अरल सागर
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अरल सागर (कज़ाख़: Арал Теңізі, उज़्बेक: Orol dengizi, रूसी: Аральскοе мοре IPA: [əˌralʲskəjə ˈmɔrʲɛ], ताजिक/फ़ारसी: दरिय(ओचा)-ए-खवारज़्म) मध्य एशिया में स्थित एक झील है जिसका आकार घटता जा रहा है । इसका शाब्दिक अर्थ है द्वीपों की झील जो इस झील में एक समय दिखने वाले कोई 1500 टापुओं के आधार पर नामांकित थी । 1960 में सोवियत प्रशासन ने इसमें विसर्जित होने वाली दो नदियों - आमू और सीर नदी को मरुभूमि सिंचाई के लिए विमार्गित करने का निर्णय लिया जिसके बाद से ये तीन अलग-अलग भागों में बंट गया है और इसका आकार 1960 के पूर्व के 10 प्रतिशत पर आ गया है ।
[संपादित करें] इतिहास
एक समय इसका क्षएत्रफल कोई 68,000 वर्ग किलोमीटर था । इसके बाद से यह 2007 तक अपने 10 प्रतिशत पर आ गया है । पानी की लवणता में वृद्धि हो रही है और मछलियों का जीवन असंभव हो गया है । इसके एवज में उज्बेकिस्तान दुनिया के प्रमुख कपास निर्यातकों में गिना जाने लगा है, जो एक समय सोवियत संघ की योजना थी ।
[संपादित करें] भूगोल
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