आई एन एस विक्रमादित्य
An artist's impression of a Vikramaditya class carrier |
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| Career (India) | साँचा:Shipboxflag |
|---|---|
| Builder: | Black Sea Shipyard, Mykolayiv |
| Laid down: | December 1978 (as Baku) |
| Launched: | April 17, 1982 (as Admiral Gorshkov) December 4, 2008 (as Vikramaditya)[कृपया उद्धरण जोड़ें] |
| Commissioned: | Planned for 2012 (Sea trials in 2011)[1] |
| Status: | Refurbishing, prior to delivery |
| General characteristics | |
| Displacement: | 44,570 tons full load[2] |
| Length: | 283.1 m overall |
| Beam: | 51.0 m |
| Draught: | 10.2 m |
| Propulsion: | 4 shaft geared steam turbines, 140,000 hp |
| Speed: | 32-नॉट (59 km/h) |
| Endurance: | 13500 miles at 18 knots |
| Armament: | 8 CADS-N-1 Kashtan CIWS |
| Aircraft carried: | 16 Mikoyan MiG-29K Or HAL Tejas Or Sea Harrier 10 helicopters mix of Ka-28 helicopters ASW Ka-31 helicopters AEW [3] HAL Dhruv |
आई एन एस (INS) विक्रमादित्य (Sanskrit: विक्रमादित्य, Vikramāditya, "सूर्य की तरह प्रतापी") पूर्व सोवियत विमान वाहक एडमिरल गोर्शकोव का नया नाम है, जो भारत द्वारा हासिल किया गया है, और ऐसा अनुमान है कि 2012 में इसे भारतीय नौसेना में सेवा के लिए शामिल कर लिया जाएगा.[4]
विक्रमादित्य यूक्रेन के माइकोलैव ब्लैक सी शिपयार्ड में 1978-1982 में निर्मित कीव श्रेणी के विमान वाहक पोत का एक रूपांतरण है. फिलहाल रूस के अर्खान्गेल्स्क ओब्लास्ट के सेवेरॉद्विनस्क के सेवमाश शिपयार्ड में इस जहाज की बड़े स्तर पर मरम्मत की जा रही है. वर्तमान समय में भारत के एकमात्र सेवारत विमान वाहक पोत आई एन एस विराट को हटाकर इसे पेश किया जाएगा.
अनुक्रम |
इतिहास [संपादित करें]
खरीद [संपादित करें]
1987 में एडमिरल गोर्शकोव कोसेवारत किया गया, लेकिन 1996 में यह निष्क्रिय हो गया क्योंकि शीत युद्ध के बाद के बजट में इससे काम लेना बहुत ही महंगा पड़ रहा था. इसने भारत का ध्यान आकर्षित किया, जो अपनी वाहक विमानन की क्षमता में इजाफा करने के लिए कोई रास्ता तलाश रहा था.[5] वर्षों तक बातचीत चलने के बाद 20 जनवरी 2004 को रूस और भारत ने जहाज के सौदे के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए. जहाज सेवा मुक्त था, जबकि जहाज में सुधार और मरम्मती के लिए के भारत द्वारा 800 मिलियन यूएस (US) डॉलर के अलावा विमान और हथियार प्रणालियों के लिए अतिरिक्त एक बिलियन यू एस डॉलर (US$1) का भुगतान किया गया. नौसेना वाहक पोत को ई-2सी हॉव्केय (E-2C Hawkeye) से लैस करने की सोच रही थी, लेकिन नहीं करने का निर्णय लिया गया.[6] 2009 में, भारतीय नौसेना को नोर्थरोप ग्रुम्मान ने उन्नत ई-2डी हॉव्केय (E-2D Hawkeye) की पेशकश की.[7]
सौदे में 1 बिलियन यू एस डॉलर में 12 एकल सीट वाला मिकोयान मिग-29के 'फुल्क्रम-डी' (प्रोडक्ट 9.41) और 4 दो सीटों वाले मिग-29केयूबी (14 और विमानों के विकल्प के साथ), 6 कामोव केए-31 "हेलिक्स" टोही विमान और पनडुब्बी रोधी हेलीकाप्टरों, टारपीडो ट्यूब्स, मिसाइल प्रणाली और तोपखानों की ईकाई शामिल है. पायलटों और तकनीकी स्टाफ के प्रशिक्षण के लिए प्रक्रियाएं और सुविधाएं, अनुकारियों की सुपुर्दगी, अतिरिक्त कल-पुर्जे और भारतीय नौसेना प्रतिष्ठान के रखरखाव की सुविधाएं भी अनुबंध का हिस्सा हैं.
