अभिजित् तारा

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अभिजित् और सूरज के आकारों की तुलना - सूरज दाएँ पर है
शायद ऐसे ही दो बौने ग्रहों के टकरा के ध्वस्त हो जाने से अभिजित् के इर्द-गिर्द का मलबा चक्र बन गया (काल्पनिक चित्र)

अभिजित् या वेगा, जिसका बायर नाम "अल्फ़ा लायरे" (α Lyrae या α Lyr) है, लायरा तारामंडल का सब से रोशन तारा है। यह पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से पाँचवा सब से रोशन तारा भी है। अभिजित् पृथ्वी से 25 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। खगोलशास्त्री हज़ारों सालों से अभिजित् का अध्ययन करते आए हैं और कभी-कभी कहा जाता है के यह "सूरज के बाद शायद आसमान में सब से महत्त्वपूर्ण तारा है"।

अन्य भाषाओँ में[संपादित करें]

अभिजित् को अंग्रेज़ी में "वेगा" (Vega) कहते है।

विवरण[संपादित करें]

अभिजित् आसमान में घूम रहा है - सन् 12,000 ईसा पूर्व में यह उत्तर ध्रुव का तारा था (यानि हमेशा ठीक उत्तर की ओर होता था)। यह वहां से हिल चुका है लेकिन सन् 13,727 ईस्वी में यह फिर से उत्तर ध्रुव का तारा बन जाएगा।

अभिजित् की उम्र केवल 45 करोड़ वर्ष है। हमारे सूरज की उम्र इस से दस गुना ज़्यादा है। इसका द्रव्यमान (मास) सूरज के द्रव्यमान का लगभग 2.1 गुना है और इसका व्यास (डायामीटर) सौर व्यास का लगभग 2.26 गुना है। इसमें नाभिकीय संलयन (न्यूक्लीयर फ्यूज़न) इतनी फ़ुर्ती से चल रहा है के अभिजित् अपना हाइड्रोजन इंधन बहुत तेज़ी से ख़त्म कर रहा है और इसका पूरा जीवनकाल पृथ्वी के सूरज के जीवनकाल का दसवा ही होगा। अभिजित् अपने पूरे जीवनकाल का लगभग आधा समय व्यतीत कर चुका है। श्रेणीकरण के हिसाब से यह एक A0V श्रेणी का तारा है, यानि एक नीला-से रंग का मुख्य अनुक्रम तारा है।

अभिजित् बहुत तेज़ी से घूर्णन कर रहा है (यानि अपने अक्ष पर घूम रहा है)। घूर्णन की यह 274 किलोमीटर प्रति सैकिंड की रफ़्तार इतनी तेज़ है के यदि यह थोड़ी सी अधिक तेज़ होती तो यह तारा टूटकर बिखरना शुरू हो जाता। इतने तेज़ घूर्णन से यह थोड़ा-सा पिचक भी गया है - इसकी चौड़ाई इसकी लम्बाई से 23% ज़्यादा है।

ग्रह और मलबा चक्र[संपादित करें]

अभिजित् से आने वाले अवरक्त विकिरण (इन्फ़्रारॅड रेडियेशन) को परखने से ज्ञात हुआ है के इस तारे के इर्द-गिर्द एक मलबे का चक्र परिक्रमा कर रहा है जो सौर मंडल के बाहरी इलाक़ों में सूरज की परिक्रमा करते हुए काइपर घेरे जैसा है। वैज्ञानिक मानते हैं के यह धूल-ग़ुबार अभिजित् के पास खगोलीय वस्तुओं के आपसी टकराव से पैदा हुआ है।

अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ है के एक बृहस्पति जैसा गैस दानव ग्रह भी शायद अभिजित् की परिक्रमा कर रहा है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]