अजातशत्रु (मगध का राजा)

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
अजातशत्रु (मगध का राजा)
मगध साम्राज्य के सम्राट
Ajatashatru of Magadha makes a midnight call.jpg
अजातशत्रु मगध में एक अर्ध-रात्रि गुप्तभ्रमण करते हुए
शासन 492 ई०पू – 460 ई०पू
पूर्वाधिकारी बिम्बसार
उत्तराधिकारी उदयभद्र
Consort to राजकुमारी वजिरा
संतान उदयभद्र
राज घराना हर्यक वंश
पिता बिम्बसार
धर्म बौद्ध

अजातशत्रु (लगभग 493 ई. पू.[1]) मगध का एक प्रतापी सम्राट और बिंबिसार का पुत्र जिसने पिता को मारकर राज्य प्राप्त किया। उसने अंग, लिच्छवि, वज्जी, कोसल तथा काशी जनपदों को अपने राज्य में मिलाकर एक विस्तृत साम्राज्य की स्थापना की। अजातशत्रु के समय की सबसे महान घटना बुद्ध का महापरिनिर्वाण थी (464 ई. पू.)। उस घटना के अवसर पर बुद्ध की अस्थि प्राप्त करने के लिए अजात शत्रु ने भी प्रयत्न किया था और अपना अंश प्राप्त कर उसने राजगृह की पहाड़ी पर स्तूप बनवाया। आगे चलकर राजगृह में ही वैभार पर्वत की सप्तपर्णी गुहा से बौद्ध संघ की प्रथम संगीति हुई जिसमें सुत्तपिटक और विनयपिटक का संपादन हुआ। यह कार्य भी इसी नरेश के समय में संपादित हुआ।

विस्तार नीति[संपादित करें]

अजातशत्रु द्वारा उपयोग किया गया हथियार 'महाशिला कंटक'

बिंबिसार ने मगध का विस्तार पूर्वी राज्यों में किया था, इसलिए अजातशत्रु ने अपना ध्यान उत्तर और पश्चिम पर केंद्रित किया। उसने कोसल एवं पश्चिम में काशी को अपने राज्य में मिला लिया। वृजी संघ के साथ युद्ध के वर्णन में 'महाशिला कंटक' नाम के हथियार का वर्णन मिलता है जो एक बड़े आकर का यन्त्र था, इसमें बड़े बड़े पत्थरों को उछलकर मार जाता था। इसके अलावा 'रथ मुशल' का भी उपयोग किया गया। 'रथ मुशल' में चाकू और पैने किनारे लगे रहते थे, सारथी के लिए सुरक्षित स्थान होता था, जहाँ बैठकर वह रथ को हांककर शत्रुओं पर हमला करता था।[1]

पालि ग्रंथों में अजातशत्रु का नाम अनेक स्थानों पर आया है; क्योंकि वह बुद्ध का समकालीन था और तत्कालीन राजनीति में उसका बड़ा हाथ था। गंगा और सोन के संगम पर पाटलिपुत्र की स्थापना उसी ने की थी। उसका मंत्री वस्सकार कुशल राजनीतिज्ञ था जिसने लिच्छवियों में फूट डालकर साम्राज्य का विस्तार किया था। कोसल के राजा प्रसेनजित को हराकर अजातशत्रु ने राजकुमारी वजिरा से विवाह किया था जिससे काशी जनपद स्वतः यौतुक रूप में उसे प्राप्त हो गया था। इस प्रकार उसकी इस विजिगीषु नीति से मगध शक्तिशाली राष्ट्र बन गया। परंतु पिता की हत्या करने के कारण इतिहास में वह सदा अभिशप्त रहा। प्रसेनजित का राज्य कोसल के राजकुमार विडूडभ ने छीन लिया था। उसके राजत्वकाल में ही विडूडभ ने शाक्य प्रजातंत्र का ध्वंस किया था।

मृत्यु[संपादित करें]

461 ई. पू. में अजातशत्रु की मृत्यु हो गयी, इसके पश्चात अजातशत्रु के वंश के पांच राजाओं ने मगध पर शासन किया। ऐसा विवरण मिलता है के लगभग सभी ने अपने अपने पिता की हत्या की थी। [1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. थापर, रोमिला. भारत का इतिहास. राजकमल प्रकाशन. प॰ 49. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-267-0568-X. http://books.google.co.in/books?id=Cz0xygAACAAJ. 

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]