ये विकसित योजनाएं शॉर्ट टेक-ऑफ बट एसिस्टेड रिकवरी (एसटीओबीएआर (STOBAR)) विन्यास का रास्ता बनाने के लिए जहाज के फोरडेक से सभी हथियारों और मिसाइल लॉन्चर ट्यूबों को अनावृत करने से जुड़ी हैं.[8] गोर्शकोव को यह एक संकर वाहक/क्रुजर से केवल वाहक में तब्दील कर देगा.
आई एन एस विक्रमादित्य को सौंप दिए जाने की घोषणा अगस्त 2008 को हुई, जिससे इस विमान वाहक पोत को भारतीय नौसेना के सेवानिवृत होने वाले एकमात्र हल्के विमान वाहक आई एन एस विराट की ही तरह सेवा की अनुमति मिल गयी. आई एन एस विराट की सेवानिवृत्ति की समय-सीमा 2010-2012 तक के लिए आगे बढा दी गयी है.[9] देरी के साथ खर्च में होती जा रही वृद्धि का मामला जुड़ गया है. इस मामले के हल के लिए उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत हो रही है. भारत इस परियोजना के लिए अतिरिक्त 1.2 बिलियन यूएस (US) डॉलर का भुगतान करने को तैयार हो गया, जो मूल लागत के दुगुने से अधिक है.[10] हालांकि, विक्रमादित्य की सुपुर्दगी में हो रही देरी, 2012 तक जिसे आगे बढ़ा दिया गया है, का अर्थ यह हो सकता है कि विराट की सेवानिवृत्ति जल्द ही नहीं होने वाली है .नतीजतन, 1960 के बाद से पहली बार भारतीय नौसेना खुद को एक विमान वाहक पोत के बिना पा सकती है. स्वदेशी विक्रांत-श्रेणी के विमान वाहक को कम से कम एक साल की देरी हो चुकी है और इसे जल्द से जल्द 2013 तक कार्यरत किया जा सकेगा, जबकि इसे 2012 में यह प्रस्तावित था.[11]
जुलाई 2008 में, बताया गया कि रूस ने कुल कीमत बढाकर 3.4 बिलियन यूएस डॉलर कर दिया है, उसने इसके लिए जहाज की बिगड़ी हुई हालत के कारण अप्रत्याशित खर्च को जिम्मेवार करार दिया.[12] भारत ने नवंबर 2008 तक 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर का भुगतान कर दिया. हालांकि, अगर भारत जहाज नहीं खरीदना चाहे तो रूसी अब जहाज को अपने पास ही रखने के बारे में सोचने लगे थे.[कृपया उद्धरण जोड़ें] दिसंबर 2008 में, भारत में सरकारी सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्युरिटी (सीसीएस) ने अंततः उपलब्ध सर्वोत्तम विकल्प के रूप में एडमिरल गोर्शकोव को खरीदने के पक्ष में निर्णय लिया है.[13] भारत के लेखानियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि विक्रमादित्य एक पुराना युद्धपोत है जिसकी जीवनावधि छोटी है, जो किसी नए पोत से 60 प्रतिशत अधिक महंगा पडेगा और उसमें अधिक देर होने की भी आशंका है.[14]
