अपरिग्रह

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अपरिग्रह एक अवधारणा है जिसमें अधिकारात्मकता से मुक्ति पाई जाती है। यह विचार मुख्य रूप से जैन धर्म तथा हिन्दू धर्म के राज योग का हिस्सा है। जैन धर्म के अनुसार "अहिंसा और अपरिग्रह जीवन के आधार हैं"।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]