इंजन

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(उष्मा) इंजन उस यंत्र या मशीन (या उसके भाग) को कहते हैं जिसकी सहायता से ऊष्मा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है। इंजन की इस यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग, कार्य करने के लिए किया जाता है।

[संपादित करें] उष्मा इंजन के प्रकार

उष्मा इंजन (heat engines) दो प्रकार के हाते हैं :

1. बाह्य दहन इंजन - इसमें इंजन को चलानेवाला पदार्थ इंजन के बाहर अलग पात्र में तप्त किया जाता है। जैसे भाप इंजन में इंजन से अलग बायलर में पानी से भाप बनती है जो सिलिंडर में जाकर पिस्टन को चलाती है। बाह्य दहन इंजन का सर्वोत्तम उदाहरण "भाप इंजन" है।

2. आंतरिक दहन इंजन - इसमें ऊष्मा इंजन के भीतर ही दहन द्वारा किसी तेल या पेट्रोल या किसी गैस को जलाकर उत्पन्न करते हैं। मोटरकार, हवाई जहाज इत्यादि में आंतरिक दहन इंजन का ही उपयोग होता है। भाप इंजन की तरह इनमें ईंधन जलाने के लिए अलग बायलर नहीं होता, इसी कारण इन इंजनों को आंतरिक दहन इंजन कहते हैं।

[संपादित करें] विशेषताएँ एवं उपयोग

उन उद्योंगों में, जहाँ इंजन की आवश्यकता केवल विशेष ऋतुओं में पड़ती है, जैसे कपास ओटने, आटा पीसने, ईख पेरने, बर्फ बनाने आदि के लिए, अंतर्दहन इंजन विशेष उपयोगी होते हैं, क्योंकि जब ये इंजन वाष्प रहते हैं तब उनकी देखभाल पर बहुत कम व्यय होता है। इसी कारण वाष्प इंजनों से चलनेवाले कारखानों में बहुधा फालतू इंजन डीज़ल इंजन होते हैं। इनका प्रयोग तब होता है जब वाष्प इंजन कभी बिगड़ जाता है। अंतर्दहन इंजन बहुत शीघ्र चालू किए जा सकते हैं और शीघ्र ही अपने पूरे सामर्थ्य से काम करने लगते हैं। वाष्प इंजनों में ये गुण नहीं होते। आजकल वाष्प इंजनों का प्रयोग नहींके बराबर होता है।