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता ने युद्धपोत की कीमत का बचाव करते हुए कहा: "मैं सीएजी पर टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन आप सभी रक्षा विश्लेषक हैं, क्या आप लोग मुझे दो बिलियन अमरीकी डॉलर से कम में कोई विमान वाहक पोत लाकर दे सकते हैं? यदि आप ला सकते हैं तो मैं इसी वक्त चेक लिखकर देने को तैयार हूं". नौसेना प्रमुख के बयान से संभवतः यह संकेत मिलता है कि अंतिम सौदा 2 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का हो सकता है. जहाज खरीदने के काम से पहले नौसेना ने इसका जोखिम विश्लेषण नहीं किया, सीएजी की इस टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मैं आपको यह सुनिश्चित कर सकता हूं कि ऐसी कोई बात नहीं है. इसका कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है, 90 के दशक से ही इस जहाज पर हमारी नज़र रही है."[15]
2 जुलाई 2009 को रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि वाहक को यथासंभव जल्द पूरा कर लिया जाना चाहिए ताकि यह 2012 में भारत को दिया जा सके. [16] 7 दिसंबर 2009 को, रूसी सूत्रों ने बताया कि अंतिम शर्तों पर सहमति हो गयी है, लेकिन कोई सुपुर्दगी तारीख तय नहीं हुई है.[17]
3 सितंबर को मॉस्को में एक संवाददाता सम्मेलन में राज्य प्रौद्योगिकी निगम रोस्टेखनोलोजी के प्रमुख सर्गेई चेमेज़ोव ने कहा कि एडमिरल गोर्शकोव की मरम्मती के लिए भारत और रूस के बीच एक नए सौदे पर अक्तूबर के मध्य में हस्ताक्षर किये जाएंगे.[18]
8 दिसंबर 2009 को खबर आयी कि 2.2 बिलियन डॉलर पर सहमति के साथ गोर्शकोव की कीमत पर भारत और रूस के बीच का गतिरोध समाप्त हो गया है. मॉस्को ने विमान वाहक के लिए 2.9 बिलियन डॉलर की मांग की थी, जो 2004 में दोनों पक्षों के बीच हुई मूल सहमति से लगभग तीन गुना अधिक थी. दूसरी ओर, नई दिल्ली चाहती थी कि कीमत 2.1 अमेरिकी डॉलर की जाय.[19][20] 10 मार्च को, रूसी प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के एक दिन पहले दोनों सरकारों द्वारा एडमिरल गोर्शकोव की कीमत को अंतिम रूप देते हुए 2.35 बिलियन अमेरिकी डॉलर तय किया गया.[21]
नवीकरण [संपादित करें]
जहाज की पेंदी का काम 2008 तक पूरा कर लिया गया[22] और विक्रमादित्य को 4 दिसंबर 2008 को पुनः जलावतरण किया गया.[23] वाहक पर जून 2010 तक संरचनात्मक काम का 99% के आसपास और केबल कार्य का लगभग 50% पूरा कर लिया गया. इंजन और डीजल जेनरेटर सहित लगभग सभी बड़े उपकरण स्थापित कर दिए गये.[24] डेक प्रणाली के परीक्षण के लिए 2010 में एक नौसेना मिग-29के (MiG-29K)प्रोटोटाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है.[25]
डिजाइन [संपादित करें]
जहाज के अगले भाग में 14.3 डिग्री स्की-जंप के साथ और कोणयुक्त डेक के पिछले हिस्से में तीन रोधक तार के साथ जहाज को एसटीओबीएआर (STOBAR) में संचालित किया जाएगा. यह मिग-29के (MiG-29K) और सी हैरियर विमान को संचालित करने की अनुमति देगा. विक्रमादित्य पर मिग-29के (MiG-29K) के लिए अधिकतम उड़ान भरने की लंबाई 160-180 मीटर के बीच है.
