अनुपातहीन सम्पत्ति

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जब किसी व्यक्ति की कुल सम्पत्ति इतनी अधिक हो कि उसकी वैध आय से उसका कोई सम्बन्ध ही नहीं बनाया जा सके तो इसे अनुपातहीन सम्पत्ति (Disproportionate Assets) हैं।

किसी लोकसेवक (public servant) के पास अनुपातहीन सम्पत्ति होने पर उसके भ्रष्टाचारी होने की जाँच आरम्भ करने के लिये प्रायः आधार बनती है। यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, १९८८ एवं अन्य केंद्रेएय व राज्य कानूनों में सम्मिलित है।

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