर बाढ़[संपादित करें]

फ़्लैंडर्स के तटीय रक्षा भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी थी। ऊसटेंड, नौके और एंटवर्प में स्थानीय समुद्ररक्षा विच्छेदन के कारण भारी क्षति हुई और २८ लोग मारे गए।

प्रतिक्रिया[संपादित करें]

नीदरलैंड में एक महत्वाकांक्षी बाढ़ सुरक्षा प्रणाली की अभिकल्पना की गयी और "डेल्टा वर्क्स" (डच: Deltawerken (डेल्टावेरकेन)), के नाम से परियोजना आरम्भ की गयी, जिसका उद्देश्य राइन और म्यूस नदियों के मुहानों को सुरक्षित बनाना था। पूरा कार्य १९९८ में तूफान उछाल अवरोधक, मेस्लान्त्केरिंग के पूरा होने के साथ समाप्त हुआ। ब्रिटेन में, समुद्र सुरक्षा में बहुत निवेश किया गया, और मध्य लंदन को भविष्य के तूफानों से बचने के लिए थेम्स अवरोधक कार्यक्रम प्रारंभ किया गया।

भविष्य[संपादित करें]

१९५३ में आये तूफ़ान के सामान ही तूफ़ान आने की सम्भावना यहाँ सदा बनी रहती है क्योंकि जिन कारकों के कारण १९५३ का तूफ़ान आया था वो सदा यहाँ बनते रहते हैं। इनके अतिरिक्त दो ऐसे कारण बन रहे हैं जिनके कारण ये आने वाले किसी भी तूफान की तीव्रता को और बढ़ा सकते है, जिनमें पहला है, अंतिम हिमसंहति के बाद से हिमसंहति पत्रक के आइसोस्टैटिक प्रतिक्षेप के कारण पश्चिमी नीदरलैंड और दक्षिण-पूर्वी ब्रिटेन समुद्र में धस रहे है जबकि अन्य भाग ऊँचे उठ रहे है। और दूसरा कारण है, मौसम में हो रहे बदलाव के कारण समुद्रों का बढ़ता जलस्तर जिससे, और अधिक, और तीव्र तूफान आ रहे है।

बाढ़ अवरोधक, उन्नत मौसम पूर्वानुमान, आधुनिक संचार, और परिष्कृत आपातकालीन सेवाएं भविष्य में आने वाले तूफान में संभावित प्राणहानि को कम कर सकते हैं।

चलचित्र और संगीत[संपादित करें]

  • बीबीसी टाइमवाच ने १९५३ के उत्तरी सागर बाढ़ पर एक वृत्तचित्र निर्मित किया, सबसे महान तूफ़ान (द ग्रेटेस्ट स्टॉर्म)।
  • आईटीवी श्रृंखला सवैज प्लैनिट के एक प्रकरण में बाढ़ को दर्शाया गया था।
  • जनवरी २००८ में ब्राईटन आधारित बैंड ब्रिटिश सी पवार ने अपना ३रा एल्बम "डू यू लाइक रॉक म्युसिक?" जारी किया जिसमे १९५३ की बाढ़ से सम्बंधित "कैनवे आइलैंड" नामक गाना है।
  • डच सार्वजनिक प्रसारण स्थापन ने कई वृत्तचित्रों का निर्माण किया है जो १९५३ की उत्तरी सागर बाढ़ से सम्बंधित है। उन्होंने २ अंग्रेजी संस्करण भी बनाये जो मूल रूप से डच वृतचित्र ही हैं। इन वृत्तचित्रों के शीर्षक है "सबसे बड़ा तूफान" और "१९५३, दानव का वर्ष"।
  • १९५३ की बाढ़ का २००७ के चलचित्र "बाढ़" में विस्तार से उल्लेख किया गया है।
  • २००९ में एक डच चलचित्र "डी स्टॉर्म"(तूफान) शीर्षक से जारी किया जाएगा।