'एडमिरल गोर्शकोव' प्लैटफॉर्म का अतिरिक्त लाभ इसकी अधिरचना प्रोफ़ाइल है, इसमें सशक्त समतल या ”बिलबोर्ड स्टाइल” एंटेना के साथ चरणबद्ध प्रभावशाली रडार प्रणाली को अपने अनुरूप बनाने का सामर्थ्य है, जो हवाई अभियान चलाने के लिए व्यापक समादेश और नियंत्रण सुविधा के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका नेवी के यूएसएस (USS) लॉन्ग बीच पर पहली बार देखा गया. एसएएम (SAM) और/या सीआईडब्ल्यूएस (CIWS) जैसे हवाई प्रतिरक्षा हथियारों के संयोजन से सुसज्जित जहाज के रूप में इसे पेश किया गया है.[26]
पेंदी की डिजाइन 1982 में प्रारंभ किए गए पुराने गोर्शकोव एडमिरल पर आधारित है, लेकिन पूरे लदान विस्थापन के साथ यह बहुत बड़ा होगा. 14.3º बो स्की-जंप के लिए रास्ता बनाने के लिए विमान वाहक के लिए रूपांतरण की योजनाओं में पी-500 बाज्लट क्रूज मिसाइल लॉन्चर और सामने की ओर लगे हुए जमीन से हवा में मार करनेवाले चार अन्ते किन्झल(Antey Kinzhal) समेत सारी युद्ध सामग्री को हटाया जाना शामिल है. दो निरोधक स्टैंड भी लगाया जाएंगे, ताकि स्की जंप-एसिस्टेड शॉर्ट टेक-ऑफ से पहले लड़ाकू विमान अपनी पूरी ताकत प्राप्त कर ले. एक समय में केवल एक विमान लॉन्च करने की क्षमता हो सकता है इसके विघ्न को प्रमाणित करती है. आधुनिकीकरण योजना के तहत, जहाज के आईलैंड की अधिरचना के साथ 20 टन क्षमता वाला एलीवेटर अपरिवर्तित ही रहेंगे, लेकिन पिछले लिफ्ट को बड़ा किया जाएगा और इसके भार उठाने की क्षमता में 30 टन तक की वृद्धि की जाएगी. कोणयुक्त डेक के पिछले भाग में तीन आकर्षक गियर लगाए जाएंगे. एलएके (LAK) ऑप्टिकल-लैंडिंग सिस्टम समेत एसटीओबीएआर (STOBAR) (शॉर्ट टेक-ऑफ बट एरेस्टेड रिकवरी) के संचालन के लिए फिक्स्ड विंग को सहारा देने के लिए नेविगेशन और वाहक लैंडिंग सहायक लगाये जाएंगे.[27]
आठ बॉयलरों को निकाल दिया जा रहा है और तेल ईंधन भट्ठी को डीजल ईंधन भट्ठी में तब्दील कर दिया गया है और अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए आधुनिक तेल-जल विभाजकों के साथ-साथ एक दूषित जल शोधक संयंत्र लगाया जा रहा है. इस जहाज में छह नए इतालवी-निर्मित वार्तसिला (Wärtsilä) 1.5 मेगावाट डीजल जेनरेटर, एक वैश्विक समुद्री संचार प्रणाली, स्पेरी ब्रिजमास्टर नेविगेशन रडार, एक नया टेलीफोन एक्सचेंज, नया डेटा लिंक और एक आईएफएफ एमके XI प्रणाली (IFF Mk XI system) भी लगायी जा रही है. जल-उत्पादन संयंत्रों के अलावा योर्क अंतर्राष्ट्रीय प्रशीतन संयंत्र और वातानुकूलक के साथ होटल सेवाओं में सुधार किए जा रहे हैं . घरेलू सेवाओं में सुधार तथा 10 महिला अधिकारियों की आवास सुविधा के साथ एक नया पोत-रसोईघर स्थापित की जा रही है.[27]
