इंदर सभा

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इंदर सभा (اِندر سبها) एक उर्दू का नाटक और ओपेरा है जिसे लखनऊ के अवध दरबार से सम्बन्ध रखने वाले लेखक व कवि आग़ा हसन अमानत​ ने लिखा और जिसे मंच पर सबसे पहले सन् १८५३ में प्रस्तुत किया गया।[1] यह उर्दू की सबसे पहली रचाई जाने वाली नाटकीय कृति मानी जाती है।[2] १८६३ में इसे फ़्रीडरिख़ रोज़न (Friedrich Rosen) ने यूरोपीय पाठकों के लिए जर्मन भाषा में अनुवादित किया, जो कि उस समय के समीक्षकों के द्वारा सराहा गया था।[1][2] १९३२ में मदन थियेटर ने इसपर आधारित एक फ़िल्म 'इन्द्रसभा' भी बनाई थी। ध्यान दें कि जबकि मूल नाटक का नाम लोक-बोली के अनुसार 'इंदर सभा' था, इसपर आधारित फ़िल्म का नाम संस्कृत-प्रथानुसार 'इन्द्रसभा' था।[3]

नाटक[संपादित करें]

यह ओपेरा दिव्यलोक में महराज इन्द्र के राजदरबार को पृष्ठभूमि बनाकर लिखा गया है। पूरा नाटक काव्य-रूप में लिखा हुआ है और इसकी मुख्य कहानी एक परी (अप्सरा) और एक राजकुमार के बीच की प्रेमकथा है।[4] नाटक में पटाख़ों और नक़ाबों जैसी नाटकीय तकनीकों का प्रयोग किया गया है।[1] वैसे तो अमानत ने यह नाटक अवध के राजदरबार में रचाने के लिए ही लिखा था लेकिन इसके गीत जल्द ही लोक-संस्कृति में प्रवेश कर गए और "आने वाली कम-से-कम दो पीढ़ियों तक अवध के गीतकार और कलाकार इंदर सभा के गाने गाते थे"।[2][5] इसका हिन्दी-उर्दू की गीत परम्परा के विकास पर भी प्रभाव पड़ा। नाटक में "३१ ग़ज़लें, ९ ठुमरियाँ, ४ होलियाँ, १५ गीत, २ चौबोले और ५ छंद सम्मिलित थे जिनपर आधारित कई नृत्य प्रस्तुत किये जा सकते थे"।

इस नाटक का सीधा प्रभाव १९वीं और २०वीं में बाद में आने वाले कई उर्दू नाटकों पर बड़ा जिनमें ख़ादिम हुसैन अफ़सोस का 'बज़्म-ए-सुलयमान' (सन् १८६२), भैरों सिंह अस्मत​ का 'जश्न-ए-परिस्तान' और ताज महल फ़ार्रूख़​ का 'निगारिस्तान-ए-फ़ार्रूख़​' शामिल हैं।[1]

फ़िल्म[संपादित करें]

१९३२ में प्रस्तुत की गई फ़िल्म 'इन्द्रसभा' भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे पहली बोलने वाली (टाकीज़) फ़िल्म थी। सबसे पहली भारतीय ध्वनिपूर्ण फ़िल्म 'आलम आरा' थी और 'इन्द्रसभा' ठीक उस से अगले ही वर्ष रिलीज़ हुई। यह २११ मिनट लम्बी थी और इसमें ७० से भी अधिक गाने थे, जो विश्व-इतिहास में किसी भी बनी हुई फ़िल्म में सर्वाधिक हैं।[6] 'इन्द्रसभा' फ़िल्म जमशेदजी फ़्रामजी मदन की 'मदन थियेटर' नामक कम्पनी ने बनाई थी।[3]

गीत का उदाहरण[संपादित करें]

इंदर सभा के एक दृश्य में देवताओं के राजा इन्द्र अपने दरबार में प्रवेश करते हैं और एक चौबोले में कहते हैं कि:[7]

मूल उर्दू देवनागरी

راجا هوں میں قوم کا اور اِندر میرا نام

بِن پریوں کی دید کے مُجهے نهیں آرام
میرا سنگلدیپ میں مُلکوں مُلکوں راج
جی میرا هے چاہتا کی جلسہ دیکهوں آج

राजा हूँ मैं क़ौम का और इंदर मेरा नाम
बिन परियों की दीद के मुझे नहीं आराम
मेरा संगलदीप में मुल्कों-मुल्कों राज
जी मेरा है चाहता कि जलसा देखूँ आज

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Encyclopaedia Of Indian Literature, Volume 2, Amaresh Datta, Sahitya Akademi, 2006, ISBN 978-81-260-1194-0, ... some characters used masks and other make up their faces ... Fireworks were used ... published in German by Friedrich Rosen (1805-1837) in Leipzig which evoked considerable interest ... Khadim Husain Afsos's Inder Sabha (Agra, 1862) ...
  2. The Cambridge guide to Asian theatre, James R. Brandon, Cambridge University Press, 1997, ISBN 978-0-521-58822-5, ... The history of the theatre of moden Pakistan is the history of the Urdu-language theatre which started in 1853 with the composition of Mirza Amanat's Inder Sabha performed at the court of Wajid Ali Shah of Oudh ... for at least two generations after that, actors and musicians of Oudh sang the songs of Inder Sabha ...
  3. Global Bollywood: travels of Hindi song and dance, Sangita Gopal, Sujata Moorti, University of Minnesota Press, 2008, ISBN 978-0-8166-4579-4, ... in early experimentations with the technology of sound, narration in films like Indrasabha (The Court of Indra, JJ Madan, 1932) ... It would therefore be gratuitous to say that Indrasabha had seventy-one songs ...
  4. South Asia: the Indian subcontinent, Part 2, Alison Arnold, Taylor & Francis, 2000, ISBN 978-0-8240-4946-1, ... The court poet Agha Hasan ('Amanat') wrote this musical dance drama based on the love story of a fairy and a prince. The drama, entirely in verse, was picked up by Parsi theater companies in Bombay that produced Urdu plays in India ...
  5. Urdū adab, Sayyid Mohammad Abdullah, Maktaba-e-khayaban-e-adab, 1967, ... اردو میں اس صنف کا احیا، اودھ کے تہزیبی دور میں ھوا. امانت نے اندر سبھا میں گیت کو رواج دیا ...
  6. Movie facts and feats: a Guinness record book, Patrick Robertson, Sterling Pub. Co., 1980, ISBN 978-0-8069-0204-3, ... The musical with the most song numbers was Madan Theatres' Indra Sabha (India 32), a Hindi movie with 71 songs. The Hollywood musical with the most songs was Columbia's The Jolson Story (US 46) which had 28 song sequences ...
  7. Changing South Asia: City and culture, Kenneth Ballhatchet, David D. Taylor, Centre of South Asian Studies, The School of Oriental & African Studies, University of London, 1984, ... Raja Indar at first performs a dance and then sings a chaubola, in which he proclaims, Raja hun main quam ka ...