आदरसूचक

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आदरसूचक (honorific) ऐसा शब्द या वाक्यांश होता है जो किसी के लिए प्रयोग करने से उसके लिए इज़्ज़त या सम्मान की भावना प्रकट करता है। हिन्दी, उर्दू, पंजाबी और अन्य हिन्द-आर्य भाषाओं के 'जी' ('मौलवी जी'), 'साहब' ('डॉक्टर साहब') और 'जान' ('भाई जान') शब्द इसके उदाहरण हैं। कभी-कभी यह शब्द सम्मानित वस्तुओं के लिए भी प्रयोग होते हैं, मसलन सिख सांगत को सामूहिक रूप से 'ख़ालसा जी' और लंका के देश को 'श्रीलंका' कहा जाता है। कुछ आदरसूचक पूरे नाम के स्थान पर प्रयोग किये जाते हैं। उदाहरण के लिए 'हाँ, शुक्ल जी' के स्थान पर 'जी हाँ, साहब' या केवल 'जी, साहब' या 'हाँ जी' कहा जा सकता है।[1]

विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के आदरसूचक[संपादित करें]

उत्तर भारतीय भाषाओं में[संपादित करें]

  • हिन्दी में श्री/श्रीमान (पुरुषों के लिए), श्रीमती (विवाहित स्त्रियों के लिए) व कुमारी (अविवाहित महिलाओं और लड़कियों के लिए) नाम के आगे लगाये जाते हैं। इसके अलावा 'जान' ('अम्मी जान'), 'पंडित' ('पंडित नेहरु'), 'महाशय', 'जनाब', 'हुज़ूर' और 'जजमान' जैसे कई अन्य आदरसूचक भी हिन्दी-उर्दू में प्रयोग होते हैं।
  • उर्दू व कुछ अन्य उत्तर भारतीय भाषाओं में में स्त्रियों को ख़ातून कहा जाता है, मसलन 'हब्बा ख़ातून' एक प्रसिद्ध कश्मीरी कवयित्री थीं। कश्मीरी में 'महाराजा' को छोटा करके 'माहरा' और 'हज़रत' को छोटा करके 'हज़' के रूपों में भी प्रथापूर्वक पुरुषों के लिए प्रयोग किया जाता था हालांकि यह परंपरा अब कमज़ोर हो रही है।[2]
  • उर्दू में 'आदर' को 'एहतराम' भी कहते हैं और पुरुषों को आदर दिखने के लिए उनके नाम के आगे 'मोहतरम' शब्द लगाया जाता है। इसी तरह स्त्रियों के लिए 'मोहतरमा' होता है, मसलन 'मोहतरमा बेनज़ीर भुट्टो'।
  • गुजराती में 'भाई' (पुरुषों के लिए) और 'बेन' ('बहन' का एक रूप, स्त्रियों के लिए) लगाने की प्रथा है, मसलन 'सकीना बेन' और 'गोपाल भाई'।
  • मराठी में स्त्रियों के नाम के पीछे 'बाई' लगाने की प्रथा है, मसलन झांसी की रानी मराठा-मूल की थीं और उन्हें 'लक्ष्मीबाई' कहते थे। दक्षिणी हिन्दी क्षेत्रों में भी यह प्रथा है। पुरुषों के नाम के पीछे 'राव' (उच्चारण 'राओ' जैसा) लगाया जाता है, उदहारण के लिए 'माधव राव'।
  • बंगाली व पूर्वी हिन्दी क्षेत्रों में पुरुषों के नाम के पीछे 'बाबू' लगते हैं, मसलन 'सुभाष बाबू'। और भी आदर जतलाने के लिए 'मोहाशोय' ('महाशय' का रूप) या उसका छोटा शब्द 'मोशाय' लगाया जाता है जिस से किसी आदरणीय पुरुष को 'बाबू मोशाय' कहा जाता है।

दक्षिण भारतीय भाषाओं में[संपादित करें]

  • तमिल में पुरुषों के लिए 'तिरु' और शादीशुदा औरतों के लिए 'तिरुमति' प्रयोग होते हैं। यह 'श्री' व 'श्रीमती' के तमिल रूप हैं। अक्सर नाम के पीछे इज़्ज़त दर्शाने के लिए 'आवर्गल' या 'वाल' शब्द लगते हैं, मसलन 'दलाई लामा आवर्गल'।
  • कन्नड़ में नाम के पीछे 'अवारु' लगाया जाता है। मसलन 'विश्वेश्वरइय्याह' को 'विश्वेश्वरइय्याह अवारु' कहा जाता है।
  • तेलुगु में पुरुषों के नाम के पीछे 'गारू' लगते हैं, मसलन 'श्रीरामुलु' नाम को इज़्ज़तपूर्वक शैली में 'श्रीरामुलु गारू' कहा जाता है।

