इक्टोपिया कॉर्डिस

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चित्र:Ectopia cordis.jpg
इक्टोपिया कॉर्डिस के कारण मृत एक नवजात शिशु का संरक्षित प्रतिरूप
मानव ह्रदय को ६४ साल के वृद्ध पुरुष में से हटाया गया।

इक्टोपिया कोर्डिस एक प्रकार का जन्म दोष है, जिसमें हृदय जन्म के समय शरीर में अपने नियत स्थान में न होकर, बल्कि छाती के अगले हिस्से की ओर उभर आता है या कभी छाती के आस-पास के हिस्सों में पाया जाता है। इस बीमारी के सही कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। ज्यादातर ऐसे मामलों में बच्चे की जन्म के बाद मृत्यु हो जाती है, लेकिन कभी-कभी इसका ऑपरेशन सफल भी होता है। २ सितंबर, २००९ को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में डॉक्टरों की टीम ने इक्टोपिया कॉर्डिस से ग्रस्त १० दिन के एक शिशु के हृदय का सफल ऑपरेशन किया है।[1][2][3][4]

सामान्यतः यह बीमारी बहुत कम होती है। दस हजार में सिर्फ ०.०७९ प्रतिशत बच्चों में ही इसकी संभावना पाई गई है। इस गंभीर बीमारी को हम एक्टोकॉर्डिया और एक्ज़ोकार्डियो भी कहते हैं। अभी तक इसके संक्रामक या आनुवांशिक होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसकी पहचान जन्म के पहले अल्ट्रासाउंड में ही हो जाती है। दिल की स्थिति के आधार पर इक्टोपिया कॉर्डिस को चार भागों में बाँटा गया है- सरवाइकल, थोरासिक, थोराकोएब्डॉमिनल और एब्डॉमिनल। इक्टोपिया कोर्डिस के साथ जुड़े जन्म दोष की इक्टोपिया कॉर्डिस बीमारी से ग्रसित अब तक जीवित व्यक्ति क्रिस्टोफर वॉल (१९७५) का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। आने वाले समय में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए इक्टोपिया कॉर्डिस एक चुनौती के रूप में सामने है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. इक्टोपिया कॉर्डिस हिन्दुस्ताल लाइव पर
  2. हौसला-अफजाई करें। ६ सितंबर २००९। राज एक्स्प्रेस
  3. जटिल बीमारी से जूझ रहे नवजात को गोद लिया
  4. फेसबुक परमो हल्ला में

बाहरी सूत्र[संपादित करें]