इटहरा

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इटहरा
Itahara Uparwar
इटहरा
—  गाँव  —
इटहरा is located in उत्तर प्रदेश
इटहरा
स्थान - भारत के उत्तर प्रदेश में
निर्देशांक : 25°13′26″N 82°13′26″E / 25.22389°N 82.22389°E / 25.22389; 82.22389Erioll world.svgनिर्देशांक: 25°13′26″N 82°13′26″E / 25.22389°N 82.22389°E / 25.22389; 82.22389
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
जिला संत रविदास नगर
शासन
 • प्रधान सुरेश मिश्र
आबादी (2001)
 • कुल 3,192
Languages
 • Official Hindi
समय मण्डल IST (यूटीसी +5:30)
PIN 221309
Telephone code 05414
वाहन पंजीकरण UP-66
Sex ratio 52:48 /

इटहरा एक गाँव है और ये उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर जिला के डीघ मंडल में स्थित है यह जिला मुख्यालय से करीब ३५ किलोमीटर दूर है, ये गाँव गंगा नदी से तीनो दिशाओ से घिरी हुई है | प्रसिद्ध मंदिर बाबा गंगेश्वरनाथ धाम इसी गाँव में है | ये गाँव बहुत ही विकसित गाँव था। कोनिया क्षेत्र में मात्र इसी गाँव में बाजार हुआ करता था, कोनिया क्षेत्र के लोग यही से खरीदारी करते थे। इसे आज भी सरकारी तौर पर ग्रामीण बाजार का दर्जा प्राप्त है। धीरे धीरे गाँव की जनसँख्या में वृद्धि हुई और लोग रोजगार की तलाश में बाहर जाने लगे जैसे मुंबई, दिल्ली, कोलकाता,सूरत और बचे हुए लोग भी गाँव की पुरानी बस्ती से बाहर अपना घर बनाने लगे जिससे इस गाँव का दायरा लगभग ३ किलोमीटर से ज्यादा हो गया। आज ये गाँव ३ किलोमीटर के दायरे से ज्यादा में बसा हुआ है। इस गाँव में सबसे बड़ी संख्या में बिसेन राजपूत है क्योंकि ये गाँव इन्ही के द्वारा बसाया गया था। उसके बाद बड़ी संख्या में क्रमश : ब्राह्मण, पासी, चमार,यादव मौजूद है। कायस्थ, बनिया, नाई, कुम्हार, कहार, मुसलमान, पुष्पाकर (माली), चौरसिया (बरई),धोबी, तेली (गुप्ता),मुसहर जाति ये जातियां भी इस गाँव में मौजूद है। सामाजिक तौर पर ये गाँव आज भी काफी विकसित है। इस गाँव में एक इंटर कॉलेज और एक महिला महाविद्यालय भी है।

"गंग सकल मुद मंगल मुला।
गाँव इटहरा सुर सरि तिरा।।"

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

भारत की 2001 जनगणना अनुसार, इटहरा की आबादी 3192 थी। जिसमे पुरुषों की संख्या 48% (1537) और महिलाओं की संख्या 52% (1655) थी।

इतिहास[संपादित करें]

पहले यह गाँव भर राजाओ के कब्जे में था, फिर मौनस राजपूतो द्वारा इस पर कब्ज़ा कर लिया गया उसके बाद इस गाँव में बिसेन राजपूत आये | पुरानी बस्ती में स्थित कोटिया (टिला) पर आज भी भरो के रहने के अवशेष मिलते है। जिसमे बड़े बड़े कोल्हू पुराने खपरैल के टुकड़े प्रमुख है।

संदर्भ[संपादित करें]

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_8086695.html