इंडियन रेअर अर्थ्स लिमिटेड

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इंडियन रेअर अर्थ्स लिमिटेड (Indian Rare Earths Limited (IREL)) भारत सरकार का उपक्रम है। इसका मुख्यालय मुंबई में है।

18 अगस्त 1950 को इंडियन रेअर अर्थ्स लिमिटेड (आईआरईएल) को भारत सरकार और तत्कालीन त्रावणकोर, कोचीन के संयुक्त स्वामित्व वाली एक प्राईवेट लिमिटेड कंपनी के रुप में निगमित किया गया था। निगमन के समय कंपनी का मूल उद्देश्य मोनाजाइट की प्रोसेसिंग के माध्यम से वाणिज्यिक स्तर प्राप्त करना और अपने पहले यूनिट रेअर अर्थ्स प्रभाग, आलवे, केरल में थोरियम को प्राप्त करना था।

1963 में परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के प्रशासनिक नियंत्रण में पूर्ण रुप से भारत सरकार का उपक्रम होने के बाद आईआरईएल ने देश के दक्षिण भाग में तटीय रेत खनिज के खनन एवं पृथ्थकरण में संलग्न अनेक निजी कंपनियों को अधिकार में लेकर दो प्रभागों की स्थापना की, एक चवरा केरल में तथा दूसरा मनवलाकुरिची (एमके), तमिलनाडु में।

लगभग 20 वर्ष पश्चात आईआरईएल ने छत्रपुर, उड़ीसा में अपना सबसे बड़ा प्रभाग उड़ीसा सौण्ड कॉम्पलेक्स (ऑसकॉम) प्रारंभ किया। आज आईआरईएल इन चारों यूनिटों का प्रचालन, कार्पोरेट कार्यालय मुंबई से करती है और छ : भारी खनिज जौसे इल्मेनाइट रुटाइल, जिरकॉन, मोनाजाइट, सिल्मेनाइट, गारनेट के साथ-साथ अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों का उत्पाद एवं बिक्री करती है। आईआरईएल पिछले छ : वर्षों से लाभ अर्जित कर रही है। वर्ष 2000-2001 में कुल बिक्री 2600 मिलियन रुपये तक पहुँच गई जिसमें 1000 मिलियन रुपये की निर्यात राशि शामिल है।

भूमिका[संपादित करें]

अगले 7-10 वर्षों में एशिया से विश्व की तटीय रेत खनिजों की मांग का 10% आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता होना। इसकी मौजूदा õामता का अधिकतम उपयोग, नई क्षमता का संयोजन, विकास के लिए ग्लोबल TiO2 फीडस्टॉक मांग के मुख्य भाग को अधिकार में लेने और मूल्यवर्धित रुटाइल, जिरकॉन, सिल्मेनाइट एवं गारनेट उत्पादों का प्रतियोगिक स्तर पर विकास कर अच्छा राजस्व एवं लाभ अर्जित करने में मददगार होना।

घरेलू ग्राहकों के लिए दीर्घावधि लाभ सुनिश्चित करना तथा श्रेष्ठ उत्पादों का आपूर्तिकर्ता (उत्पादक एवं/या विक्रेता) तथा रेअर अर्थ्स कारोबार में लाभदायक तथा जहां तक आवश्यक हो मोनोजाइट संसाधन में पर्याप्त कुशलता प्राप्त करना।

उद्देश्य[संपादित करें]

  • विश्वस्तर के गुणवत्ता वाले खनिजों का उत्पाद एवं उनके परम्परागत और रचनात्मक मूल्यवर्धित उत्पादों का ग्राहकों द्वारा अपेक्षित उच्चकोटि/नए उत्पाद को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए पर्यावरणीय और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ तटीय रेत का इस्तेमाल करना।
  • मूल्यवर्धित गुणवत्तावाले उत्पादों का उत्पादन एवं/ या उपयोग की श्रेणी में रेअर अर्थ्स का अधिकतम प्रयोग/विपणन करते हुए घरेलू रेअर अर्थ्स के बाजार में अहम भूमिका निभाना।
  • व्यावसायिक, रचनात्मक एवं वचनबद्ध वर्कफोर्स का निर्माण करना तथा ऐसा माहौल तौयार करना जो सीखने, बांटने एवं विकास में सहायक हो।

