इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन

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इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन (आईपीटीवी) में इंटरनेट, ब्रॉडबैंड की सहायता से टेलीविजन कार्यक्रम घरों तक पहुंचता है। इस प्रणाली में टेलीविजन के कार्यक्रम डीटीएच या केबल नेटवर्क के बजाय, कम्प्यूटर नेटवर्क में प्रयोग होने वाली टेक्नोलॉजी की सहायता से देखते हैं। वर्ष १९९४ में ए.बी.सी का व‌र्ल्ड न्यूज नाउ पहला टेलीविजन कार्यक्रम था, जिसे इंटरनेट पर प्रसारित किया गया था। १९९५ में इंटरनेट के लिए एक वीडियो उत्पाद तैयार किया गया, जिसका नाम आई.पी.टी.वी रखा गया था। लेकिन सबसे पहले संयुक्त राजशाही में टेलीविजन के कार्यक्रम इंटरनेट ब्रॉडबैंड की सहायता से प्रसारित किए गए और इस फॉर्मेट को भी आईपीटीवी नाम दिया गया।[1] २० अगस्त, २००८ को भारत सरकार ने भी इसे मंजूरी दे दी है,[2] व भारत के कई शहरों में ये सेवा चालू हो चुकी है।

विश्व में आईपीटीवी प्रयोक्ता देश। ██ वे देश जहां किसी भी भाग में आईपीटीवी उपलब्ध है।

इस सेवा के भारत में वर्तमान प्रदाताओं में भारत संचार निगम लिमिटेड, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड और भारती एयरटेल हैं।[3][4][5][6][7] यह सेवा विश्व भर में बहुत से देशों में प्रचालन में है।[8]

इंटरनेट टीवी से अंतर

इंटरनेट प्रोटोकॉल टीवी का यह अर्थ नहीं है कि किसी भी वेबसाइट पर फेवरिट वेबपेज को क्लिक करते ही टेलीविजन के कार्यक्रम सामने हों। आईपी एक बहुत ही सुरक्षित नेटवर्किग माध्यम है, जिसमें इंटरनेट बॉडबैंड की सहायता से टेलीविजन प्रोग्राम टीवी या कंप्यूटर तक पहुंच सकता है। यह टेलीकॉम प्रदाता कंपनियों (एमटीएनएल, एयरटेल आदि) द्वारा प्रदान की जा रही सेवा द्वारा संभव हो पाता है, जिसे डिजिटल केबल या सेटेलाइट सर्विसेज के स्थान पर प्रयोग किया जा सकता है। जहां आईपी के प्रयोग हेतु एक सेट टॉप बॉक्स की सहायता लेनी होती है; वहीं, इंटरनेट टीवी (आईटीवी) में किसी भी साइट पर रिकॉर्डेड प्रोग्राम देखे जाते हैं।[4]

कार्य प्रणाली

आईपीटीवी टेलीविजन संकेत को कम्प्यूटर डाटा में बदल देता है। आईपीटीवी के तीन भाग होते हैं :

  • टीवी ऐंड कन्टेंट हेड एन्ड:इसमें टीवी चैनलों के प्रोग्राम प्राप्त और इनकोड किए जाते हैं। इसके अलावा, वीडियो प्रोग्राम भी स्टोर किया जाता है।
  • डिलीवरी नेटवर्क: इसमें टेलीकॉम ऑपरेटर्स आते हैं, जिनके द्वारा ब्रॉडबैंड और लैंडलाइन नेटवर्क उपलब्ध कराया जाता है।
  • सेट-टॉप बॉक्स: यह बॉक्स ऑपरेटर के ब्रॉडबैंड मोडेम को टीवी से जोडता है।

लाभ

जब टीवी को आईपीटीवी ब्रॉडबैंड कनेक्शन से जोडते हैं, तो वीडियो ऑन डिमांड (वीओडी) और इंटरनेट सर्विस (वेब एक्सेस, वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल-वीओआईपी, इंटरनेट टीवी) की सुविधा भी मिल सकती है।[4] साथ ही साथ, ट्रेडिशनल सर्विसेज की अपेक्षा इसकी डिजिटल वीडियो और ऑडियो की क्वालिटी बेहद अच्छी होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है, इसका इंटरैक्टिव होना। यदि कोई क्रिकेट मैच देखना हो, और मैच के बीच ही अपने मनपसंद खिलाड़ी का इतिहास जानना चाहते हैं, तो इसमें यह विकल्प भी उपलब्ध होता है, जिसकी सहायता से संबंधित खिलाडी का पिछला रिकॉर्ड पलक झपकते ही सामने आ जाता है, साथ ही यदि अपने कार्यक्रम के प्रसारण के समय व्यस्त हों, तो बाद में अपनी सुविधानुसार टीवी पर उसकी रिकॉर्डिग भी देख सकते हैं। इसके अलावा, वीओडी की सहायता से ऑनलाइन फिल्म अनुक्रमणिका से फिल्म चुन कर देख सकते हैं। यह अन्य नेटवर्किग सर्विस की अपेक्षा सस्ता भी है। इसके अलावा वीडियो ऑन डिमांड, इंट्रेक्टिव गेम्स, टाइम शिफ्टिड टीवी, आई कंट्रोल और ए टयूब भी सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगे। [9]

अन्य प्रचलित माध्यम

डायरेक्ट टू होम (डीटीएच) टेलीविजन सेवा में उपग्रह कार्यक्रम को निजी डिश एंटीना और सेट टॉप बॉक्स की सहायता से घरों में प्राप्त किया जाता है। इसमें उपभोक्ता सीधे प्रसारणकर्त्ता से जुड जाता है। इसमें लोकल केबल ऑपरेटर की कोई आवश्यकता नहीं होती है। डीटीएच सर्विस सुदूर गांव (रिमोट एरिया) में भी आसानी से पहुंच जाता है। इसकी विशेषता यह है कि इसकी सहायता से लगभग ७०० चैनल्स प्राप्त और दर्शन कर सकते हैं।

विश्व भर में विभिन्न टेलीविजन चैनल्स के प्रोग्राम केबल सर्विस की सहायता से देखे जाते हैं। इसमें सेटेलाइट प्रोग्राम को डिश एंटीना की सहायता से रिसीव किया जाता है। केबल ऑपरेटर तार (केबल) की सहायता से टीवी चैनल्स के प्रोग्राम को घरों तक पहुंचाते हैं।

संदर्भ

  • कुछ अंश सीईसी के ज्वाइंट डायरेक्टर- हार्डवेयर, प्रदीप कौल से बातचीत पर आधारित

बाहरी सूत्र