हालांकि जहाज का आधिकारिक जीवन काल 20 वर्ष अपेक्षित है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नियुक्ति के समय से इसका जीवन काल वास्तव में कम से कम 30 वर्ष हो सकता है. आधुनिकीकरण के पूरा हो जाने पर जहाज और उसके उपकरण का 70 प्रतिशत नया होगा और बाक़ी का नवीकरण किया जाएगा.[27]
स्थिति [संपादित करें]
रूस के सेवेरॉद्वीन्स्क में पुनर्विन्यासन के सारे काम पूरे किये जा रहे हैं; हालांकि केबल की जरूरत की मात्रा के कम अनुमान लगाये जाने के कारण इसमें तीन साल की देरी हो गई है और वर्ष 2012 तक इसकी नियुक्ति हो जाएगी.[28] समस्याओं को हल करने के लिए भारत और रूस के बीच तकनीकी और वित्तीय मामलों पर एक विशेषज्ञ स्तर की चर्चा आयोजित की गयी है.[29] फरवरी 2010 में मिग-29के ने भारत के साथ परिचालन-संबंधी सेवा में प्रवेश किया. एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया और भारत एक अतिरिक्त अज्ञात राशि का भुगतान करेगा. रूस पुराने की मरम्मत करने के बजाय नई प्रणाली स्थापित करेगा और वाहक पोत 2011 में सुपुर्द कर दिया जाएगा. उसके बाद, 2012 में भारतीय नौसेना में तैनात करने से पहले इसे समुद्र में 18 महीने तक परीक्षण में रखा जाएगा.[30]
1 जून 2010 को, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक नौसेना अधिकारी का बयान प्रकाशित हुआ: "जनवरी 2004 में सिर्फ 974 मिलियन डॉलर पर हुए पहले के समझौते के बाद से तीन साल तक चले तीखे तकरार के बाद इस वर्ष के प्रारंभ में गोर्शकोव के लिए 2.33 बिलियन डॉलर की संशोधित मरम्मत लागत पर भारत के सहमत हो जाने पर रूस ने वाहक पोत के काम की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय शीर्ष समिति नियुक्त की." 2011 के प्रारंभ तक समुद्री परीक्षण के लिए जहाज को उतारे जाने की संभावना है, ताकि इसे दिसंबर 2012 या इसके आसपास भारत को सौंपा जा सके.[24]
नामकरण [संपादित करें]
"विक्रमादित्य" एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है "सूर्य की तरह प्रतापी"[31] और भारतीय इतिहास के कुछ प्रसिद्ध राजाओं का भी नाम है, जैसे कि उज्जैन के विक्रमादित्य, जिन्हें एक महान शासक और शक्तिशाली योद्धा के रूप में जाना जाता है. यह उपाधि का प्रयोग भारतीय राजा चंद्रगुप्त द्वितीय द्वारा भी किया जाता था जिनका शासन-काल 375-413/15 ई.सं. के बीच रहा
इन्हें भी देखें [संपादित करें]
- विमान वाहक की सूची
संदर्भ [संपादित करें]
- ↑ http://en.rian.ru/russia/20080603/109132065.html
- ↑ Rajat Pandit. "Navy crosses fingers on LCA rollout". Times of India. http://timesofindia.indiatimes.com/India/Navy-crosses-fingers-on-LCA-rollout/articleshow/6131742.cms.