इकाइयाँ[संपादित करें]

चवरा खनिज प्रभाग[संपादित करें]

यह उत्तरी कोल्लम से 10 कि.मी., केरल की राजधानी तिरुवंतपुरम से 85 कि.मी. और सड़क मार्ग द्वारा कोच्ची से 135 कि.मी. स्थित है, जिसमें देश की समृद्ध खनिज रेत का विशाल भंडार है। प्लांट खनन क्षेत्र में प्रचालन करता है जिसमें 40% से भी अधिक भारी खनिज पाए जाते हैं जो निदंकारा तथा कय्यमकुलम के बीच 23 कि.मी.तक फैला हुआ है। इस समृद्ध खनिज के भंडार में इल्मेनाइट, रुटाईल एवं जिरकॉन पाए जाते हैं तथा इल्मेनाइट खनिज का विश्लेषण करने पर उसमें 60% TiO2 पाया जाता है। चवरा यूनिट का ड्राय तथा वेट (ड्रेजिंग/अपग्रेड्रेशन) खनन तथा खनिज पृथ्थकरण से मौजूदा वार्षिक उत्पादन क्षमता इल्मेनाइट 154000 टन, रुटाइल 9500 टन, जिरकॉन 14000 टन तथा सिल्मेनाइट की 7000 टन की मौजूदा वार्षिक उत्पादन क्षमता है। इसके अतिरिक्त प्लांट में ग्राउंड जिरकॉन जिसे जिरफ्लोर (-45 माइक्रोन) तथा माइक्रोजि़र (1-3 माइक्रोन) का क्रमश: 6000 टन एवं 500 टन वार्षिक उत्पादन करने की भी सुविधा है।

मनवलाकुरिची (एमके) खनिज प्रभाग[संपादित करें]

यह प्लांट हिन्द उप महाद्वीप के दक्षिण की ओर कन्याकुमारी (केप कॉमरीन) से उत्तर दिशा में 25 कि.मी. की दूरी पर है। इस प्लांट से तूतीकोरीन प्रमुख बंदरगाह तथा नजदीकी हवाई अड्डा विरुवंतपुरम 65 कि.मी. की समान दूरी पर है। नागरकोईल रेलवे स्टेशन प्लांट से 18 कि.मी. है जो एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। एमके प्लांट में TiO2 ग्रेड का 55% इल्मेनाइट लगभग 90000 टन, रुटाइल 3500 टन तथा जिरकॉन 10,000 टन इसके अतिरिक्त 3000 टन मोनाजाइट और 10,000 टन गान्र्नेट का वार्षिक उत्पादन होता है जिसे आसपास के 5 गाँवो के मछुआरों के द्वारा मुख्य रुप से बीच वॉशिंग के माध्यम से आपूर्ति किया जाता है। आईआरईएल ने खनिज को प्रचुर मात्रा में उपलब्ध करनेवाला क्षेत्र पट्टे पर लिया है जिसमें ड्रेजिंग ऑपरेशन के जरिए प्रचुर मात्रा में कच्ची रेत उपलब्ध की जा सकती है। खनन एवं खनिज पृथ्थकरण के अलावा, यूनिट में सीमित मात्रा में जिरकॉन फ्रिट से जिरकॉन तथा अन्य जिरकॉनियम जौसे मूल्य वर्धित रसायन तौयार करने के लिए एमके प्लांट में एक रसायन प्लांट है।

उड़ीसा सौण्ड कॉम्पलेक्स (ऑसकॉम)[संपादित करें]

