इल्बर्ट विधेयक

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इल्बर्ट विधेयक (Ilbert Bill) भारत में सन् १८८३ में ब्रिटिश राज के दौरान वाइसराय रिपन द्वारा सुझाया गया एक कानून था जिसके अंतर्गत ज़िले-स्तर के भारतीय न्यायाधीशों को ब्रिटिश मुल्ज़िमों पर न्यायिक आदेश जारी करने का अधिकार दिया जाना था। उस समय से पहले भारतीयों को ब्रिटिश अपराधियों से सम्बंधित मुक़द्दमे सुनने का हक़ नहीं था। इस विधेयक का नाम कोर्टनी इल्बेर्ट (Courtenay Ilbert) पर रखा गया जो वाइसराय की भारत परिषद् के क़ानूनी सलाहकार थे।[1]

इस से पहले दो ऐसे विधेयकों पर चर्चा हुई थी और यह विधेयक उनका मिश्रित रूप था। इस विधेयक का उस समय भारत में मौजूद ब्रिटिश समुदाय ने ज़ोर-शोर से विरोध किया जिस से अंग्रेज़ों और भारतीयों में नसली तनाव बढ़ा।[2] १८८४ में इसे तोड़मोड़ कर कमज़ोर किया गया और फिर यह पारित हुआ। इस विवाद से पैदा हुआ आपसी द्वेष का वातावरण अगले ही वर्ष (१८८५ में) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बन जाने का एक बड़ा कारण माना जाता है।[3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Alibis of Empire: Henry Maine and the Ends of Liberal Imperialism, Karuna Mantena, pp. 39, Princeton University Press, 2010, ISBN 978-0-691-12816-0, ... The challenge to the ideals of liberal imperialism that was intimated in the Eyre controversy became more openly proclaimed in the defeat of the Ilbert Bill. In 1883, Courtney Ilbert, as Law Member of the Viceroy's Council, introduced a innocuous amendment to the Indian Criminal Procedure Code, extending the right to try cases involving Europeans to native magistrates in rural districts ...
  2. Appletons' Annual Cyclopaedia and Register of Important Events, pp. 443, D. Appleton, 1884, ... In India the demonstrations and meetings in opposition to the Ilbert bill gave rise to counter-demonstrations in its favor ...
  3. The Force Born of Truth: Mohandas Gandhi and the Salt March, Betsy Kuhn, pp. 18, Twenty-First Century Books, 2011, ISBN 978-0-7613-6354-5, ... because of the Ilbert Bill, 'a growing feeling of national unity which would otherwise have taken [Indians] years to form, suddenly developed into strong sentiments' ... it was the driving force behind the creation of the Indian National Congress (INC) ...