अयातुल्ला मोहम्मद हुसैन फदलल्लाह

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लेबनान के सर्वोच्च आध्यात्मिक शिया नेता जिन्होंने 1982 में स्थापित चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्लाह की स्थापना की थी। इस्लाम धर्म में शिया संप्रदाय में उदारवाद के प्रबल पैरोकार इस नेता का इस्लामिक जगत में बहुत आदर से नाम लिया जाता है। फादलल्लाह के अनुयायी न केवल लेबनान में बल्कि मध्य एशिया और खाड़ी देशों में भी फैले हुए हैं।

जीवन वृत[संपादित करें]

इराक़ के धार्मिक शहर नजफ़ में पैदा हुए फ़ज़लुल्लाह अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1966 में लेबनान चले गए।

माना जाता है कि बेरूत में 1985 में हुए कार बम हमले के जरिए फ़ज़लुल्लाह की हत्या करने की कोशिश की गई। हमले में 80 लोग मारे गए थे, इन हमलों में अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए का हाथ माना जाता है।

अपने आखिरी दिनों में फ़ज़लुल्लाह ने हिज़बुल्लाह के ईरान से संबंधों की वजह से खुद को संगठन से दूर कर लिया था। लेकिन वे मध्य पूर्व और इसरायल में अमरीकी नीतियों के विरोधी बने रहे. उनका 74 वर्ष की अवस्था में 4 जुलाई 2010 ई. को निधन हो गया।

कार्य[संपादित करें]

वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने ढेर सारे धार्मिक स्कूल, अस्पताल और पुस्तकालय खुलवाए। मुहर्रम के दिन मातम करने वाले लोगों द्वारा खुद को लहुलुहान करने की प्रथा के भी वे विरोधी थे। उन्होंने शिया सम्प्रदाय में इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया था।

विचारधारा[संपादित करें]

वे पश्चिम एशिया में अमरीकी नीतियों के प्रखर आलोचक थे। 1979 में ईरान में हुए इस्लामिक क्रांति का उन्होंने समर्थन किया था। उनकी उदारवादी सामाजिक विचारधारा के लिए जाना जाता है। उन्होंने इस्लाम धर्म, राजनीति और महिलाओं पर 40 से ज्यादा किताबें लिखीं। महिलाओं के प्रति उनकी विचारधारा काफी उदार थी।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]