40 स्कवेयर कि.मी. क्षेत्र में बहुत बड़े खनन क्षेत्र में 50% ग्रेड इल्मेनाइट 2,20,000 टन तथा अन्य सहयोगी खनिज जौसे कि रुटाइल, जिरकॉन, इल्मेनाइट, गान्र्नेट आदि के उत्पादन के लिए ऑसकॉम, छत्रपुर में उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से लगभग 150 कि.मी. तथा विशाखापट्टनम बंदरगाह से लगभग 320 कि.मी. शुरु किया गया था। यह सुविधा इस अर्थ से अनोखी थी कि आईआरईएल ने बेनीलाइट प्रौद्योगिकी के आधार पर सभी इल्मेनाइट का प्रतिवर्ष 100 हजार टन 92% ग्रेड सिंथेटिक रुटाइल में परिवर्तित करने के लिए ऑसकॉम में पहली बार मूल्यवर्धित तथा ड्रेजिंग एवं कन्सनट्रेट प्रचालन प्लांट की स्थापना की। इस प्रक्रिया में इल्मेनाइट की कार्बन के साथ रिडक्शन रोसिं्टग की जाती है और उसके बाद फेरस ऑक्साईड को फेरिक ऑक्साईड में परिवर्तित करने के लिए 1300C पर 30% HCI के साथ लीचिंग की जाती है जिससे आयरन, फेरस क्लोराइड के रुप में घुल कर अलग हो जाता है। लीच किये गये खनिज को सिंथेटिक रुटाइल (SR) प्राप्त करने तथा एसीटिक लीच लिकर को ARP में संसाधित किया जाता है जिससे HCI प्राप्त होता है जिसे पुनचक्रित करते हैं और ऑयरन ऑक्साईड को वेस्ट के रुप में जेनरेट किया जाता है। SRP को बंद करने से पहले वह 10 वर्ष तक चलता रहा लेकिन प्लांट अपनी निर्धारित क्षमता का कार्य भी नहीं कर सका। SRP के अलावा कच्ची रेत की ड्रेजींग, अपग्रेडेशन, ड्राय मिल के जरिए विशिष्ट खनिजों का पृथ्थकरण जौसे कार्य में ऑसकॉम सक्षमता से कार्य कर रहा है। मुख्यत: स्लौग तथा सल्फेटेबल TiO2 पिगमेंट का उत्पादन करने वाले ग्राहकों के लिए इल्मेनाइट की प्रमुख रुप से निर्यात की जाती है।

रेअर अर्थ्स प्रभाग (रे.अ.प्र.) अलूवा[संपादित करें]

पूर्व वर्णित IREL के तीन यूनिटों से हटकर, RED एक मूल्य वर्धित रसायन संयंत्र है जिसमें एमके में उत्पादित मोनाजाईट खनिज पर रासायनिक प्रक्रिया करके हाईड्रोक्साईड के रुप में थोरियम तथा रेअर अर्थ्स को कंपोजिट क्लोराइड फार्म में प्राप्त किया जाता है। यह संयत्र पेरीयार नदी के किनारे पर है जो, कोच्ची से सड़क मार्ग से 12 कि.मी. की दूरी पर है। इस प्लांट को प्रतिवर्ष 1400 टन मोनाजाईट की प्रोसेसिंग करने के लिए सन 1952 में शुरु किया गया। तथापि, इन वर्षों के दौरान प्रतिवर्ष 3600 टन मोनाजाईट पर प्रक्रिया करने के लिए इस प्लांट की क्षमता बढ़ती गई। Ce oxide, Nd2O3, Pr6O11, La6O पर्याप्त शुद्धता वाले रेअर अर्थ्स ऑक्साइड के उत्पादन के लिए सॉल्वंट एक्सट्रॅक्शन एवं ऑयन एक्सचेंज जौसी सुविधाएं स्थापित की गई। आज रेअर अर्थ्स प्रभाग के पास थोरियम हाईड्रोक्साइड कॉन्सनट्रेट तथा अन्य अनट्रीटेड सामग्री का विशाल भंडार है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]