अंग्रेज़ी में[संपादित करें]

अंग्रेज़ी के सबसे आम आदरसूचक नामों से पहले डाले जाते हैं: पुरुषों के लिए 'मिस्टर' (Mr.), शादीशुदा स्त्रियों के लिए 'मिसिज़' (Mrs.) और कुवाँरी स्त्रियों व लड़कियों के लिए 'मिस' (Miss)। वर्तमानकाल में 'मिसिज़' और 'मिस' शब्दों के स्थान पर सभी महिलाओं और लड़कियों को 'मिज़' (Ms.) कहना अधिक सुसंस्कारित माना जाता है। पिछले ज़माने में पुरुषों के नाम के पीछे 'एस्क्वायर' (Esq.) लगाने की प्रथा थी।

किसी देश या राज्य के राजा-रानी को 'योर मैजेस्टी' (Your Majesty) और शाही परिवार से समबन्धित लोगों को 'योर हाइनेस' (Your Highness) बुलाना पारंपरिक है। दलाई लामा जैस मान्य धार्मिक नेताओं-गुरुओं को 'योर होलीनेस' (Your Holiness) और अदालतों में न्यायाधीशों को 'योर ओनर' (Your Honor) कहा जाता है।

हिन्दी की तरह 'हाँ साहब' जैसा 'येस सर' (Yes Sir, पुरुषों के लिए), 'येस मैम' या 'येस मैडम' (Yes Ma'am या Yes Madam, स्त्रियों के लिए) और 'येस मिस' (Yes Miss, बच्चियों और युवतियों के लिए) भी अंग्रेज़ी में उपलब्ध हैं।

फ़ारसी में[संपादित करें]

ईरान की फ़ारसी भाषा में पुरुषों को 'आग़ा' और स्त्रियों को 'ख़ानुम' कहने की प्रथा है। इनमें बिंदु-वाले 'ख़' के उच्चारण और बिंदु-वाले 'ग़' के उच्चारण पर ध्यान दें क्योंकि यह बिंदु-रहित 'ख' और 'ग' से ज़रा अलग हैं और 'ख़राब' और 'ग़रीब' के पहले अक्षरों जैसे उच्चारित किये जाते हैं। यह आदरसूचक अक्सर अन्य उपाधियों से पहले भी लगाये जाते हैं, मसलन किसी महिला डॉक्टर को 'ख़ानुम डॉक्टर' बुलाया जा सकता है। 'आग़ा' शब्द उसी 'आक़ा' का ईरानी रूप है जिसका अर्थ 'मालिक' या 'स्वामी' होता है और लोककथा में चिराग़ के जिन्न द्वारा अपने मालिक के लिए प्रयोग होता है।[3]

स्पेनी में[संपादित करें]

स्पेनी में बहुत से आदरसूचक प्रयोग होते हैं:

  • 'सेन्योर' (señor) पुरुषों के लिए, 'सेन्योरा' (señora) महिलाओं के लिए और 'सेन्योरीता' (señorita) लड़कियों के लिए आम हैं।
  • पुरुषों के लिए 'काबायेरो' (caballero) का प्रयोग 'महाशय' के बराबर है।
  • अध्यापकों, कला-निपुण लोगों और बहुत शिक्षित लोगों को 'माएस्त्रो' (maestro) कहते हैं। इन्जिनीर, निर्माणशास्त्र या किसी व्यावसायिक हुनर में माहिर व्यक्ति को अक्सर लिसेनसियादो (licenciado) कहा जाता है।
  • दक्षिण अमेरिका में बड़ी उम्र के पुरुष को 'दोन' (don) और स्त्री को 'दोन्या' (doña) कहने की प्रथा है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Indian English, Pingali Sailaja, pp. 87, Edinburgh University Press, 2009, ISBN 978-0-7486-2595-6, ... an honorific suffix -ji, from Hindi, or its equivalent in other languages, is used. This is transferred to Indian English as well, as in, Doctor-ji said that he would be fine ...
  2. Kashmir and Its People: Studies in the Evolution of Kashmiri Society, M. K. Kaw, pp. 315, APH Publishing, 2004, ISBN 978-81-7648-537-1, ... The honorific terms maahraa. haz, jinaab, and sAA are very frequently used as terms of address ...
  3. Law of Desire: Temporary Marriage in Shii'i Iran, Shahla Haeri, pp. 223, Syracuse University Press, 1989, ISBN 978-0-8156-2483-7, ... Khanum means 'lady' or 'Mrs.' ...