- ↑ http://www.globalsecurity.org/military/world/india/r-vikramaditya-specs.htm
- ↑ 2012 तक रूस ने आई एन एस (INS) विक्रमादित्य (एडम गोर्शकोव) के डिलिवरी को विलंब किया
- ↑ http://www.strategypage.com/htmw/htnavai/articles/20100603.aspx
- ↑ IndiaDefence.com - व्हाट्स हॉट? हाल की घटनाओं का विश्लेषण - एयरो इंडिया 2005 - नौसेना शौक - एक आईडीसी (IDC) रिपोर्ट
- ↑ भारतीय नौसेना नौर्थ्रोप एडवांस्ड हॉकआई को मल दिया
- ↑ डिफेन्स टॉक - सूखे डॉक में काम कर रहे गोर्शकोव के चित्र
- ↑ डिफेंस इंडस्ट्री डेली आई एन एस (INS) विक्रमादित्य हिट्स डिले , कॉस्ट इन्क्रिसेज़
- ↑ मूल्य पर वृद्धि होने पर एनडीटीवी (NDTV) न्यूज़ क्लिप
- ↑ दिसंबर में स्वदेशी विमान वाहक का उलट के ढ़ेर हो जाना
- ↑ यदि भारत $2 bln से अधिक देने को तैयार होते हैं तो रूसी विमान वाहक रेडी हो जाएगा
- ↑ [1]
- ↑ [2]
- ↑ [3]
- ↑ मेदवेदेव भारत के लिए विमान वाहक के पूरा होने का आग्रह किया
- ↑ भारत के साथ वितरण शर्तों के साथ रूस की सहमति
- ↑ [4]
- ↑ http://timesofindia.indiatimes.com/india/India-Russia-end-stalemate-over-Gorshkov-price-deal/articleshow/5314150.cms
- ↑ http://www.indianexpress.com/news/usd-2.2billion/551431/
- ↑ [5]
- ↑ गोर्शकोव के हल की मरम्मत पूरी हुई
- ↑ Christopher P. Cavas (December 8, 2008). "Russian Carrier Conversion Moves Forward". http://www.defensenews.com/story.php?i=3854813&c=SEA&s=TOP. अभिगमन तिथि: December 10, 2008.
- ↑ 24.0 24.1 http://timesofindia.indiatimes.com/India/Gorshkov-to-be-handed-over-to-India-by-Dec-12/articleshow/5995560.cms
- ↑ http://www.janes.com/news/defence/jni/jni100622_1_n.shtml
- ↑ http://www.indiadefence.com/mig29k.htm
- ↑ 27.0 27.1 27.2 http://www.globalsecurity.org/military/world/india/r-vikramaditya.htm
- ↑ भारतीय डिफेंस मार्केट से अमेरिका रूस को बाहर करने की कोशिश करता है
- ↑ गोर्शकोव डील पर केवल कुछ तकनीकी, वित्तीय मुद्दें अनिर्णीत है
- ↑ सोवियत युग के विमान वाहक पर भारत और रूस में विवाद खत्म
- ↑ वस्तुतः "सूर्य की वीरता" (विक्रम) के रूप में विक्रमादि त्य का अनुवाद किया गया. अवयव "आदित्य" (सूरज) का शाब्दिक अर्थ "वह जो अदिती से संबंध रखता है" है.
बाहरी लिंक्स [संपादित करें]
- वीडियो: आई एन एस (INS) विक्रमादित्य हिट्स वॉटर
- डिफेंस इंडस्ट्री डेली -आई एन एस (INS) विक्रमादित्य हिट्स डिले, कॉस्ट इन्क्रिसेज़. कार्यक्रम की पूर्ण इतिहास, वायुविषयक के पूरक, और संबंधित घटनाओं को आवरण करता है.
- आई एन एस (INS) विक्रमादित्य - भारत रक्षक
- दुनिया भर में विमान वाहक पर फोटो, मॉडल, और जानकारी
- भारत को रूस द्वारा विमान वाहक पुनर्निर्माण करने मिला (भाग 1)
- मरम्मत में विक्रमादित्य के नवीनतम चित्र!!!
- आई एन एस (INS) विक्रमादित्य के नवीनतम वीडियो!
- गूगल मैप्स (Google Maps) द्वारा सेवेरॉद्वीन्स्क में आई एन एस (INS) विक्रमादित्य के उपग्रह फोटो
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